सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मंगलवार को काहिरा में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देह फतह अल सीसी से मुलाकात की. सऊदी अरब यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ समर्थन जुटा है. हूती हमलों की वजह से अहम समुद्री व्यापार रूट बाधित हुआ है और दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ी हैं.
मिस्र से सऊदी को सीधे सैन्य मदद मिलने की उम्मीद नहीं है. लेकिन अरब देशों में मिस्र का काभी प्रभाव है. मिस्र के राष्ट्रपति अब्देह फतह अल सीसी के कार्यालय ने सऊदी अरब के लिए अपना अटूट समर्थन दताया है.
इलाके में बढ़ा तनाव
पूरे इलाके में तनाव बना हुआ है. यमन में सऊदी अरब के हवाई हमले जारी हैं. लोगों के विस्थापन को लेकर चिंताए हैं, अमेरिका द्वारा दो ईरानी नावों के खिलाफ कार्रवाई, ईरान में नई अपील की भर्ती और गाजा में इजरायली हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों की मांगें जैसी खबरें आती रही हैं.
काहिरा में बैठक के बाद सऊदी अरब या मिस्र में से किसी ने भी अब तक भविष्य के कदमों को लेकर कोई पक्की जानकारी नहीं दी है. अधिकारियों ने बताया कि यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के हमलों के बाद मरम्मत के लिए सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के हफ्तों तक बंद रहने की आशंका है.
इस रुकावट के चलते हर दिन बाजार में कई मिलियन बैरल तेल की कमी हो सकती है. वहीं, दूसरी ओर, हूती लड़ाकों ने तेजी से बढ़त हासिल की है. हूतियों ने लाल सागर के मोखा बंदरगार और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास तीन रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा किया है.
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यूके के प्रधानमंत्री के प्रवक्ता टॉम वेल्स ने लंदन में कहा कि हूतियों को तुरंत अपने हमले बंद करने चाहिए. साथ ही, उन्होंने ये भी कहा कि सऊदी अरब और यमन को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है. यमन में, हूती-नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अनीस अल-असबाही ने X पर दावा किया है कि ताइज़ प्रांत में सऊदी हवाई हमलों में तीन लोगों की मौत हुई. इनमें दो बच्चे भी शामिल हैं. अल-असबाही ने यह नहीं बताया कि सऊदी लड़ाकू विमानों ने किसे निशाना बनाया था.
यमन में फिर से शुरू हुई लड़ाई से आम लोगों और लाल सागर से होने वाले शिपिंग को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. यह रास्ता अब और महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावटें आईं थी. अधिकारियों का कहना है कि यमन में ईंधन की कमी के कारण लोगों के लिए भागना और लाल सागर पार करके जिबूती जाना मुश्किल हो रहा है.
2,000 से ज्यादा यमन नागरिक जिबूती पहुंचे
संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक, 2,000 से ज्यादा यमन नागरिक जिबूती पहुंच चुके हैं. जबकि 1 लाख से ज्यादा लोग यमन के भीतर ही विस्थापित हो गए हैं. जिबूती के वित्त मंत्री इलियास एम. दवालेह ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि वे उन लोगों को परेशानी में नहीं छोड़ सकते जिन्होंने उनके देश में शरण ली है. वहीं, संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के प्रमुख टॉम फ्लेचर ने कहा कि उन्होंने यमन में विस्थापित लोगों और उन्हें आश्रय देने वाले समुदायों की मदद के लिए आपातकालीन कोष से 9 मिलियन अमेरिकी डॉलर आवंटित किए हैं.
अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान के पास समुद्री इलाके में एक ड्रोन जहाज को कब्जे में लेने की कोशिश कर रही दो ईरानी नावों को कड़ाई से जवाब दिया है. अमेरिकी स्ट्रेल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने बताया कि ड्रोन एक 'सेलड्रोन' था. यह छोटा जहाज है जो अपने आप चल सकता है. CENTCOM समुद्री यातायात की निगरानी के लिए ऐसे जहाजों का इस्तेमाल कर रहा है. ईरानी सरकार ने सोमवार को मीडिया को बताया कि होर्मुजगन प्रांत में मछली पकड़ने वाली दो नावों पर हमला हुआ है और कुछ मछुआरे लापता हैं.
ईरान में भर्ती मुहीम शुरू
ईरान के सरकारी TV ने बताया, आम लोगों को असॉल्ट राइफल चलाने की ट्रेनिंग देने के लिए भर्ती किया जा रहा है. अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर हवाई हमले शुरू करने के बाद यह दूसरी ऐसी भर्ती मुहीम है. इन वॉलंटियर्स को जानफदा कहा जा रहा है. इसका मतलब है, "अपनी जान कुर्बान करने वाले."
यह अपील ऐसे समय में की गई है जब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ रही और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दोबारा जंग शुरू करने की चेतावनी भी दी है.
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स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि गाज़ा में मंगलवार रात तक हुए इज़राइली हमलों में सात लोगों की मौत हो गई. इसमें दो बच्चे भी शामिल हैं. ये हमले गाज़ा सिटी, उत्तरी गाज़ा और खान यूनिस में हुए. अस्पताल के अधिकारियों और स्वास्थ्य मंत्रालय ने हताहतों की जानकारी दी. इज़राइली सेना ने कहा कि पहले हमले में हमास का एक कमांडर मारा गया, लेकिन अन्य हमलों पर कोई जवाब नहीं दिया गया.
पिछले साल अक्टूबर में हुए सीज़फ़ायर के बाद से इज़राइल और हमास के बीच लड़ाई कम हुई है, लेकिन गाज़ा में स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि तब से इज़राइली हमलों में कम से कम 1,375 फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं.
वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ओमान के विदेश मंत्री से मस्कट की उन कोशिशों के बारे में बात की है जिनसे अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर (युद्धविराम) को बचाया जा सके और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सके.
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