हॉर्मुज में बीच समंदर फंसा विदेशी जहाज, ईरान का 'तय रूट' नहीं अपनाने का दावा

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में एक विदेशी कंटेनर जहाज बीच समंदर में फंस गया. ईरानी सरकारी टीवी का दावा है कि जहाज ने ईरान द्वारा निर्धारित मार्ग का पालन नहीं किया, जिसके कारण यह हादसा हुआ. यह घटना ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को स्थायी बनाने के लिए कतर में बातचीत चल रही है.

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ईरान ने जहाज के नाम, उसके झंडे या उसके गंतव्य के बारे में तत्काल कोई जानकारी साझा नहीं की. (Photo- Representational) ईरान ने जहाज के नाम, उसके झंडे या उसके गंतव्य के बारे में तत्काल कोई जानकारी साझा नहीं की. (Photo- Representational)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:12 PM IST

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बुधवार को एक विदेशी कंटेनर जहाज फंस गया. ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, जहाज ने ईरान द्वारा निर्धारित आधिकारिक समुद्री मार्ग का पालन नहीं किया, जिसके कारण वह उथले पानी में जाकर फंस गया और आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया.

हालांकि ईरान ने जहाज के नाम, उसके झंडे या उसके गंतव्य के बारे में तत्काल कोई जानकारी साझा नहीं की. सरकारी टीवी ने केवल इतना कहा कि जहाज विदेशी कंटेनर पोत था और गलत मार्ग चुनने के कारण यह हादसा हुआ. ईरानी मीडिया ने दावा किया कि हॉर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों को IRGC द्वारा निर्धारित रूट ऑफ अथॉरिटी का पालन करना चाहिए. 

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रिपोर्ट में कहा गया कि आईआरजीसी पहले भी दुनिया भर के जहाज मालिकों, कप्तानों और शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दे चुका है कि निर्धारित मार्ग से हटकर आने-जाने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच हालिया संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच युद्धविराम को स्थायी बनाने के लिए कतर की राजधानी दोहा में कूटनीतिक वार्ता जारी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर कतर पहुंचे हुए हैं. क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू हो चुकी है, हालांकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर इन वार्ताओं की पुष्टि नहीं की है.

सूत्रों के मुताबिक, अंतरिम समझौते के तहत ईरान और अमेरिका ने 60 दिनों तक जहाजों को बिना शुल्क हॉर्मुज से गुजरने देने पर सहमति जताई थी. लेकिन इसके साथ ही ईरान ने यह भी शर्त रखी कि समुद्री मार्गों का नियंत्रण उसके पास रहेगा और भविष्य में वह जहाजों से पारगमन शुल्क वसूलने का अधिकार चाहता है. अमेरिका और कई खाड़ी देशों ने इस मांग का विरोध किया है.

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गौरतलब है कि हॉर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है. सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है. इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है.

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