फ्लाईदुबई का ओमानी को-पायलट कैसे बना जिहादी? रिपोर्ट में खुलासा

फ्लाईदुबई के ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी ने 30 सितंबर को भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर कॉकपिट में हमला कर विमान का नियंत्रण लेने की कोशिश की. जांच में सामने आया है कि हमाम को पहले ही ओमान एयर ने चरमपंथी विचारों और सामग्री को लेकर उड़ान भरने से रोक दिया था.

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फ्लाईदुबई फ्लाइट में हमले के बाद जांच के घेरे में ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी.(Photo-ITG) फ्लाईदुबई फ्लाइट में हमले के बाद जांच के घेरे में ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी.(Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:45 PM IST

फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर हमले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया है कि ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी ने पहले प्रार्थना करने की बात कही और इसके कुछ मिनट बाद कॉकपिट में कैप्टन पर हमला कर दिया.30 सितंबर को हुई इस घटना को UAE ने आतंकी हमले की कोशिश बताया है. फ्लाइट में 170 से ज्यादा लोग सवार थे, जिनमें ज्यादातर इजरायली थे. मामले की जांच जारी है और शुरुआती रिपोर्टों में को-पायलट हमाम अल-हमामी के कट्टरपंथी होने की बात सामने आई है.

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स्मित मछार ने बताया कि हमाम अल-हमामी ने फ्लाइट के दौरान प्रार्थना करने की अनुमति मांगी और इसके बाद कैप्टन की सीट के पीछे चला गया. जब स्मित विमान उड़ा रहे थे, तब हमाम ने पीछे से उन पर हमला किया और इमरजेंसी एक्स से कई बार वार किए. गंभीर चोटों के बावजूद स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे. उन्होंने एक बार नहीं, बल्कि दो बार दरवाजा खोलने की कोशिश की. दूसरी बार वह सफल रहे. इसके बाद यात्रियों ने हमाम को काबू में कर लिया और विमान का नियंत्रण संभाल लिया. बाद में विमान को सऊदी अरब के तबुक डायवर्ट किया गया.

रिपोर्टों के मुताबिक, हमाम अल-हमामी के कट्टरपंथी बनने का सिलसिला फ्लाईदुबई में शामिल होने से पहले ही शुरू हो गया था. ओमान की एयरलाइन ओमान एयर ने भी इसी वजह से उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया था. सूत्रों ने मीडिया संस्थानों को बताया कि ओमान एयर ने हमाम को 'चरमपंथी सामग्री रखने' की वजह से उड़ान भरने से रोक दिया था. इतना ही नहीं, द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, हमाम को डी-रेडिकलाइजेशन यानी कट्टरपंथ से बाहर लाने वाले कार्यक्रम से भी गुजरना पड़ा था.

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सीरिया और ऑस्ट्रेलिया से भी जुड़ी जांच

हमाम अल-हमामी की जिंदगी और पढ़ाई उसे ओमान से बाहर भी ले गई. वह अलग-अलग देशों में रहा, जिसमें लंबे गृहयुद्ध से गुजर रहा सीरिया और पढ़ाई के दौरान ऑस्ट्रेलिया भी शामिल है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, हमाम के पिता ओमानी और मां सीरियाई थीं. वह किशोरावस्था में अक्सर सीरिया जाता था. उस समय सीरिया 2011 से 2024 तक लंबे गृहयुद्ध से गुजर रहा था. अब कई देशों की जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या हमाम का कट्टरपंथ सीरिया में शुरू हुआ था. सीरिया में उस दौरान जिहादी संगठनों के साथ कई दूसरे सशस्त्र आतंकी संगठन भी सक्रिय थे.

इजरायल के हिब्रू भाषा के अखबार इजरायल हायोम ने जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से ईरान से संभावित संबंध की जानकारी दी है. अधिकारियों की जांच इस बात पर भी है कि क्या सीरिया में रहने के दौरान हमाम किसी ऐसे सीरियाई मिलिटेंट ग्रुप के संपर्क में आया था, जिसे पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन के दौरान ईरान ने कथित तौर पर बनाया था.

अहमद अल-शरा का भी जिक्र

अहमद अल-शरा अमेरिका के खिलाफ इराक में लड़ने और अल-कायदा की सीरियाई शाखा का नेतृत्व करने से लेकर बशर अल-असद की रूस समर्थित सरकार गिरने के बाद सीरिया का राष्ट्रपति बनने तक का सफर तय कर चुका है. अमेरिका ने कभी अल-शरा पर 1 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया था. बाद में अमेरिका ने उसका समर्थन किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उसे और उसकी पत्नी को परफ्यूम भी गिफ्ट किए. ट्रंप ने नवंबर 2025 में अल-शरा से मुलाकात की थी. यह किसी सीरियाई राष्ट्रपति की वॉशिंगटन की पहली यात्रा थी.

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रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने X पर एक पोस्ट में कहा कि हमाम का कट्टरपंथ ओमान में नहीं, बल्कि सीरिया में हुआ था. उन्होंने सीरिया में असद सरकार के खिलाफ लंबे समय तक चले गृहयुद्ध के दौरान हमाम के वहां रहने का भी जिक्र किया. चेलानी ने असद के खिलाफ अमेरिका की गुप्त कार्रवाई को 1980 के दशक में अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ चलाए गए अभियान के बाद CIA का सबसे बड़ा गुप्त अभियान बताया. उन्होंने हमाम के मामले को इस बात के उदाहरण के तौर पर पेश किया कि पश्चिमी देशों की ओर से धर्मनिरपेक्ष तानाशाही सरकारों की जगह ज्यादा इस्लामी विकल्प लाने की कोशिशें अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उल्टा खतरा बन सकती हैं.

