हिज्बुल्लाह ने कहा NO... तो फिर कितने दिन टिक पाएगी अमेरिका, इजरायल और लेबनान के बीच ये डील?

अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की मदद से लेबनान को तत्काल 10 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता अमेरिका देगा. तीन करोड़ डॉलर से अधिक की सहायता लेबनानी सशस्त्र बलों को मजबूत करने और पूरे देश में सरकारी नियंत्रण स्थापित करने के लिए दी जाएगी.

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वॉशिंगटन डीसी में अमेरिका, इजरायल और लेबनान के बीच बड़ी डील (Photo: Reuters) वॉशिंगटन डीसी में अमेरिका, इजरायल और लेबनान के बीच बड़ी डील (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • वॉशिंगटन,
  • 27 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:47 AM IST

आखिरकार अमेरिका, इजरायल और लेबनान कई दिनों तक मंथन के बाद  एक डील के करीब पहुंच ही गए. तीनों मुल्कों के बीच शुक्रवार को त्रिपक्षीय (ट्राइलेट्रल) फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर बात बन गई. 

इसे इजरायल और ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के बीच जारी संघर्ष को खत्ाम करने की दिशा में अहम पड़ाव माना जा रहा है. इस समझौते पर लेबनान की राजदूत नादा मुआवद, इजरायली राजदूत येचिएल लीटर और अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने दस्तखत किए. हालांकि, समझौते की विस्तृत शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया गया है.

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि हमने एक कठिन, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण और आवश्यक यात्रा का पहला कदम उठाया है. इस समझौते को अमल में लाने के लिए अमेरिका लेबनान के लिए मिलिट्री कॉर्डिनेशन ग्रुप का गठन करेगा. उन्होंने साफ किया कि इसे पूरी तरह लागू होने में समय लगेगा.

उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र की मदद से लेबनान को तत्काल 10 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता देगा. इसके अलावा, तीन करोड़ डॉलर से अधिक की सहायता लेबनानी सशस्त्र बलों को मजबूत करने और पूरे देश में सरकारी नियंत्रण स्थापित करने के लिए दी जाएगी.

इस डील के तहत दक्षिणी लेबनान में दो पायलट जोन बनाए जाएंगे. इन क्षेत्रों से इजरायली आर्मी धीरे-धीरे पीछे हटेगी, जिससे लेबनानी सेना वहां तैनात हो सकेगी.

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इधर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सेना की वापसी इस बात पर निर्भर करेगी कि हिज्बुल्लाह अपने हथियार छोड़ता है या नहीं. लेबनानी सेना इन क्षेत्रों का नियंत्रण संभालने की तैयारी शुरू करेगी. आगे की वापसी तभी होगी, जब हिज्बुल्लाह का सैन्य ढांचा पूरी तरह समाप्त कर दिया.

इजरायली राजदूत येचिएल लीटर ने कहा कि यह समझौता प्रदर्शन आधारित है. यदि लेबनानी आर्मी सफलतापूर्वक हिज्बुल्लाह को निशस्त्र करती है, तभी आगे के इलाकों से इजरायली सेना हटेगी. ईरान बाहर है, हिज्बुल्लाह बाहर है और अब इजरायल तथा लेबनान के बीच शांति का रास्ता खुल गया है.

इधर, लेबनान की राजदूत नादा मुआवद ने भी इसे लंबी शांति प्रक्रिया की शुरुआत बताया. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य लेबनान की संप्रभुता बहाल करना, संघर्ष समाप्त करना और विस्थापित लोगों को उनके घर लौटने का मौका देना है.

वहीं, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने कहा कि यह समझौता भविष्य में नागरिकों को पूरी तरह मुक्त कराए गए क्षेत्रों में वापस लौटने में मदद करेगा. उन्होंने साफ किया कि लेबनान की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा.

हिज्बुल्लाह ने समझौते को किया खारिज
विद्रोही संगठन हिज्बुल्लाह ने इसका विरोध करते हुए कहा कि लेबनानी सरकार इसे तब तक लागू नहीं कर सकती, जब तक वह अमेरिकी समर्थन से गृहयुद्ध छेड़ने के लिए तैयार न हो. हिज्बुल्लाह नेता फदलल्लाह ने कहा कि संगठन को निशस्त्र करने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध किया जाएगा. वे अपने हथियार किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे. धमकी देते हुए उन्होंने कहा कि वे सरकार को इसे जमीन पर लागू नहीं करने देंगे.

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यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव बरकरार है. दोनों पक्षों की ओर से संघर्ष रोकने पर सहमति बनने के बावजूद इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपने सैनिक तैनात रखे हैं, जिसे वह सुरक्षा बफर जोन बताता है. लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, इजराइल की जवाबी सैन्य कार्रवाई में चार हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. दस लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं.

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