अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने दक्षिण अफ्रीका में नस्ल-आधारित भेदभाव, हिंसा भड़काने और बिना मुआवजे के जमीन कब्जा करने जैसी गतिविधियों में शामिल विदेशी नागरिकों (खासकर दक्षिण अफ्रीकी अधिकारियों) पर नई वीजा प्रतिबंधों की घोषणा की है.
इस नीति का मुख्य उद्देश्य अफ्रीकानर्स और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ नस्लीय अपराधों को रोकना है. रूबियो ने कहा कि दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने इन मुद्दों पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं, इसलिए अमेरिका ने ये कड़ा कदम उठाया है.
'नस्लीय हिंसा और भेदभाव बर्दाश्त नहीं'
मार्को रुबियो ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका दक्षिण अफ्रीका में अफ़्रिकानर्स और अन्य अल्पसंख्यक आबादी के खिलाफ नस्लीय रूप से प्रेरित अपराधों और सरकार प्रायोजित भेदभाव को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है.
उन्होंने कहा कि इसमें नस्ल आधारित भेदभावपूर्ण कानून, बिना मुआवजे के जमीन जब्त की धमकियां और अमानवीय नारों के जरिए नस्लीय हिंसा को भड़काना शामिल है.
रुबियो ने जोर देकर कहा कि दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने पहले जताई गई चिंताओं का पर्याप्त समाधान नहीं किया है. इसलिए अब नई वीजा प्रतिबंध नीति लागू की जा रही है.
नई वीजा पाबंदी के दायरे में कौन?
रुबियो ने स्पष्ट किया कि ये नई नीति उन विदेशी नागरिकों को टारगेट करती है जो बिना मुआवजे के जमीन जब्ती, नस्लीय भेदभाव या अल्पसंख्यक जातीय समूहों के खिलाफ हिंसा भड़काने वाले कानूनों या नीतियों को लागू करने के लिए जिम्मेदार या उसमें शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसे आचरण को अनियंत्रित नहीं रहने देगा. ये कार्रवाई शांति, आर्थिक स्थिरता और कानून के शासन को कमजोर करती है जो कि अमेरिका की विदेश नीति के सिद्धांतों के खिलाफ है.
शरणार्थी नीति में बड़ा बदलाव
बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती हफ्तों में घोषणा की थी कि अमेरिका में प्रवेश पाने वाले लगभग सभी शरणार्थी श्वेत दक्षिण अफ्रीकी होंगे. इस फैसले ने दशकों पुराने उस शरणार्थी कार्यक्रम को पूरी तरह बदल दिया जो युद्ध और उत्पीड़न से भाग रहे लोगों की मदद करता था.
इस साल जून के अंत तक अमेरिका ने बाकी दुनिया के लिए अपना शरणार्थी कार्यक्रम काफी हद तक बंद करते हुए 7,700 से ज्यादा अफ़्रिकानर्स को शरणार्थी के रूप में प्रवेश दिया है.
राष्ट्रपति रामाफोसा ने खारिज किए उत्पीड़न के आरोप
ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि भूमि सुधार नीतियों के तहत श्वेत किसानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है. जबकि दक्षिण अफ्रीकी सरकार का कहना है कि रंगभेद (अपारथाइड) की विरासत को सुधारने के लिए ये नीतियां जरूरी हैं.
वहीं, पिछले साल ओवल ऑफिस में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के साथ बैठक में ट्रंप ने एक वीडियो दिखाते हुए श्वेत दक्षिण अफ्रीकियों के नरसंहार का दावा किया था. रामाफोसा ने स्पष्ट किया था कि दिखाए गए भाषण सरकारी नीति नहीं हैं और उनका बहुदलीय लोकतंत्र लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी देता है. हमारी सरकार की नीति उस बात के पूरी तरह से खिलाफ है जो वह कह रहे थे.
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