'इजरायल चुनाव में नहीं हुई धांधली, नतीजे सही', चुनाव आयोग से नेतन्याहू को करारा झटका

इजरायल के चुनाव आयोग ने पिछले हफ्ते हुए चुनाव की जांच के बाद कहा कि उसे धांधली का कोई सबूत नहीं मिला है. नेतन्याहू और उनके समर्थकों ने अरब पार्टियों पर चुनाव चुराने के आरोप लगाए थे.

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बेंजामिन नेतन्याहू (फाइल फोटो) बेंजामिन नेतन्याहू (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:15 PM IST

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को चुनाव में धांधली के आरोपों पर बड़ा झटका लगा है. देश के चुनाव आयोग ने बुधवार को कहा कि पिछले हफ्ते हुए चुनाव में उसे किसी तरह की धांधली या गड़बड़ी का सबूत नहीं मिला है. आयोग के मुताबिक, चुनाव के नतीजे मतदाताओं की पसंद को सही तरीके से दिखाते हैं.

नेतन्याहू और उनके समर्थक लगातार आरोप लगा रहे थे कि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने विदेशी मदद से चुनाव 'चुरा' लिया है. हालांकि, आयोग की जांच में इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई. चुनाव के नतीजों में नेतन्याहू के धार्मिक-राष्ट्रवादी गठबंधन को संसद में बहुमत नहीं मिला, जबकि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने अच्छी बढ़त हासिल की.

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जांच में नहीं मिला गड़बड़ी का सबूत

चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा, "जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि चुनाव की निष्पक्षता से समझौता हुआ या उसके नतीजों पर कोई असर पड़ा."

आयोग के कार्यकारी निदेशक डीन लिवने ने बताया कि जांच के दौरान हर शिकायत की अलग-अलग और पूरी तरह से पड़ताल की गई. लेकिन चुनाव के नतीजों को अमान्य ठहराने वाले आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिला. उन्होंने कहा कि नतीजे मतदान केंद्रों पर लोगों की पसंद को सही तरीके से दिखाते हैं.

चुनाव के आधिकारिक नतीजों को बुधवार को प्रमाणित किया जाना है. हालांकि, विदेशी दखल के आरोपों की एक अलग जांच अभी जारी है. यह जांच इजरायल की खुफिया एजेंसी शिन बेट कर रही है.

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सरकार बनाने के लिए नेतन्याहू और आइजेनकोट के सामने चुनौती

आधिकारिक नतीजे मिलने के बाद राष्ट्रपति इसाक हर्जोग बुधवार से संसद के लिए चुनी गई पार्टियों के साथ बातचीत शुरू करेंगे. दो दिन तक सभी दलों से चर्चा के बाद वह उस नेता को सरकार बनाने के लिए बुलाएंगे, जिसे वह गठबंधन बनाने में सक्षम मानेंगे. इस दौड़ में नेतन्याहू और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट शामिल हैं.

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दोनों में से किसी भी खेमे को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिला है. ऐसे में नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच गठबंधन या आइजेनकोट की अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने की संभावना भी है. अगर दोनों में से कोई भी सरकार बनाने में सफल नहीं होता, तो अगले साल की शुरुआत में इजरायल में फिर से चुनाव कराए जा सकते हैं.

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