भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों और फ्रांस समेत दुनिया के कई हिस्सों में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) के रुख पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं, भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र के मंच पर अपनी बात रखी है. दरअसल, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों और पुलिस की सख्त कार्रवाई को लेकर चिंता जाहिर की थी.
भारत के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर जहां UN ने चिंता जताई थी तो वहीं फ्रांस के प्रोटेस्ट पर उसने कहा कि आगे बढ़ने का सबसे अच्छा और एकमात्र रास्ता समावेशी और सुरक्षित बातचीत है.
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की तीसरी समिति में विदेश मंत्रालय की प्रतिनिधि बरखा ताम्रकार ने कानून के शासन, संवैधानिक सुरक्षा उपायों और जवाबदेही के महत्व पर जोर दिया है. उन्होंने चेतावनी दी कि बिना पुष्टि किए गए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर लगाए गए आरोपों को किसी फैसले की तरह नहीं माना जाना चाहिए.
संयुक्त राष्ट्र जेनेवा ने पोस्ट में बताया कि 20 से ज्यादा स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारतीय अधिकारियों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करें, उसकी रक्षा करें और इसे सुनिश्चित करें. विशेषज्ञों ने भारत में हुए प्रदर्शनों और इससे पहले के प्रदर्शनों के दौरान मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों पर भी चिंता जताई थी.
वहीं, यूरोप के कई देशों में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर यूएन ह्यूमन राइट्स ने पोस्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा कि अल्बानिया, बेल्जियम, फ्रांस, इटली और पुर्तगाल में हो रहे बड़े पैमाने के प्रदर्शनों को लेकर मानवाधिकार संबंधी चिंताएं हैं. उन्होंने हिंसा की घटनाओं की निंदा करते हुए संबंधित पक्षों से बचाव कम करने की अपील की. उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने का सबसे अच्छा और एकमात्र रास्ता समावेशी और सुरक्षित बातचीत है.
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इन पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाए कि भारत में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर UN की भाषा सख्त है, जबकि यूरोपीय देशों में प्रदर्शनों के मामले में उसका रुख अलग है.
बीते दिनों कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) विरोध-प्रदर्शनों को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञ की रिपोर्ट पर भारत ने कड़ा जवाब दिया था. भारत ने इसे खारिज करते हुए सवाल उठाया कि अगर भारत में युवाओं को अपनी बात रखने और सरकार से सवाल पूछने की आजादी नहीं है तो फिर वे राजधानी तक मार्च कैसे कर रहे हैं और देश के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत कैसे कर रहे हैं?
भारतीय राजनयिक ने इस रिपोर्ट पर कड़ा रुख अख्तियार किया. भारतीय राजनयिक ने कहा, 'किस दमनकारी देश में युवाओं का कोई व्यंग्यात्मक समूह सरकार से सवाल पूछ सकता है, राजधानी तक मार्च कर सकता है और देश के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकर बातचीत कर सकता है?'
प्रणय उपाध्याय