नेपाल में भूकंप के झटके, बाढ़ के नए खतरे के बीच कांपी धरती

नेपाल में 3.2 तीव्रता का भूकंप आया है. यह झटके ऐसे समय महसूस हुए, जब भोटेकोशी नदी के पास नई झील बनने से निचले इलाकों में फिर बाढ़ का खतरा बना हुआ है.

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बाढ़ संकट के बीच भूकंप से बढ़ी परेशानी. (File Photo) बाढ़ संकट के बीच भूकंप से बढ़ी परेशानी. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:34 PM IST

नेपाल में सैलाब और तबाही के बीच अब भूकंप के झटकों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. रिक्टर पैमाने पर 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. इस झटके से किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है. हालांकि, यह घटना ऐसे वक्त हुई है जब भोटेकोशी नदी के पास नई झील बनने से निचले इलाकों पर एक और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है.

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भूकंप की तीव्रता कम रही, लेकिन नेपाल में हालात पहले से चुनौतीपूर्ण हैं. भोटेकोशी में आई बाढ़ के बाद राहत-बचाव का काम अभी जारी है. इसी बीच नदी का बहाव रुकने से पानी जमा होने लगा है. इससे बनी नई झील के टूटने की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है.

नेपाल अभी पिछली तबाही से उबर भी नहीं पाया था कि नया खतरा सामने आ गया. तिब्बत सीमा पर भूस्खलन के बाद भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी. इसमें अब तक 392 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि करीब 1,500 लोग लापता हैं. राहत-बचाव का काम अभी चल ही रहा था कि नदी का बहाव रुकने से वहां एक नई झील बन गई.
 

झील में लगातार भर रहा पानी

नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के उद्गम के पास बनी इस झील में लगातार पानी जमा हो रहा है. चीन से मिली जानकारी के मुताबिक, गुरुवार सुबह तक इसमें करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका था. अगले तीन दिनों में करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी और आने का अनुमान है. ऐसे में झील टूटने पर नीचे के इलाकों में अचानक बाढ़ आ सकती है.

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नदी किनारे रहने वालों को सावधानी की सलाह

खतरे को देखते हुए भोटेकोशी नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को नदी किनारे से दूर रहने की सलाह दी गई है. यात्रियों, सुरक्षाकर्मियों और राहत-बचाव में जुटे लोगों को भी सावधानी बरतने को कहा गया है. अधिकारी झील पर लगातार नजर रख रहे हैं, ताकि स्थिति बिगड़ने पर समय रहते कदम उठाया जा सके.

पिछली बाढ़ की वजह ग्लेशियर टूटना

पहले आई बाढ़ की वजह को लेकर कई तरह की आशंकाएं सामने आई थीं. शुरुआत में इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया. बाद में सैटेलाइट तस्वीरों में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के निशान मिले. जांच में सामने आया कि जिस कंपन को भूकंप समझा गया था, वह ग्लेशियर की चट्टानों और बर्फ के टूटने से पैदा हुई थी.

इसके बाद भारी मलबा नीचे आया, जिसने नदी का रास्ता प्रभावित कर दिया. पानी के तेज बहाव ने कुछ ही समय में भोटेकोशी के आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया. अब उसी क्षेत्र में फिर पानी जमा होने से प्रशासन की नजर हालात पर बनी हुई है.

 

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