पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हुए खूनी टकराव के बीच चुनाव के नतीजे आ रहे हैं. यहां शहबाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज ने जीत हासिल की है और सरकार बनाने की स्थिति में है. लेकिन यहां ट्विस्ट है. लंदन से लौटे और कई महीनों से बैकडोर से सरकार चला रहे नवाज शरीफ ने पहले इच्छा जताई थी कि वे पीओके के प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं. अब चुनाव नतीजों के बाद शहबाज शरीफ के सामने बड़ा सवाल है क्या वे भाई की इच्छा पूरी करेंगे?
जुलाई 2026 के अंत में शुरू हुए पीओके विधानसभा चुनाव तीन चरणों में हो रहे हैं. 27 जुलाई को पहले चरण में मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों में से पीएमएल-एन ने नौ सीटें जीतीं, जबकि पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) को चार मिलीं.
2 अगस्त को दूसरे चरण में हुए चुनाव में मुजफ्फराबाद डिवीजन और शरणार्थी सीटों पर भी पीएमएल-एन का दबदबा रहा. आधिकारिक और अनौपचारिक नतीजों के अनुसार पार्टी ने घोषित सीटों में से अधिकांश पर कब्जा जमा लिया.
कुल मिलाकर पहले दो चरणों में पीएमएल-एन के खाते में करीब 23 सीटें आ चुकी हैं, ये बहुमत का भी आंकड़ा है.
तीसरा चरण 10 अगस्त को पूनच डिवीजन में होना है, लेकिन मौजूदा नतीजे साफ संकेत देते हैं कि पार्टी अकेले या आसानी से सरकार बना सकती है.
बता दें कि PoK की तथाकथित विधानसभा की 45 सीटों के लिए चुनाव 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच तीन चरणों में हो रहे हैं. तथाकथित PoK विधानसभा में 53 सीटें हैं, 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि आठ सीटें महिलाओं, टेक्नोक्रेट्स और धर्मगुरुओं के लिए आरक्षित हैं.
PoK चुनाव को मान्यता नहीं देता है भारत
भारत न तो पीओके पर पाक के कब्जे को मान्यता देता है और न ही इन चुनावों को. भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश उसके अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं. नई दिल्ली का यह भी कहना है कि पाकिस्तान ने इन केंद्र शासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर "गैर-कानूनी और जबरन कब्ज़ा" कर रखा है.
नवाज का 'PM' दांव
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने मुजफ्फारबाद में अपनी बेटी और पंजाब की सीएम मरियम नवाज के साथ एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि, 'अगर पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज चुनाव जीतती है, तो वह पीएम शहबाज शरीफ से कहेंगे कि वो मुझे पीओके का पीएम बनाएं.'
बता दें कि अक्टूबर 2023 में लंदन से पाकिस्तान लौटने के बाद नवाज शरीफ ने सक्रिय राजनीति में वापसी तो की, लेकिन उन्होंने खुद सरकार की कमान संभालने के बजाय पार्टी के संरक्षक की भूमिका अपनाई. 2024 के आम चुनाव में उन्होंने व्यापक चुनाव प्रचार नहीं किया और प्रधानमंत्री पद शहबाज शरीफ को सौंप दिया. तब से उनकी भूमिका मुख्य रूप से पीएमएल-एन की नीतियां तय करने, वरिष्ठ नेताओं के साथ रणनीतिक बैठकें करने तक है.
लेकिन पीओके का PM बनने की सार्वजनिक इच्छा जाहिर कर नवाज ने नई चाल चली है.
बता दें कि पाकिस्तान 1947 से अपने कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में एक अलग सरकार और प्रधानमंत्री का पद बना रखा है. ताकि वहां वह सेल्फ गवर्नेंस का कथित ढांचा दुनिया को दिखा सके. हालांकि रक्षा, विदेश नीति, वित्त और कई अहम फैसलों पर वास्तविक नियंत्रण इस्लामाबाद का ही रहता है.
सिम्पैथी फैक्टर भुनाना चाहते हैं नवाज
पीओके के संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री बनने के लिए उम्मीदवार का वहां का निवासी और मतदाता होना जरूरी है. नवाज शरीफ पंजाब प्रांत से हैं और वर्तमान में पीओके विधानसभा के सदस्य नहीं हैं. उन्होंने चुनाव भी नहीं लड़ा है.
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक बिना विधानसभा सदस्य बने वे सीधे प्रधानमंत्री नहीं बन सकते. अगर वे भविष्य में किसी सीट से चुनाव लड़कर जीत जाते हैं और बहुमत हासिल करते हैं, तभी रास्ता खुल सकता है. लेकिन PML-N की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है.
तो क्या उन्होंने हिंसा भरे माहौल में PoK के लोगों की सहानुभूति लेने के लिए पीएम बनने का दांव चला है.
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि नवाज शरीफ का यह बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जिससे पीओके में पार्टी का आधार मजबूत हुआ.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने चुनाव में जीत का श्रेय नवाज शरीफ को दिया है. उन्होंने कहा, "इस कामयाबी का सिलसिला PML-N के अध्यक्ष नवाज़ शरीफ़ और पूरी PML-N टीम की कड़ी मेहनत का नतीजा है. नवाज शरीफ और PML-N टीम ने AJK में कामयाब चुनावी अभियान चलाया.
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