'बिना वर्दी वाला मुनीर'... कौन हैं मोहसिन नकवी जो शरीफ-जरदारी की जमीन छीनने पर आमदा हैं

सिर्फ 47 साल का ये राजनेता आज के पाकिस्तान में अपनी जाहिर शक्ति से कई गुना ताकत रखता है. उनके पास गृहमंत्री का ओहदा है, क्रिकेट का कंट्रोल है और अपनी ही सरकार के प्रधानमंत्री शरीफ को कठघरे में खड़ा करने की सलाहियत. दरअसल इसके पीछे की ताकत वर्दी है.

Advertisement
मोहसिन नकवी पाकिस्तान में 'बिना वर्दी वाला मुनीर' बनकर उभरे हैं. (Photo: ITG) मोहसिन नकवी पाकिस्तान में 'बिना वर्दी वाला मुनीर' बनकर उभरे हैं. (Photo: ITG)

पन्ना लाल

  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:50 PM IST

चाहे खून का रिश्ता हो या सिर्फ भरोसे का, आसिम मुनीर के आर्मी में आने के बाद पाकिस्तान की राजनीति में सैयद मोहसिन रजा नकवी का उदय बिजली की तरह हुआ. अचानक और प्रभावशाली तरीके से. पाकिस्तान के पॉलिटिकल सर्किल में मोहसिन नकवी उम्र से ज्यादा अनुभवी लगते हैं, लेकिन मात्र 47 वर्ष के नकवी असाधारण ताकत रखते हैं. वे फौज की वर्दी नहीं पहनते हैं, लेकिन आर्मी चीफ आसिम मुनीर के 'आशीर्वाद' से उनका रुतबा रावलपिंडी के दमदार अफसरों जैसा ही है, जो पाकिस्तान की सत्ता में उथल-पुथल मचाते रहते हैं.

Advertisement

वे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा की देखरेख करते हैं, पाक सरकार में उनका ओहदा गृह मंत्री का है. साथ ही वे राजनीति के बराबर ही अहम पाकिस्तान क्रिकेट के चीफ हैं. इसके अलावा वे एशियन क्रिकेट काउंसिल के प्रेसिडेंट भी हैं. 

उनकी सीवी में मध्यस्थता और पीआर का लंबा अनुभव है. वे संपर्क बनाना जानते हैं और उसे भुनाना भी. पश्चिम एशिया संकट के दौरान वे पाकिस्तान के राजनयिक प्रतिनिधि भी रहे. पाकिस्तान से निकलने वाली राजनीतिक गपशप कहती हैं कि ईरान युद्ध के दौरान उन्होंने पाकिस्तान की ओर से ऐसी संवेदनशील बातचीत संभाली जो आम तौर पर विदेश मंत्रालय के अफसरों का काम है. 

नकवी की ताकत नेटवर्किंग में है

नकवी की ताकत नेटवर्किंग में है. मीडिया, राजनीति और डिफेंस कॉरिडोर. तीनों को जोड़ने की कला उन्होंने सीखी है.

मोहसिन नकवी को पाकिस्तान की राजनीति में सैन्य ताकत का सिविलियन चेहरा माना जाता है. उन्होंने  आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगियों में से एक के तौर पर देखा जा रहा है. 

Advertisement

लेकिन ऐसा क्यों है? आखिर ऐसा उन्होंने क्या किया है? इस पर चर्चा करते हैं पहले नकवी का बैकग्राउंड समझ लिए.

मोहसिन नकवी मूल रूप से पत्रकारिता की दुनिया से सियासत में आए. सीएनएन में इंटर्नशिप से करियर शुरू किया.  9/11 के बाद जब पाकिस्तान दुनिया भर की अखबारों में जगह पा रहा था. नकवी ने तेजी से तरक्की किया और वे साउथ एशिया के रीजनल हेड तक पहुंच गए.  

2009 में महज 31 साल की उम्र में उन्होंने सिटी मीडिया ग्रुप की नींव रखी. सिटी 42 से शुरू होकर सिटी 41, रोही टीवी, 24 न्यूज जैसे चैनल खड़े किए. मीडिया साम्राज्य खड़ा करने के साथ-साथ उन्होंने राजनीतिक रिश्ते भी मजबूत किए. 

