80 घंटे, 2 बड़े मुद्दे और महायुद्ध की आहट... US-ईरान के बीच क्या हो पाएगा स्थाई सीजफायर?

अमेरिका और ईरान के बीच 1 मई से पहले डील होती है या नहीं, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है. यूरेनियम और होर्मुज को लेकर टकराव चरम पर है. डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनियों और ईरान के सख्त रुख के बीच हालात बिगड़ते जा रहे हैं. आने वाले 80 घंटे बेहद अहम हैं.

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पाकिस्तान के कोशिशों के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता नहीं हुई. (File Photo: AP) पाकिस्तान के कोशिशों के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता नहीं हुई. (File Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:52 PM IST

अगले 80 घंटे बेहद अहम हैं. दो जानी दुश्मन आमने-सामने खड़े हैं. दो बड़े मुद्दों यूरेनियम और होर्मुज पर ऐसी महाभारत छिड़ी है कि दुनिया सांस रोककर देख रही है कि आगे क्या होगा. 1 मई से पहले यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई डील नहीं हुई, तो हालात किस दिशा में जाएंगे, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है.

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डोनाल्ड ट्रंप तक ईरान की शर्तें पहुंच चुकी हैं. लेकिन यूरेनियम संवर्धन और होर्मुज को लेकर पेंच अभी भी फंसा हुआ है. यदि सहमति नहीं बनती है, तो आने वाले दिनों में तबाही की तस्वीरें फिर देखने को मिल सकती हैं. जैसे-जैसे 1 मई की तारीख करीब आ रही है, मिसाइलें, धमाके और युद्ध की आशंका बहुत तेज होती जा रही है. 

पिछले 48 घंटे में मेल-मिलाप के जरिए समाधान की उम्मीदें कई बार टूटी हैं. एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप की धमकियां हैं, तो दूसरी तरफ ईरान का एलान है कि वो किसी भी कीमत पर नहीं झुकेगा. होर्मुज को लेकर बीते एक हफ्ते में तनाव और बढ़ गया है. कहने को सीजफायर था, लेकिन अमेरिका ने एक ईरानी जहाज पर कब्जा जमा लिया.

इसके जवाब में ईरान ने दो जहाजों को रोक लिया और उनके क्रू को अपने कब्जे में ले लिया. ईरान का आरोप है कि ये जहाज अमेरिका की मदद कर रहे थे. होर्मुज स्ट्रेट इस पूरे टकराव का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है. उसकी निगरानी के लिए अमेरिका ने तीन विनाशकारी वॉरशिप ईरानी बंदरगाहों के आसपास तैनात कर रखे हैं.

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अमेरिका हर उस जहाज पर नजर रख रहा है जो ईरान की ओर जा रहा है या वहां से निकल रहा है. इसका सीधा असर ईरान के तेल निर्यात पर पड़ा है. उसे हर दिन करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है. ऊपर से तेल स्टोरेज की समस्या ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. सही मायने में देखें तो ईरान के पास अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है. 

ईरान भले ही अमेरिका का मुकाबला करने के दावे कर रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि इस टकराव में उसे भारी नुकसान हुआ है. लीडरशिप से लेकर लड़ाकों तक और मिसाइलों से लेकर ऑयल डिपो तक, ईरान काफी कुछ गंवा चुका है. अब उसे यूरेनियम कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा फैसला करना ही होगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह डील चाहते हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर. उन्होंने कहा, ''मैं सबसे अच्छी डील करना चाहता हूं. यदि मैं अभी चला जाऊं, तो हमें जबरदस्त कामयाबी मिलेगी. उन्हें फिर से सब कुछ बनाने में 20 साल लग जाएंगे, लेकिन मैं ऐसा नहीं करना चाहता. मैं चाहता हूं कि यह हमेशा के लिए रहे.''

डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है. उनके मुताबिक, ''हम इसे तभी खोलेंगे जब वे डील करेंगे. यदि हम इसे खोल देते हैं, तो वे हर दिन 500 मिलियन डॉलर कमाएंगे. मैं नहीं चाहता कि वे ऐसा करें, जब तक मामला सुलझ न जाए.'' ईरान ने भी कह दिया है कि वो अमेरिकी दबाव में झुकने वाला नहीं है.

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ईरानी संसद की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा, ''भले ही हम 400 किलो दे दें, समस्या हल नहीं होगी. इसमें कोई शक नहीं कि अमेरिकी अपनी मांगें बढ़ा देंगे.'' हालात जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उससे यही संकेत मिल रहा है कि यदि इस बार युद्ध छिड़ा तो पहले से ज्यादा भयंकर होगा.

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