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Iran Israel War: भारत के बंदरगाह तक पहुंची जंग की आंच! समुद्र में फंसी 2,000 कारें

US Israel Iran war impact: पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर अब भारत की एक्सपोर्ट व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है. रिपोर्ट के अनुसार गल्फ देशों को भेजी जा रहीं हुंडई की तकरीबन 2,000 गाड़ियों को वापस चेन्नई पोर्ट पर लाया जा सकता है.

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चेन्नई पोर्ट पर कारों के लिए टेंपरेरी कार्गो स्टोरेज स्पेस तैयार किया जा रहा है. सांकेतिक तस्वीर- Photo: Pixabay
चेन्नई पोर्ट पर कारों के लिए टेंपरेरी कार्गो स्टोरेज स्पेस तैयार किया जा रहा है. सांकेतिक तस्वीर- Photo: Pixabay

पश्चिम एशिया में चल रहा टकराव अब भारत के बंदरगाहों तक असर दिखाने लगा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि समुद्र में चल रहे जहाजों के रास्ते बदल रहे हैं और एक्सपोर्ट की पूरी प्लानिंग गड़बड़ा रही है. ताजा मामला करीब 2,000 कारों का है, जिन्हें गल्फ देशों के लिए भेजा गया था, लेकिन अब उन्हें वापस चेन्नई पोर्ट लाने की नौबत आ सकती है. यानी जंग का मैदान भले ही हिंदुस्तान से दूर हो, लेकिन इसकी आंच भारत के एक्सपोर्ट और कारोबार तक महसूस होने लगी है. इरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हो रही इस जंग का असर खासकर ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल एक्सपोर्ट पर पड़ता दिख रहा है.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर अब भारत की एक्सपोर्ट व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है. रिपोर्ट के अनुसार करीब 2,000 गाड़ियां, जिन्हें हुंडई मोटर इंडिया ने गल्फ देशों के लिए भेजा था, अब वापस चेन्नई पोर्ट (Chennai Port) लाए जाने की संभावना है. इन गाड़ियों को पहले पोर्ट ऑफ हंबनटोटा (Port of Hambantota) के जरिए पश्चिम एशिया के बाजारों तक पहुंचाया जाना था. लेकिन समुद्र में मचे जंगी उथल-पुथल के कारण शिपिंग कंपनियां अपने रूट और कार्गो मूवमेंट पर दोबारा विचार कर रही हैं.

रिपोर्ट में पोर्ट अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि, समुंद्र के मेन रूट जैसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) और लाल सागर में मौजूदा हालात के चलते जहाजों की आवाजाही को लेकर जोखिम बढ़ गया है. इसी वजह से कई शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों को इन रास्तों से गुजरने से फिलहाल बचा रही हैं. गल्फ देशों से जुड़े कंटेनर ट्रैफिक पर भी इस संकट का असर पड़ा है. रिपोर्ट में पोर्ट सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि, लगभग 4,000 कंटेनरों को उनके तय रास्तों से वापस मोड़ दिया गया है. इनमें से करीब 1,800 कंटेनर चेन्नई से भेजे गए थे.

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jawahar Lal nehru port
नवी मुंबई में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) पर फंसे हुए कंटेनर. Photo: PTI

फरवरी के आखिर में जब से जंग तेज हुई है, तमिलनाडु के बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही धीमी पड़ गई है. इसका सबसे ज्यादा असर तमिलनाडु में मन्नार की खाड़ी में स्थित वी.ओ. चिदंबरम पोर्ट (VO Chidambaranar Port) पर देखने को मिल रहा है, जो गल्फ देशों के लिए कंटेनर एक्सपोर्ट का एक बड़ा सेंटर माना जाता है. 

आमतौर पर इस पोर्ट से कपड़े, होम टेक्सटाइल, फूड प्रोडक्ट, अंडे और इंजीनियरिंग कास्टिंग जैसे सामान सीधे पश्चिम एशिया भेजे जाते हैं. लेकिन मौजूदा हालात के कारण कई शिपमेंट अब देरी या रूट बदलने की समस्या का सामना कर रही हैं. बीते 28 फरवरी को झोंग गु ताई युआन (Zhong Gu Tai Yuan) कार्गो शिप 250 कंटेनर लेकर थूथुकुडी बंदरगाह से रवाना हुआ था, लेकिन समुद्र के बीच में ही उसे अपना रास्ता बदलना पड़ा और बाद में कार्गो को जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर उतारना पड़ा.

चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी इस मामले को संभालने के लिए कई तरह के विकल्प पर काम कर रही है. चिदंबरम पोर्ट के टर्मिनल के बाहर लगभग 20,000 वर्ग मीटर यार्ड के एरिया को टेंपरेरी कार्गो स्टोरेज के तौर पर इस्तेमाल किए जाने पर विचार किया जा रहा है. ताकि जरूरत पड़ने पर वहां कंटेनर रखे जा सकें. पोर्ट अथॉरिटी और एक्सपोटर्स के बीच हाई लेवल मीटिंग का दौर जारी है, ताकि जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बचाने के लिए वैकल्पिक समुद्री रास्तों पर भी विचार किया जा सके.
 

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