होर्मुज में ट्रंप की नाकाबंदी का ईरान ने निकाला तोड़, दूसरे बंदरगाहों का कर रहा इस्तेमाल

अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब टकराव का केंद्र बन गया है. होर्मुज में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों पर सख्त नाकाबंदी लागू कर दी है. ईरान वैकल्पिक रणनीतियों से इसका जवाब दे रहा है.

Advertisement
अमेरिका ने होर्मुज की नाकाबंदी की तो ईरान ने वैकल्पिक बंदरगाहों का इस्तेमाल शुरू कर दिया. (Photo: AI Generated) अमेरिका ने होर्मुज की नाकाबंदी की तो ईरान ने वैकल्पिक बंदरगाहों का इस्तेमाल शुरू कर दिया. (Photo: AI Generated)

aajtak.in

  • तेहरान,
  • 15 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:35 PM IST

इस्लामाबाद में हुए शांति वार्ता के विफल होने के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम का भविष्य फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच स्थित अहम समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर टिक गया है. अमेरिका ने होर्मुज के पूर्व में ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों पर नाकाबंदी लागू कर दी है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने चेतावनी दी है कि ईरानी बंदरगाहों से होकर आ रहे किसी भी जहाज को रोका, या जब्त किया जा सकता है, चाहे वह किसी भी देश का हो.

Advertisement

अमेरिका ने होर्मुज की नाकाबंदी के लिए 15 से अधिक युद्धपोत तैनात किए हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान से आने-जाने वाले जहाजों पर अमेरिकी नौसेना उसी तरह कार्रवाई करेगी, जैसे समुद्र में ड्रग तस्करों के खिलाफ की जाती है. उनका यह बयान वेनेजुएला तट पर अमेरिकी नौसेना द्वारा नौकाओं पर किए गए विवादास्पद हमलों के संदर्भ में था. 

ट्रंप प्रशासन ने इन हमलों को ड्रग तस्करों के खिलाफ कार्रवाई से जोड़ा था, जबकि वेनेजुएला ने इसे निर्दोष लोगों की हत्या बताया था. उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखी गई. हालांकि अमेरिका ने कहा है कि मानवीय सहायता ले जाने वाले जहाजों को रोका नहीं जाएगा.

यह भी पढ़ें: होर्मुज तो पार कर लिया, लेकिन ट्रंप की 'लक्ष्मण रेखा' नहीं लांघ पाए ईरान के 8 जहाज

Advertisement

नाकाबंदी से बचने के लिए ईरान की तैयारी

ईरान इस नाकाबंदी से बचने के लिए कई रणनीतियां अपना रहा है. इसमें समुद्र में तेल का भंडारण (फ्लोटिंग स्टोरेज), शैडो फ्लीट (गुप्त टैंकरों) का इस्तेमाल और वैकल्पिक बंदरगाहों का उपयोग शामिल है. मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने पहले ही बड़ी मात्रा में तेल समुद्र में स्टोर कर लिया है. वर्तमान में लगभग 190 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल समुद्र में मौजूद है, जिससे चीन जैसे देशों की जरूरतें करीब 120 दिनों तक पूरी हो सकती हैं. यह नाकाबंदी उन सभी जहाजों को प्रभावित करती है जो ईरानी बंदरगाहों या तट से जुड़े हैं. 

अमेरिका ने साफ किया है कि गैर-ईरानी जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाएगा, लेकिन जो जहाज ईरान से जुड़े होंगे उन्हें रोका जा सकता है. हालांकि, यह कदम क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकता है. ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर नाकाबंदी जारी रही तो वह खाड़ी देशों में अमेरिकी सहयोगियों को निशाना बना सकता है. अमेरिका की यह रणनीति या तो ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर उसे बातचीत की मेज पर ला सकती है, या फिर हालात को सैन्य टकराव तक पहुंचा सकती है. अगर संघर्ष बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »