10% से शुरू हुआ, अब 100% तक पहुंचा ट्रंप का टैरिफ... भारत जैसे मुल्कों को किया परेशान

ट्रंप के टैरिफ की कहानी इन डेढ़ सालों में कई बार बदली है.भारत पर 10% से शुरू हुआ दबाव 50% तक पहुंचा और अब रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ की तलवार लटक रही है. आखिर ऐसा क्या हुआ कि भारत-अमेरिका व्यापार रिश्तों में खटास आ गई?

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यूएस कांग्रेस ने हाल ही में ट्रंप को टैरिफ लगाने का अधिकार देने वाले बिल को पास किया है. (Photo-Reuters) यूएस कांग्रेस ने हाल ही में ट्रंप को टैरिफ लगाने का अधिकार देने वाले बिल को पास किया है. (Photo-Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:42 AM IST

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर पिछले डेढ़ साल में हालात तेजी से बदले हैं. फरवरी 2025 में अमेरिकी टैरिफ 10% से शुरू हुआ था. अब अमेरिकी संसद ने ऐसे बिल को मंजूरी दी है, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगा सकते हैं. भारत भी इस दायरे में आ सकता है. आइए समझते हैं कि डेढ़ साल में टैरिफ का यह मामला यहां तक कैसे पहुंचा.

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फरवरी 2025 में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका दूसरे देशों के अमेरिकी सामान पर लगाए गए टैरिफ के हिसाब से अपना टैरिफ तय करेगा. इसी दौरान भारत और अमेरिका ने सीमित व्यापार समझौते पर काम शुरू किया. दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा.

यह भी पढ़ें: गैर दोस्ताना, एकतरफा और... अमेरिका के 100% टैरिफ के जवाब में रूस, चीन और भारत ने क्या कहा?

अप्रैल 2025: टैरिफ बढ़कर 26%

अप्रैल में अमेरिका ने भारतीय सामान पर 26% टैरिफ लगाने का ऐलान किया. हालांकि, बाद में इसके लागू होने पर 90 दिनों की रोक लगा दी गई. इस दौरान भारतीय सामान पर 10% टैरिफ ही लागू रहा.

जुलाई-अगस्त: 25% से 50% हुआ टैरिफ

जुलाई 2025 में अमेरिका ने भारतीय सामान पर 25% टैरिफ लगा दिया. इसके बाद अगस्त में इसमें 25% की और बढ़ोतरी की गई. इस तरह कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया. भारत के रूस से तेल खरीदने को अमेरिका की नाराजगी की बड़ी वजह बताया गया. भारत ने इसका विरोध किया. भारत का कहना था कि उसे अपने राष्ट्रीय हित और 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए फैसले लेने का अधिकार है.

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फरवरी 2026: कुछ राहत मिली

फरवरी 2026 में दोनों देशों के बीच तनाव कुछ कम हुआ. अमेरिका ने भारतीय सामान पर टैरिफ घटाकर 18% करने का फैसला किया. इसके पीछे रूस से तेल खरीद कम करने और व्यापार से जुड़ी कुछ बाधाएं हटाने की सहमति बताई गई. दोनों देशों ने व्यापार समझौते का एक ढांचा भी जारी किया.

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लेकिन यह राहत ज्यादा लंबी नहीं चली. 150 दिन की अवधि खत्म होने के बाद जुलाई में अमेरिका ने भारत पर फिर 10% टैरिफ लगाया. इस बार अमेरिका ने भारत से आने वाले कथित जबरन मजदूरी से बने सामान को वजह बताया.

सितंबर 2026: अब 100% टैरिफ का खतरा

अब सितंबर में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान पर दबाव बढ़ाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है. इस बिल में ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है. इसका मकसद रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना है.

भारत के लिए यह बड़ा मुद्दा है, क्योंकि वह रूस से तेल खरीदता है. भारत ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ऐसे कदम दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाल सकते हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस प्रावधान को किस तरह लागू किया जाता है और इसका भारत-अमेरिका व्यापार पर कितना असर पड़ता है.

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