जनवरी 2023 आया. और उनकी असली राजनीतिक उड़ान तब शुरू हुई. दरअसल वे पंजाब के कार्यवाहक मुख्यमंत्री बन चुके थे. इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक मशीनरी पर मजबूत पकड़ बनाई और सेना के साथ बेहतर तालमेल स्थापित किया. 

आखिर कौन था नकवी के पीछे? कैसे वे लगातार तरक्की करते जा रहे थे? 

दिलचस्प बात यह है कि मोहसिन नकवी किसी बड़े राजनीतिक दल के पारंपरिक नेता नहीं हैं. उनके पास न तो नवाज-शहबाज शरीफ जैसा जनाधार है और न ही बिलावल भुट्टो जैसी राजनीतिक विरासत. इसके बावजूद उनकी पहुंच सत्ता के सबसे ताकतवर केंद्र तक मानी जाती है. यही कारण है कि पाकिस्तान में उन्हें "एस्टैब्लिशमेंट का पसंदीदा चेहरा" कहा जाता है. 

Advertisement

नकवी और मुनीर में क्यों है करीबी?

मोहसिन नकवी और फील्ड मार्शल असीम मुनीर की नजदीकी अचानक नहीं बनी. इसकी शुरुआत जनवरी 2023 में हुई, जब नकवी को पंजाब का कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाया गया. उस समय इमरान खान के आंदोलन, कानून-व्यवस्था और चुनावी तैयारियों के बीच पंजाब सबसे संवेदनशील प्रांत था. 

नकवी ने पुलिस और प्रशासन के जरिए सेना के साथ करीबी तालमेल में काम किया. खासकर 9 मई 2023 की हिंसा के बाद पीटीआई के खिलाफ कार्रवाई के दौरान उन्होंने एस्टैब्लिशमेंट की रणनीति के अनुरूप प्रशासनिक फैसले लिए. इससे सेना प्रमुख असीम मुनीर का उन पर भरोसा मजबूत हुआ.

2024 के आम चुनावों के बाद नकवी को पाकिस्तान का गृह मंत्री बनाया गया.

सोशल मीडिया पर असीम मुनीर और मोहसिन नकवी के बीच रिश्तेदारी के दावे भी किए जाते हैं, लेकिन इसकी कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन इससे एक कनेक्शन दोनों के बीच जरूरी बना है.

इमरान खान ने बताया 'वायसराय'

'द प्रिंट' की एक रिपोर्ट के अनुसार 2024 के एक इंटरव्यू में जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने उन्हें 'वायसराय' कहा. 

जेल से दिए गए एक इंटरव्यू में खान ने दावा किया कि, " बादशाह चुपके से कामकाज संभाल रहा हैं, जबकि (गृह मंत्री) मोहसिन नकवी एक वायसराय की तरह काम कर रहे हैं" और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पास "कोई अधिकार नहीं है."

Advertisement

तब इमरान के इंटरव्यू को किसी ने ज्यादा खुलासा नहीं दिया. लेकिन पिछले 10 दिनों में शहबाज शरीफ कैबिनेट के इस एकमात्र शिया नेता एक के बाद एक दो 'धमाके' किए. उन्होंने सीधा अपनी सरकार को टारगेट किया और पाकिस्तान के सिस्टम को फेल बताया, युवाओं को कॉकरोच कहा. 

दो दिन बाद उन्होंने कहा है कि 20 सालों के सबसे बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. इसमें नेता, जज, वकील, अफसर और बैंकर शामिल हैं. 

ये बात पाकिस्तान का गृह मंत्री बोल रहा था. शहबाज शरीफ सिर्फ सन्न थे. उनके मुंह से सफाई के दो शब्द भी नहीं निकले. 

मोहसिन नकवी ने घोटाले में फंसे नेताओं को नाम नहीं बताया लेकिन उन्होंने एक-एक पर एक्शन का वादा किया. इससे शरीफ-जरदारी खेमे में खलबली मच गई, विश्लेषक इसे मुनीर के इशारे पर किया गया पावर प्ले बता रहे हैं. नागरिक सरकार को कमजोर करके सैन्य स्थापना का नियंत्रण और मजबूत करने की कोशिश. 

