5 साल तक मिसाइल बंद, यूरेनियम जीरो... जंग रोकने के लिए ट्रंप की शर्त, ईरान बोला- पहले मुआवजा और गारंटी दो

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ शांति वार्ता करने के बारे में सोच रहे हैं. लेकिन ट्रंप की कई शर्तें हैं, जिनमें ईरान से युद्धविराम, मुआवजा, मिसाइल कार्यक्रम बंद करना और परमाणु केंद्रों को बंद करना शामिल हैं. ईरान ने भी नुकसान की भरपाई और भविष्य में हमले न होने की गारंटी मांगी है.

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अमेरिका सीजफायर के बारे में सोच रहा है. (Photo: AP) अमेरिका सीजफायर के बारे में सोच रहा है. (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:02 AM IST

मिडिल-ईस्ट में चल रही जंग के बीच खबर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ शांति वार्ता कर सकते हैं. हालांकि, युद्ध खत्म करने के लिए ट्रंप की कई शर्तें हैं जिसे ईरान को मानना होगा. वहीं, ईरान ने भी जंग में हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है.

'एक्सियोस' की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप सरकार ने ईरान के साथ शांति वार्ता को लेकर आंतरिक चर्चा शुरू कर दी है. शांति की इस शुरुआती योजना की अगुवाई जारेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ कर रहे हैं.

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फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है, लेकिन मिस्र, कतर और ब्रिटेन मध्यस्थ के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. इस बीच, अभी लड़ाई के 2 से 3 सप्ताह तक जारी रहने की उम्मीद है.

कहा जा रहा है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार तो है, लेकिन युद्ध खत्म करने के लिए ईरान ने कड़ी शर्तें रखी हैं. ईरान ने युद्धविराम लागू करने और भविष्य में किसी भी हमले न होने की गारंटी की मांग की है. ईरान ने युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजा की शर्त भी रखी है.

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सीजफायर के लिए अमेरिका की कड़ी शर्तें

दूसरी तरफ, अमेरिका चाहता है कि ईरान अगले 5 सालों तक कोई मिसाइल कार्यक्रम न करे. अमेरिका की ये भी शर्त है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन जीरो कर दे और अपने प्रमुख परमाणु केंद्रों को पूरी तरह बंद कर दे. इसके अलावा, अमेरिका ने ईरान से क्षेत्रीय मिसाइलों पर सीमा तय करने और हिजबुल्ला, हूतियों और हमास जैसे समूहों को समर्थन बंद करने की मांग की है.

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ईरान पहले ही अमेरिका की इनमें से कई मांगों को खारिज कर चुका है. ट्रंप भी फिलहाल युद्धविराम के लिए तैयार नहीं हैं और उन्होंने 'मुआवजे' की मांग को 'नॉन-स्टार्टर' बताया है. हालांकि, मुआवजे के बजाय ईरान की जमी हुई संपत्तियों को वापस करने के बारे में सोच रहा है.

शांति वार्ता के लिए कई चुनौतियां

सबसे बड़ी चुनौती ये है कि अभी साफ नहीं है कि ईरान में फिलहाल फैसले लेने की शक्ति किसके पास है. मध्यस्थता के लिए सबसे प्रभावी देश कौन सा होगा, ये भी तय होना बाकी है. अमेरिका मध्यस्थ के तौर पर कतर को तरजीह दे रहा है, लेकिन बातचीत अभी बहुत शुरुआती चरण में है. युद्ध अभी जारी है, लेकिन कूटनीति की जमीन तैयार होनी शुरू हो गई है. अमेरिका और ईरान के रुख में अभी भी बहुत बड़ा अंतर है. शांति वार्ता हो सकती है, लेकिन अभी ये दूर नजर आ रही है.

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