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DRDO ने बताई इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की वजह, Ola समेत इन कंपनियों को समन जारी

डीआरडीओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बैटरी की खराब गुणवत्ता इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की घटनाओं का मूल कारण है. इसके अलावा अलग-अलग टेम्परेचर पर बैटरी पैक की पर्याप्त जांच नहीं होना भी एक अन्य कारण है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बैटरी की गुणवत्ता खराब रही होगी.

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पता चल गया मूल कारण पता चल गया मूल कारण
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने के कई मामले
  • डीआरडीओ को मिला था वजह ढूंढने का काम

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) को सरकार से लेकर ऑटो कंपनियां (Auto Companies) तक बढ़ावा दे रही हैं. हालांकि एक के बाद एक आग लगने की घटना से इलेक्ट्रिक वाहनों खासकर इलेक्ट्रिक स्कूटरों (Electric Scooters) पर लोगों का भरोसा कम हुआ है. हालात ऐसे हो गए कि सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ गया और डीआरडीओ (DRDO) को पूरे मामले की गहराई से जांच करने को कहा गया. अब खबरें आ रही हैं कि डीआरडीओ ने रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. सरकार ओला (Ola Electric) समेत कई इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियों को इस मामले में समन भी जारी कर चुकी है.

डीआरडीओ ने खोज ली असली वजह

जांच का जिम्मा DRDO की यूनिट Centre for Fire, Explosive and Environment Safety (CFEES) को मिला था. सूत्रों ने आजतक की सहयोगी वेबसाइट बिजनेस टुडे को बताया कि रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा चुकी है. कुछ खबरों में DRDO के हवाले से आग लगने की घटनाओं का मूल कारण बताया जा रहा है. खबरों की मानें तो इलेक्ट्रिक स्कूटरों में अचानक आग लगने की घटना का संबंध बैटरी की खराबी से है.

लागत बचाने के लिए गुणवत्ता से समझौता

डीआरडीओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बैटरी की खराब गुणवत्ता इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की घटनाओं का मूल कारण है. इसके अलावा अलग-अलग टेम्परेचर पर बैटरी पैक की पर्याप्त जांच नहीं होना भी एक अन्य कारण है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बैटरी की गुणवत्ता खराब रही होगी. इस आशंका की वजह ये है कि ई-स्कूटर (E-Scooter) बनाने वाली कंपनियां लागत कम करने के लिए जानबूझकर कम गुणवत्ता वाला सामान इस्तेमाल करती हैं. इस तथ्य को ध्यान में रखकर डीआरडीओ ने इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों के लिए नियमों को सख्त करने का सुझाव दिया है.

इन कंपनियों को मिला समन, देंगी सफाई

अभी दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की हिस्सेदारी महज 2 फीसदी है. इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की ये घटनाएं ऐसे समय पर सामने आई हैं, जब सरकार ने 2030 तक दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 80 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है. पिछले साल से अब तक इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आग लगने की 9 घटनाएं आई हैं. ओला (Ola Electric), ओकिनावा (Okinawa Autotech), प्योर ईवी (Pure EV), बूम मोटर (Boom Motors) और जितेंद्र इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Jitendra Electric Vehicles) की गाड़ियों में आग लगने की घटनाएं सामने आई थीं. सरकार पिछले सप्ताह इन कंपनियों को समन जारी कर रिपोर्ट पर सफाई रखने के लिए कह चुकी है.

अब तक इतनी गाड़ियां हो चुकीं वापस

आग की घटनाओं पर सरकार के सख्त रवैये के बाद वाहन कंपनियों ने हाल के महीनों में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलरों को वापस मंगाया है. ओला, ओकिनावा और प्योर ईवी ने करीब 7,000 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को वापस मंगवाया था. ओला इलेक्ट्रिक ने 1400, प्योर ईवी ने 2000 और ओकिनावा ने 3215 यूनिट को वापस मंगाया है. दूसरी ओर एक अच्छी बात है कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में अच्छी खासी तेजी देखी जा रही है. फाडा (FADA) के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में देश में बैटरी से चलने वाले 4,29,217 वाहन बिके. यह एक साल पहले के 3 गुने से भी ज्यादा है.

 

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