अमेरिका में पिछले 27 साल से कानूनी रूप से रह रही भारतीय मूल की महिला वेंकट वासमसेट्टी (Venkata Vasamsetty) को अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) ने हिरासत में लिया है. वासमसेट्टी 2013 से ग्रीन कार्ड होल्डर हैं और अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में विशेष जरूरतों वाले बच्चों को पढ़ाने वाली पब्लिक स्कूल टीचर हैं. खास बात यह है कि कुछ महीने पहले ही एक अमेरिकी इमिग्रेशन जज ने उनके खिलाफ चल रहे डिपोर्टेशन केस को खत्म कर दिया था.
परिवार और इमिग्रेशन वकील के मुताबिक, वासमसेट्टी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. उनके दो बच्चे अमेरिकी नागरिक हैं और उनके दो नाती-पोते भी अमेरिकी नागरिक हैं. न्यूजवीक की रिपोर्ट के मुताबिक, वासमसेट्टी 11 अगस्त को नॉर्थ कैरोलिना के शार्लोट में निर्धारित ICE चेक-इन के लिए पहुंची थीं. इसी दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया. इसके बाद उन्हें जॉर्जिया के इरविन काउंटी डिटेंशन सेंटर ले जाया गया, जो शार्लोट से 500 किलोमीटर से ज्यादा दूर है.
2022 में भारत आने से शुरू हुआ विवाद
वासमसेट्टी के मामले की जड़ उनकी 2022 की भारत यात्रा है. अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि भारत में कई महीने रहने के कारण उन्होंने अमेरिका में अपने 'Lawful Permanent Resident' यानी स्थायी निवासी के दर्जे को छोड़ दिया था. वासमसेट्टी और उनके वकील इस दावे को खारिज करते हैं. उनकी वकील हेलेन पार्सोनेज और फैमिली फ्रेंड जो विल्सन के मुताबिक, वासमसेट्टी जुलाई 2022 में अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के लिए भारत आई थीं. इस दौरान उन्हें कोविड हो गया और बाद में दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो गईं. उनकी हालत इतनी बिगड़ी कि उन्हें भारत में करीब दो सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा.
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण तुरंत अमेरिका की लंबी यात्रा नहीं कर सकीं. आखिरकार फरवरी 2023 में करीब सात महीने बाद वह अमेरिका लौटीं. अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के तहत ग्रीन कार्ड होल्डर विदेश यात्रा कर सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक अमेरिका से बाहर रहने पर अधिकारी यह जांच कर सकते हैं कि संबंधित व्यक्ति अमेरिका को अपना स्थायी निवास बनाए रखना चाहता है या नहीं. खासकर 180 दिनों से ज्यादा समय तक बाहर रहने पर वापस लौटते समय अतिरिक्त जांच हो सकती है.
परिवार का दावा- अमेरिका छोड़ने का इरादा नहीं था
अमेरिकी अधिकारियों ने वासमसेट्टी के सात महीने भारत में रहने को आधार बनाते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी अमेरिकी स्थायी निवास की स्थिति छोड़ दी थी. हालांकि उनके वकीलों का कहना है कि अमेरिका में उनका घर, नौकरी और परिवार था और उन्होंने अमेरिका को स्थायी रूप से छोड़ने का कभी इरादा नहीं किया.
उनकी रिहाई की मांग को लेकर शुरू की गई Change.org याचिका में भी कहा गया है कि भारत यात्रा के समय वासमसेट्टी नॉर्थ कैरोलिना में घर खरीदने की प्रक्रिया में थीं. इसलिए भारत में स्थायी रूप से बसने का उनका कोई इरादा नहीं था.
अमेरिका लौटने के बाद संघीय अधिकारियों ने उनके खिलाफ डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू की. इस दौरान उन्हें परिवार के साथ रहने की अनुमति थी, लेकिन शार्लोट स्थित ICE कार्यालय में नियमित रूप से रिपोर्ट करना जरूरी था.
परिवार के मुताबिक, वासमसेट्टी ICE की हर निर्धारित अपॉइंटमेंट में पहुंचीं और उनके वकीलों ने ऐसे दस्तावेज भी जमा किए, जिनसे यह साबित करने की कोशिश की गई कि उन्होंने अमेरिका में अपना स्थायी निवास नहीं छोड़ा था.
मई में जज ने खत्म कर दिया था डिपोर्टेशन केस
इस मामले में अमेरिकी सरकार को अपने आरोप के समर्थन में सबूत पेश करने थे. वासमसेट्टी की वकील के मुताबिक, डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) अदालत की ओर से तय समय सीमा में जरूरी सबूत उपलब्ध नहीं करा पाया.
इसके बाद 19 मई 2026 को एक इमिग्रेशन जज ने वासमसेट्टी के खिलाफ चल रही डिपोर्टेशन की कार्यवाही खत्म कर दी. याचिका के मुताबिक, जज ने अपने फैसले में कहा कि DHS स्पष्ट और ठोस सबूतों के आधार पर यह साबित करने में नाकाम रहा कि वासमसेट्टी को लगाए गए आरोप के तहत अमेरिका से निकाला जा सकता है.
इसके बावजूद उनका ICE चेक-इन निर्धारित था. याचिका के अनुसार, वह 11 जुलाई को जज के आदेश की कॉपी लेकर ICE कार्यालय पहुंचीं. वहां कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि ICE के रिकॉर्ड अभी अपडेट नहीं हुए हैं और मामले को देखने वाला अधिकारी भी मौजूद नहीं है. उन्हें अगले महीने दोबारा आने को कहा गया.
11 अगस्त को पहुंचीं और हिरासत में ले लिया गया
वासमसेट्टी 11 अगस्त को दोबारा शार्लोट स्थित ICE कार्यालय पहुंचीं तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया. पारिवारिक मित्र और इमिग्रेशन वकील जो विल्सन ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए जाने से पहले उन्हें कोई चेतावनी या नोटिस नहीं दिया गया.
विल्सन के मुताबिक, वासमसेट्टी गंभीर डायबिटीज से पीड़ित हैं और उन्हें नियमित ग्लूकोज मॉनिटरिंग तथा मेडिकल केयर की जरूरत होती है. हिरासत में लिए जाने के समय उनके पास इंसुलिन और जरूरी मेडिकल सप्लाई नहीं थी. Change.org याचिका में आरोप लगाया गया है कि डिटेंशन सेंटर में उन्हें पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं और डायबिटीज के अनुकूल भोजन नहीं मिल रहा है.
अब फेडरल कोर्ट पहुंचा मामला
वासमसेट्टी के वकीलों ने उनकी हिरासत को चुनौती देते हुए फेडरल कोर्ट में इमरजेंसी हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की है. न्यूजवीक के मुताबिक, 13 अगस्त को एक फेडरल जज ने इमिग्रेशन अधिकारियों को तीन दिनों के भीतर यह बताने का आदेश दिया कि वासमसेट्टी को हिरासत में रखने का कानूनी आधार क्या है.
वासमसेट्टी की तत्काल रिहाई की मांग को लेकर ऑनलाइन अभियान भी चलाया जा रहा है. उनके समर्थकों का तर्क है कि अमेरिका में करीब तीन दशक का कानूनी निवास, ग्रीन कार्ड, कोई आपराधिक रिकॉर्ड न होना, अमेरिकी नागरिक परिवार, उनकी नौकरी और डिपोर्टेशन केस खत्म करने का इमिग्रेशन जज का फैसला उनके पक्ष में जाता है.
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