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अंटार्कटिका में गूंजा ‘वंदे मातरम्’... सातों महाद्वीपों तक पहुंचा भारंगम, NSD ने रचा नया इतिहास

भारत रंग महोत्सव 2026 ने नई दिल्ली से शुरू होकर कनाडा, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, मॉरीशस, कतर, सूरीनाम सहित कुल 15 देशों में भारतीय नाटकों का मंचन किया. अंटार्कटिका में भी शून्य से 6 डिग्री नीचे तापमान में भारतीय रंगमंच की प्रस्तुति दी गई.

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अंटार्कटिका में भारत रंग महोत्सव के तहत नाटक का मंचन करते कलाकार
अंटार्कटिका में भारत रंग महोत्सव के तहत नाटक का मंचन करते कलाकार

भारतीय रंगमंच के सबसे बड़े उत्सवों में शामिल 'भारत रंग महोत्सव 2026' ने इस साल एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है. राष्ट्रीय नाट्य विद्याल (National School of Drama (एनएसडी)) द्वारा आयोजित इस महोत्सव की प्रस्तुतियां सातों महाद्वीपों तक पहुंचीं. कनाडा, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, मॉरीशस, कतर और सूरीनाम समेत कुल 15 देशों में नाटकों का मंचन हुआ. खास बात यह रही कि अंटार्कटिका में भी शून्य से 6 डिग्री नीचे तापमान में भारतीय रंगमंच की प्रस्तुति दी गई.

Bharat Rang Mahotsav

श्रीराम के मंचन से हुई महोत्सव की शुरुआत
महोत्सव की शुरुआत 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित एनएसडी परिसर में नाटक ‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम’ से हुई. इस नाटक को निशांत भारती ने लिखा और डॉ. रेखा मेहरा ने निर्देशित किया. इसके बाद 31 जनवरी को कनाडा के मिसिसॉगा में महोत्सव का पहला अंतरराष्ट्रीय संस्करण आयोजित हुआ, जहां सात नाटकों का मंचन किया गया.

महोत्सव का सबसे अनोखा कार्यक्रम 13 फरवरी को अंटार्कटिका में हुआ. यहां भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम के तहत कार्यरत वैज्ञानिकों ने मैत्री स्टेशन पर 'भगवद्गीता' के अर्जुन और श्रीकृष्ण के संवादों पर आधारित नाट्य प्रस्तुति दी. इसके साथ ही राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर सामूहिक गायन भी किया गया.

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कनाडा, कतर, दुबई, जर्मनी में हुई प्रदर्शनी
एनएसडी के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने कहा कि, भारत रंग महोत्सव अब केवल एनएसडी का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति का वैश्विक उत्सव बन चुका है. वह कहते हैं कि यह महोत्सव विभिन्न शैलियों और सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़े कलाकारों को मंच प्रदान करता है. महोत्सव के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्करणों में कनाडा, कतर, दुबई, जर्मनी और सूरीनाम समेत कई देशों में नाट्य प्रस्तुतियां हुईं. इस वर्ष के महोत्सव में करीब 5000 कलाकारों, 1000 तकनीशियनों और हजारों सहयोगी कर्मियों ने भाग लिया. साथ ही ‘जश्ने बचपन’ और ‘आदिरंग थिएटर फेस्टिवल’ जैसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों और जनजातीय कलाकारों की भी सक्रिय भागीदारी रही.

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