'एक आतंकी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है...', विदेश मंत्री एस जयशंकर का जवाब PAK पत्रकार याद रखेगा!

विदेश मंत्री एस जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सेशन के दौरान एक कार्यक्रम में थे. तभी एक पाकिस्तानी पत्रकार ने उन्हें अमर्यादित तरीके से टोकने की कोशिश की.

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विदेश मंत्री जयशंकर UNGA की मीटिंग में शिरकत करने न्यूयॉर्क में हैं. (Photo: Social media) विदेश मंत्री जयशंकर UNGA की मीटिंग में शिरकत करने न्यूयॉर्क में हैं. (Photo: Social media)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:52 PM IST

संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक पाकिस्तानी पत्रकार के बड़बोलेपन का जवाब कुछ इस अंदाज में दिया कि वहां का माहौल बदल गया. यह घटना 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में हुई. 

जयशंकर न्यूयॉर्क में एक प्रेस इंटरैक्शन में बोल रहे थे. तभी एक पाकिस्तानी पत्रकार ने आतंकवाद से जुड़ा फर्जी सवाल पूछकर उन्हें बीच में टोकने और हेकल करने की कोशिश की. 

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कार्यक्रम के बीच ये पाकिस्तानी पत्रकार विदेश मंत्री ये अचानक अमर्यादित लहजे में पूछने लगा कि कब आपकी सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करना बंद करेगी? क्या आप बता सकते हैं कि आपकी सरकार पाकिस्तान में प्रॉक्सी टेररिज्म स्पॉन्सर करना कब बंद करेगी?

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पूरी गंभीरता से इस सवाल को पूछा फिर उन्होंने पूरे कनविक्शन के साथ खरा-खरा जवाब दिया, "एक आतंकी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है."

विदेश मंत्री ने ये जवाब दिया, मुस्कुराए और उठकर चले गए.

एस जयशंकर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. 

इससे पहले विदेश मंत्री नाविकों की सुरक्षा पर एक सम्मेलन में शामिल हुए. भारत ने कहा है कि नाविकों पर समुद्र में हो रहे हमले हर हाल में रुकने चाहिए. 

समुद्री नाविकों पर हमले रुकने ही चाहिए

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विदेश मंत्री ने कहा, "हमारा मानना ​​है कि इस तरह की हिंसा और जान-माल के नुकसान का कोई औचित्य नहीं हो सकता. सीधे शब्दों में कहें तो, इन हमलों को रुकना ही चाहिए. समुद्री कर्मचारियों (सीफेयरर्स) के लिए एक प्रमुख सोर्स देश होने के नाते भारत ने इस मामले पर लाइबेरिया के साथ हाथ मिलाया है, जिसके पास टनेज के हिसाब से सबसे बड़ी शिपिंग रजिस्ट्री है."

एस जयशंकर ने कहा कि हमने समान हितों वाले अन्य देशों के साथ-साथ प्रमुख जहाज मालिकों को भी एक साथ किया है. मेरा मानना ​​है कि आज सुबह 'ग्रुप ऑफ़ फ्रेंड्स' की हमारी पहली बैठक में 25 देश शामिल हुए. यह पहल समुद्री कर्मचारियों और कमर्शियल शिपिंग इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दों पर दुनिया का ज़्यादा ध्यान खींचने की एक कोशिश है. दुनिया के मर्चेंट फ्लीट को लगभग 20 लाख समुद्री कर्मचारी चलाते हैं, जो मुश्किल हालात का सामना करते हैं."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स बैठक के दौरान नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है. 

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