'US दुनिया का सबसे ताकतवर देश नहीं', ट्रंप की विदेश नीति पर अमेरिकी पत्रकार ने उठाए सवाल

वरिष्ठ पत्रकार रिक सांचेज ने चेतावनी दी कि डोनाल्ड ट्रंप की अस्थिर विदेश नीति, जो विरोधाभासी संदेशों से भरी है, अमेरिका को अलग-थलग कर रही है और उसके सहयोगियों को चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों के करीब धकेल रही है.

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 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (Photo: AP) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (Photo: AP)

गीता मोहन

  • नई दिल्ली,
  • 06 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 9:46 PM IST

अमेरिका के वरिष्ठ पत्रकार रिक सांचेज ने वैश्विक शक्ति संतुलन में हो रहे बदलावों पर तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि डोनाल्ड ट्रंप की उलझन भरी और विरोधाभासी विदेश नीति के कारण अमेरिका अपनी रणनीतिक स्थिति खो रहा है और अनजाने में प्रतिद्वंद्वी देशों के गठबंधनों को मजबूत कर रहा है. शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के बाद अपनी बात रखते हुए सांचेज ने कहा कि अमेरिका की नीतियों में स्थिरता की कमी उसे अलग-थलग कर रही है.

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उन्होंने ट्रंप की कम्युनिकेशन स्टाइल पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'वह कभी गर्मजोशी भरा, तो कभी उदासीन व्यवहार करते हैं. एक दिन वह आपसे प्यार करते हैं, अगले दिन नफरत. अमेरिका से इन दिनों जो संदेश जा रहा है, वह इतना उलझन भरा है कि लोग यह तय नहीं कर पा रहे कि उस पर प्रतिक्रिया दें या नजरअंदाज करें. ज्यादातर लोग (दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्ष) इसे नजरअंदाज करना चुन रहे हैं.' सांचेज ने जोर देकर कहा कि यह अस्थिरता वैश्विक व्यापार के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करती है.

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ट्रंप कर रहे व्यापार के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन

उन्होंने कहा, 'अगर आप एक सच्चे बिजनेसमैन हैं, तो आप जानते हैं कि बाजार को कभी भ्रमित नहीं करना चाहिए. संदेश में एकरूपता होनी चाहिए.' रिक सांचेज का मानना है कि यह भ्रम अमेरिका के पारंपरिक सहयोगियों को वैकल्पिक व्यवस्थाओं की ओर धकेल रहा है. रिक सांचेज ने बताया कि कैसे चीन भारत को लुभा रहा है. वह भारत से कह रहा है, 'हम आपके दोस्त होंगे, आपके व्यापारिक साझेदार होंगे, आपके उत्पाद खरीदेंगे, दुर्लभ खनिज साझा करेंगे. आइए, मिलकर वह करें जो आप अमेरिका से उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब उस पर भरोसा नहीं करते.'

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ब्रिक्स गठबंधन पश्चिमी वर्चस्व के लिए एक बड़ा खतरा

सांचेज ने उभरते ब्रिक्स गठबंधन को पश्चिमी वर्चस्व के लिए एक बड़ा खतरा बताया. उन्होंने कहा, 'ये देश जो शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में एक साथ आए हैं, वे संयुक्त रूप से G7 या किसी भी पश्चिमी देशों के गठबंधन, जिसमें अमेरिका भी शामिल है, उनसे कहीं अधिक शक्तिशाली हो सकते हैं.' उन्होंने ट्रंप की नीतियों को इन नए गठजोड़ों को बढ़ावा देने वाला बताया. सांचेज ने कहा, 'ऐसे गठजोड़ों के लिए दरवाजा खोलने वाला कोई और नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप हैं. वह रूस से कह रहे हैं कि हम आपके दोस्त नहीं बनना चाहते, जाओ चीन के साथ दोस्ती करो.' उन्होंने अमेरिकी कूटनीति में दोहरे मापदंडों की भी आलोचना की.

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ट्रंप का पुतिन से मिलना ठीक तो मोदी गलत कैसे हुए?

इस वरिष्ठ अमेरिकी पत्रकार ने कहा, 'डोनाल्ड ट्रंप के लिए पुतिन से मिलना ठीक है, बीजिंग से बात करना ठीक है, लेकिन मोदी का इन नेताओं से मिलना गलत है. यह लगभग हास्यास्पद है, है ना? मैं कर सकता हूं, लेकिन तुम नहीं कर सकते.' सांचेज ने सांस्कृतिक बदलावों की भी ओर इशारा किया. उन्होंने रूस की एअरोफ्लोट एयरलाइंस की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा, 'इस एयरलाइंस में पहले अमेरिकी फिल्में दिखाई जाती थीं, अब नहीं. मेन्यू में कुछ भी अमेरिकी नहीं था. रूसी दुकानों में भी अमेरिकी उत्पाद नहीं दिख रहे.' रिक सांचेज ने अमेरिका के सुपर पावर स्टेटस को भी नकार दिया.

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अमेरिका अब दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश नहीं है

उन्होंने कहा, 'अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश नहीं है. इजरायल सबसे शक्तिशाली देश है, और वह अमेरिका को नियंत्रित करता है. जब इजरायल कहता है भौंको, तो अमेरिका भौंकता है.' उन्होंने कहा कि वर्ल्ड ऑर्डर में अमेरिका की यह स्थिति ट्रंप के समर्थकों को भी नाराज कर रही है. डोनाल्ड ट्रंप के 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (MAGA) अभियान का समर्थन करने वाले अब उनके खिलाफ हो रहे हैं, क्योंकि वे कह रहे हैं कि आपने कहा था कि आप अमेरिका को प्राथमिकता देंगे, लेकिन आप इजरायल को प्राथमिकता दे रहे हैं.

ट्रंप की नीतियों ने US को सेल्फ-आइसोलेशन में धकेला

रिक सांचेज ने निष्कर्ष निकाला कि अमेरिका के लिए सुधार का समय शायद निकल चुका है. उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को नसीहत देते हुए कहा, 'अमेरिका के सहयोगी देशों के चीन के साथ जो रिश्ते अब बन चुके हैं, वे इतने गहरे हो चुके हैं कि अब पीछे हटना मुश्किल है. ट्रंप की अस्थिर नीतियों ने एक मल्टीपोलर वर्ल्ड (बहुध्रुवीय दुनिया) में अमेरिका के लिए सेल्फ-आइसोलेशन (स्व-एकांतवास) की स्थिति पैदा कर दी है.'

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