अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डीजल के निर्यात पर रोक लगाने की बात कही है. दरअसल, अमेरिका में ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इससे घरेलू स्तर पर लोगों की परेशानी बढ़ी है. ट्रंप प्रशासन अब कीमतों को कम करने के रास्ते तलाश रहा है.
इसी बीच डीजल निर्यात पर रोक का प्रस्ताव सामने आया है. अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भी कहा है कि प्रशासन निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है. दरअसल, अमेरिका दुनिया में डीजल के सबसे बड़े निर्यातकों में शामिल है. वह वैश्विक डीजल सप्लाई का करीब 20 फीसदी हिस्सा उपलब्ध कराता है. ऐसे में अमेरिका से डीजल का निर्यात कम होने पर दुनिया के दूसरे देशों में इसकी कीमत बढ़ सकती है.
इस समय वैश्विक ईंधन बाजार पहले से दबाव में है. मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली तेल सप्लाई भी प्रभावित हुई है. वहीं, रूस के डीजल निर्यात पर रोक और यूक्रेन के रूसी तेल ठिकानों पर हमलों ने भी स्थिति को मुश्किल बनाया है.
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ऑस्ट्रेलिया पर क्यों पड़ेगा ज्यादा असर?
ऑस्ट्रेलिया विकसित देशों में प्रति व्यक्ति डीजल की सबसे ज्यादा खपत करने वाले देशों में है. हालांकि, ऑस्ट्रेलिया आम तौर पर अमेरिका से डीजल आयात नहीं करता. मार्च में एक इमरजेंसी खेप जरूर अमेरिका से वहां पहुंची थी.
इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया पर असर पड़ सकता है. इसकी वजह वैश्विक बाजार है. अगर अमेरिका डीजल का निर्यात रोकता है तो दुनिया भर में इसकी कीमत तेजी से बढ़ सकती है. इससे ऑस्ट्रेलिया में भी ईंधन महंगा होगा. हालात ज्यादा बिगड़े तो वहां ईंधन की राशनिंग तक की नौबत आ सकती है.
अमेरिका में भी बढ़ सकती है परेशानी
डीजल निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाने से अमेरिका को भी नुकसान हो सकता है. देश में डीजल की सप्लाई जरूरत से ज्यादा हो सकती है. इससे घरेलू कीमतें घट सकती हैं. लेकिन ज्यादा सप्लाई होने पर अमेरिकी रिफाइनरियों को उत्पादन कम करना पड़ सकता है. इसी वजह से व्हाइट हाउस ने फिलहाल पूरी तरह निर्यात रोकने के बजाय दूसरे विकल्पों पर विचार किया है.
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ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि अमेरिकी कंपनियों को घरेलू बाजार की ओर ज्यादा ईंधन भेजने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है. इसके लिए टैक्स में छूट जैसे वित्तीय उपाय किए जा सकते हैं. इसके अलावा अमेरिका डीजल निर्यात के लिए कोटा भी तय कर सकता है. यानी देश से बाहर जाने वाले डीजल की मात्रा सीमित की जा सकती है. इस फैसले का इस्तेमाल व्यापार वार्ता में भी किया जा सकता है.
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