पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की रिपोर्टिंग के बाद पाकिस्तान में अल जजीरा इंग्लिश समेत कई डिजिटल न्यूज वेबसाइट्स पर कथित रूप से रोक लगा दी है. शहबाज शरीफ सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब आसिम मुनीर की सेना पीओके में कत्लेआम मचा रही है. पाकिस्तान सरकार ने अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, PoK में प्रदर्शन, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और बिगड़ते हालात की कवरेज के बाद कई अंतरराष्ट्रीय और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पाकिस्तान में एक्सेस नहीं हो पा रहा है. यूजर इन वेबसाइट्स को नहीं खोल पा रहे हैं. इसे सरकार द्वारा नैरेटिव पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
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अलजजीरा ने ऐसी क्या रिपोर्टिंग कर दी?
इससे पहले अल जजीरा ने भी रिपोर्ट किया था कि इस्लामाबाद की एक अदालत में पाकिस्तान की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) ने कई यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक करने की मांग की थी. इनमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, विपक्षी नेताओं और सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों से जुड़े चैनल भी शामिल बताए गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब ने 27 कंटेंट क्रिएटर्स को अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी.
PoK में JAAC का जोरदार प्रदर्शन, सेना चला रही गोली
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने कुछ वीडियो जारी कर दावा किया है कि मुजफ्फराबाद में सुरक्षा बलों ने एक निहत्थे व्यक्ति के साथ मारपीट की और एक सादे कपड़ों में मौजूद व्यक्ति ने प्रदर्शनकारियों की ओर गोली चलाई. समिति ने इन आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए संयुक्त राष्ट्र, ओएचसीएचआर, एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच, आईसीआरसी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से हस्तक्षेप की अपील की है.
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PoK प्रदर्शनों में कमोबेश 80 लोग मारे गए
उधर, ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ पाकिस्तान-ऑक्यूपाइड जम्मू एंड कश्मीर (HRC-PoJK) के हवाले से दावा किया गया है कि मौजूदा अशांति के दौरान अब तक 80 लोगों की मौत हुई है. इनमें 76 नागरिक और चार पुलिसकर्मी शामिल बताए गए हैं. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
PoJK में दूसरे चरण के चुनाव के दौरान भी विरोध प्रदर्शन, सड़क जाम और प्रशासनिक अव्यवस्था की खबरें सामने आई थीं. इन घटनाओं के बाद चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं.
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