दुनिया में ऊर्जा संकट और तेल आपूर्ति में आ रही रुकावटों को लेकर शुक्रवार को भारत ने G20 मंच पर कड़ा रुख अपनाया. विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शुक्रवार को G20 देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में प्रतिबंधों और अहम समुद्री रास्तों के जरिए तेल आपूर्ति बाधित करने की आलोचना की. उन्होंने कहा कि ऊर्जा व्यापार और बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर किए जा रहे हमले सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि कीमतों को अपने नियंत्रण में रखने की सोची-समझी रणनीति है.
शुक्रवार को अटलांटा में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में जयशंकर ने कहा कि दुनिया एक ऐसे ऊर्जा संकट का सामना कर रही है, जो उत्पादन की कमी के कारण नहीं है. उनका कहना है कि यह अनिश्चितता, आपूर्ति में रुकावटों, बढ़ती कीमतों और ऊर्जा तक पहुंच में आ रही दिक्कतों की वजह से पैदा हुई है.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की ओर से बुलाई गई बैठक में उन्होंने कहा, 'ऊर्जा बाजारों को खुला और स्थिर बनाए रखने के लिए G20 को समझदारी के साथ नेतृत्व भी दिखाना होगा.'
विदेश मंत्री ने कहा कि प्रतिबंधों, रुकावटों और अहम समुद्री रास्तों पर पैदा हो रही बाधाओं से ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहा है. उन्होंने साफ कहा कि इसका असर सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है.
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एस. जयशंकर ने तेल और गैस के बीच मनमाने फर्क पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, 'कुछ देशों की चुनिंदा छूट खुद ही सब कुछ बयां कर देती हैं.' उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा के साथ ही वैश्विक बाजार में देशों की आपसी निर्भरता पर भी बात की. उन्होंने साफ कहा कि इसे कम करके नहीं आंका जाना चाहिए.
उन्होंने बताया कि भारत ने 'G20 क्रिटिकल मिनरल्स सर्कुलैरिटी इनिशिएटिव' का प्रस्ताव रखा है. जयशंकर ने G20 देशों से वित्तीय मदद बढ़ाने और उर्जा भंडारण, छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और बायोफ्यूल जैसी तकनीकों को समर्थन देने की अपील की.
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