शरीफ तो चुप रहे... लेकिन ख्वाजा फट पड़े

मोहसिन नकवी के बयान पर पीएम शहबाज तो चुप रहे, लेकिन रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ फट पड़े. उन्होंने नकवी को सलाह दी कि सिस्टम बदलना है तो वे गृह मंत्रालय से शुरू करें.  नेशनल एक्शन प्लान के बाकी 12 पॉइंट्स लागू करें. 

Advertisement

पीसीबी पर तंज कसते हुए रक्षा मंत्री आसिफ ने कहा, "नकवी साहब, सिस्टम हमेशा विकसित होते रहते हैं. उदाहरण के तौर पर पीसीबी में क्रांति लाएं. क्रिकेट फैंस पीसीबी के प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं हैं.वहां सारी ताकत आपके हाथ में है. ना प्रधानमंत्री, ना संसद, ना पुराना सिस्टम.

आसिफ ने कहा कि नकवी सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री हैं, कई मामलों में प्रधानमंत्री के प्रति भी जवाबदेह नहीं दिखते, कैबिनेट मीटिंग्स में शायद ही जाते हैं, संसद में भी कम दिखते हैं. अगर इतने ताकतवर व्यक्ति को सिस्टम से शिकायत है तो बाकी मंत्रियों को घर चले जाना चाहिए. 

परवेज जैसा पावर चाहते हैं मुनीर

जियोपॉलिटिकल और डिफेंस एनालिस्ट संदीप उन्नीथन ने इंडिया टुडे को बताया कि नकवी लंबे समय से प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखते हैं. उन्हें हमेशा आसिम मुनीर का समर्थन मिला है और माना जाता है कि वे आर्मी चीफ के करीबी रिश्तेदार हैं. 

एनालिस्ट का मानना ​​है कि इसी करीबी रिश्ते की वजह से मुनीर ने संघर्ष के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के लिए नकवी को अपना विशेष प्रतिनिधि चुना.

इससे मुनीर को शरीफ सरकार के किसी भी संभावित दखल को पूरी तरह से दरकिनार करते हुए ईरानी सरकार के सामने एक सिविलियन चेहरा पेश करने में मदद मिली.

Advertisement

फिलहाल, पाकिस्तान में मुनीर के पास बेहिसाब ताकत है. वे न केवल डिफेंस फोर्सेज को कंट्रोल करते हैं, बल्कि पाकिस्तान की विदेश नीति और अर्थव्यवस्था पर भी असर डालते हैं. उन्नीथन के अनुसार नकवी को आगे बढ़ाकर मुनीर असल में शरीफ को एक बड़ा संदेश देना चाहते हैं. 

उन्नीथन ने इस बात पर जोर दिया कि नकवी को शायद मुनीर के लिए राष्ट्रपति और डिफेंस फोर्सेज के प्रमुख का पद संभालने का माहौल बनाने का काम सौंपा गया हो, ठीक वैसे ही जैसे परवेज़ मुशर्रफ ने किया था. 

शरीफ कैंप को पंजाब और भुट्टो को सिंध की चिंता

यह कहना जल्दबाजी होगी कि मोहसिन नकवी सीधे शहबाज शरीफ या जरदारी की जगह लेने जा रहे हैं. पाकिस्तान की राजनीति अभी भी गठबंधन, क्षेत्रीय समीकरणों और सेना के फैसलों पर काफी हद तक निर्भर करती है. लेकिन इतना जरूर है कि उनकी बढ़ती ताकत पारंपरिक राजनीतिक परिवारों के लिए चुनौती बनती दिखाई दे रही है.

शहबाज शरीफ की पार्टी पंजाब में अपना प्रभाव बचाए रखने की कोशिश कर रही है, जबकि आसिफ अली जरदारी और बिलावल भुट्टो सिंध में अपनी पकड़ मजबूत रखना चाहते हैं. ऐसे में अगर एस्टैब्लिशमेंट किसी नए सिविलियन चेहरे को आगे बढ़ाती है तो सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं दोनों राजनीतिक घरानों को हो सकता है.

Advertisement

फिलहाल इतना तय है कि मोहसिन नकवी पाकिस्तान की सत्ता के सबसे प्रभावशाली सिविलियन चेहरों में शामिल हो चुके हैं. उनके पास न वर्दी है, न कोई विशाल जनाधार, लेकिन सत्ता के गलियारों में उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है. इसी वजह से उन्हें "बिना वर्दी वाला मुनीर" कहा जा रहा है. 
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »