कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप लियो को फेफड़ों का कैंसर (Lung Adenocarcinoma) होने की जानकारी सामने आई है. साझा की गई रिपोर्ट के मुताबिक, रोम के जेमेली अस्पताल में मंगलवार को करीब 90 मिनट तक चली सर्जरी के दौरान उनके दाहिने फेफड़े का निचला हिस्सा निकाल दिया गया.
वेटिकन की ओर से जारी चिकित्सा बुलेटिन में बताया गया कि जांच में उन्हें लंग एडेनोकार्सिनोमा होने की पुष्टि हुई है. यह फेफड़ों के कैंसर का एक सामान्य प्रकार है. रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों को ऑपरेशन से पहले की जांच में ही इस बीमारी का संदेह था. सर्जरी के दौरान टिशू सैंपल्स की जांच में इसकी पुष्टि हुई.
ऑपरेशन के बाद वेटिकन ने बताया कि प्रक्रिया सफल रही और इसमें कोई जटिलता नहीं आई. पोप होश में आ गए और अस्पताल में आराम कर रहे हैं. हालांकि, उनकी सेहत को लेकर इससे आगे की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई.
20 अक्टूबर तक सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द
पोप लियो मंगलवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब एक बजे वेटिकन से जेमेली अस्पताल पहुंचे थे. अस्पताल वेटिकन से लगभग नौ किलोमीटर दूर है. अस्पताल पहुंचने से पहले उन्हें काले रंग की एसयूवी में बैठकर लोगों का अभिवादन करते देखा गया. वहां मौजूद कुछ लोगों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की.
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वेटिकन के मुताबिक, पोप को करीब एक सप्ताह तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है. उनकी तबीयत को ध्यान में रखते हुए 20 अक्टूबर तक के सभी सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं.
2025 में चुने गए थे पोप लियो
पोप लियो मई 2025 में दुनिया भर के कार्डिनलों द्वारा कैथोलिक चर्च का प्रमुख चुने गए थे. उनका जन्म 1955 में अमेरिका के शिकागो में रॉबर्ट प्रीवोस्ट के रूप में हुआ था. पोप बनने से पहले उन्होंने कई दशकों तक मिशनरी और बिशप के तौर पर पेरू में काम किया.
71 वर्षीय पोप को खेलों में भी रुचि है, खासकर टेनिस में. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं जाना जाता और हाल के दिनों में उनकी सेहत को लेकर कोई बड़ी सार्वजनिक चिंता सामने नहीं आई थी. उनके पूर्ववर्ती पोप फ्रांसिस को जीवन के अंतिम वर्षों में कई बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. अप्रैल 2025 में 88 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था.
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पहले भी गंभीर बीमारी से जूझ चुके हैं पोप
पोप लियो ने इससे पहले 1985 में पेरू के चुलुकानास में युवा पादरी के रूप में सेवा के दौरान टाइफाइड बुखार से गंभीर रूप से बीमार पड़ने का अनुभव साझा किया था. उस समय उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. एक पुस्तक में प्रकाशित साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि बीमारी के दौरान उन्हें इतना तेज दर्द हुआ कि उन्होंने ईश्वर से अपना कष्ट समाप्त करने की प्रार्थना की थी.
पोप लियो 6 से 17 नवंबर तक उरुग्वे, अर्जेंटीना और पेरू की 11 दिवसीय यात्रा पर जाने वाले हैं. हालांकि, मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति के मद्देनजर उनके आगामी कार्यक्रमों और यात्रा को लेकर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी. कैथोलिक चर्च के दुनिया भर में लगभग 1.4 अरब अनुयायी हैं. पोप के बीमार होने की स्थिति में उनकी जिम्मेदारियां अपने आप संभालने वाला कोई उप-प्रमुख नहीं होता, हालांकि वेटिकन का प्रशासनिक कामकाज जारी रहता है.
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