हूतियों से घिरा सऊदी, मदद मांगने मिस्र पहुंचे थे मोहम्मद बिन सलमान... क्या मिला साथ?

यमन के हूतियों के लगातार हमलों के बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान मिस्र पहुंचे. काहिरा में उन्होंने राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी से मुलाकात की. दोनों नेताओं ने लाल सागर और बाब अल-मंदेब में समुद्री आवाजाही की सुरक्षा को लेकर साथ खड़े रहने की बात कही.

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हूती हमलों के बीच MBS मिस्र दौरे पर थे. (Photo- AFP) हूती हमलों के बीच MBS मिस्र दौरे पर थे. (Photo- AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:10 PM IST

यमन के हूतियों के बढ़ते हमलों के बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान यानी एमबीएस मिस्र पहुंचे. काहिरा में उन्होंने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी से मुलाकात की. सऊदी अरब इन दिनों हूतियों के हमलों से जूझ रहा है. उसके जहाजों और तेल से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है. ऐसे में एमबीएस का मिस्र पहुंचना काफी अहम माना जा रहा है.

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मुलाकात के बाद सऊदी क्राउन प्रिंस ने कहा कि दोनों देशों ने लाल सागर और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही की आजादी और सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की है. वहीं, मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय ने सऊदी अरब के समर्थन में मिस्र के अटूट रुख की बात कही.

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हालांकि, दोनों देशों ने फिलहाल यह साफ नहीं किया है कि हूतियों के खिलाफ आगे कौन से कदम उठाए जाएंगे. मिस्र की तरफ से सऊदी अरब को सीधे सैन्य मदद दिए जाने की संभावना कम बताई जा रही है. लेकिन अरब दुनिया में मिस्र का काफी प्रभाव है और वह सऊदी अरब के लिए दूसरे अरब देशों का राजनीतिक समर्थन जुटाने में अहम भूमिका निभा सकता है.

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यमन में और मजबूत हुए हूती विद्रोही

सऊदी अरब के सामने इस समय बड़ा संकट है. हूतियों ने हाल के दिनों में यमन में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत की है. उन्होंने लाल सागर के तट पर मौजूद मोखा बंदरगाह और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा करने का दावा किया है. इससे सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए लाल सागर का रास्ता और ज्यादा जोखिम भरा हो गया है.

सऊदी अरब की तेल सप्लाई पर एक और बड़ा झटका उसकी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले से लगा है. हमले में पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा है और इसे ठीक होने में कई हफ्ते लग सकते हैं. इससे हर दिन कई मिलियन बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है.

सऊदी अरब अब इस दुविधा में है कि हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई बढ़ाई जाए या कूटनीतिक रास्ता अपनाया जाए. बड़े सैन्य अभियान से हूतियों की तरफ से सऊदी के तेल ठिकानों पर और हमले बढ़ने का डर है. साथ ही सऊदी अरब दोबारा यमन की लंबी जंग में फंसना नहीं चाहता.

मक्का पर ड्रोन हमले का सऊदी ने किया दावा

इसी बीच मक्का की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन गई है. सऊदी सेना ने मंगलवार को दावा किया कि मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले हूतियों का एक ड्रोन मार गिराया गया. सऊदी सैन्य प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि पवित्र शहर और दोनों पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा 'रेडलाइन' है. हूतियों ने मक्का की तरफ ड्रोन भेजने से इनकार किया है.

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वहीं, मिस्र खुद भी हूतियों के हमलों से प्रभावित हुआ है. लाल सागर में जहाजों पर हमलों के कारण स्वेज नहर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में कमी आई है, जिससे मिस्र की कमाई को नुकसान हुआ है. ऐसे में सऊदी के साथ खड़ा होना काहिरा के अपने आर्थिक और क्षेत्रीय हितों से भी जुड़ा है.

इस तरह हूतियों के बढ़ते हमलों ने सऊदी अरब को अकेले सैन्य मोर्चे से आगे बढ़कर क्षेत्रीय समर्थन जुटाने पर मजबूर कर दिया है और मिस्र अब इस रणनीति में अहम साथी बनकर सामने आया है.

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