ऑस्ट्रेलिया में भी हमाम के समय की जांच

सिर्फ सीरिया ही नहीं, हमाम अल-हमामी के ऑस्ट्रेलिया में बिताए समय की भी जांच की जा रही है. हमाम ने 2015 से 2017 के बीच ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में पढ़ाई की थी. ABC Australia की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया की जॉइंट काउंटर टेररिज्म टीम उसके ऑस्ट्रेलिया से जुड़े संपर्कों की जांच कर रही है. इस टीम में ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस, विक्टोरिया पुलिस और ASIO शामिल हैं. जांच इस बात की भी हो रही है कि क्या उसके कट्टरपंथ की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया में हुई थी.

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ओमान के उलट ऑस्ट्रेलिया में स्थानीय स्तर पर जिहादी गतिविधियों के कई मामले सामने आते रहे हैं. दिसंबर 2016 में, जब हमाम मेलबर्न में पढ़ाई कर रहा था, ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने क्रिसमस के दौरान फेडरेशन स्क्वायर, फ्लिंडर्स स्ट्रीट स्टेशन और सेंट पॉल्स कैथेड्रल के आसपास लोगों पर हमला करने की IS से प्रेरित साजिश को नाकाम किया था. इसमें विस्फोटक और दूसरे हथियार इस्तेमाल किए जाने थे.

ओमान लौटने के बाद भी उठे थे सवाल

हमाम अल-हमामी के शुरुआती साल ओमान में कैसे बीते, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. लेकिन विदेश से लौटने के बाद उसके व्यवहार को लेकर ओमान एयर की ओर से उड़ान भरने पर रोक लगाई गई थी. इसकी वजह उसके चरमपंथी विचारों को लेकर चिंता बताई गई थी.

ओमान एयर ने हमाम पर पहले ही खतरे का संकेत दे दिया था

द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, हमाम अल-हमामी ने 2018 में ओमान एयर के कैडेट पायलट कार्यक्रम में प्रवेश लिया था. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 2022 में उसने को-पायलट के तौर पर उड़ान भरना शुरू किया. 2024 तक ओमानी अधिकारियों को उसकी चरमपंथी वेबसाइटों और कट्टरपंथी विचारधारा में रुचि को लेकर चिंता होने लगी थी. WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक, हमाम को उड़ान भरने से रोक दिया गया, डी-रेडिकलाइजेशन कार्यक्रम में भेजा गया और प्रशासनिक काम में लगा दिया गया.

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ABC News ने वरिष्ठ खुफिया और कानून प्रवर्तन अधिकारियों के हवाले से अलग से बताया कि को-पायलट ट्रेनी के तौर पर काम करने के दौरान हमाम के पास चरमपंथी सामग्री मिली थी. इसके बाद उसे एक साल के लिए उड़ान भरने से निलंबित कर दिया गया था. हमाम के सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़े एक वीडियो के आखिर में अल-कायदा के आतंकियों अयमान अल-जवाहिरी और हुमाम खलील अबू-मुलाल अल-बलावी की तस्वीरें दिखाई देती थीं. अबू-मुलाल अल-बलावी ने 2009 में अफगानिस्तान में CIA के एक ठिकाने पर आत्मघाती हमला किया था, जिसमें CIA के सात कर्मचारियों की मौत हुई थी.

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि ओमानी अधिकारियों ने हमाम के कट्टरपंथी विचारों की पहचान कर उसे उड़ान भरने से रोक दिया था, लेकिन इन चिंताओं की जानकारी दूसरे देशों की सरकारों या एयरलाइंस के साथ व्यापक रूप से साझा नहीं की गई थी. फरवरी 2026 में जब UAE की एयरलाइन फ्लाईदुबई ने हमाम को नौकरी पर रखा, तो एयरलाइन ने उसका क्रिमिनल बैकग्राउंड चेक कराया था. लेकिन इस प्रक्रिया से जुड़े लोगों के मुताबिक, एयरलाइन ने उसके रोजगार के इतिहास की पुष्टि के लिए ओमान से संपर्क नहीं किया.

हमाम ने फ्लाईदुबई में आने से पहले ही हमले की योजना बनाई थी?

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रिपोर्टों के मुताबिक, हमाम अल-हमामी ने फ्लाईदुबई में शामिल होने के बाद हमले की योजना नहीं बनाई थी. उसने ऐसी एयरलाइन चुनी थी, जिससे वह तेल अवीव जा सके. रिपोर्टों में कहा गया है कि उसका इरादा विमान को इजरायल की किसी गगनचुंबी इमारत या बेन गुरियन एयरपोर्ट से टकराने का था. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में UAE की जांच से जुड़े दो इजरायली अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि हमाम ने फ्लाईदुबई में नौकरी मिलने से पहले ही हमले की योजना बना ली थी. उसने कथित तौर पर ऐसी एयरलाइंस की तलाश की थी, जो तेल अवीव के लिए उड़ान भरती हों. इसके बाद उसने ऐसी एयरलाइन में नौकरी पाने की कोशिश की.

इजरायल के चैनल 12 के मुताबिक, जून में बेन गुरियन एयरपोर्ट की फ्लाईदुबई यात्रा के दौरान हमाम ने जानकारी जुटाई और जुलाई में हमले की योजना बनाई.रिपोर्टों के मुताबिक, उसने जुलाई में हमले को आखिरी समय पर इसलिए रोक दिया क्योंकि वह जानता था कि उस फ्लाइट में चालक दल का एक सदस्य था जिसे वह जानता था. रॉयटर्स ने भी बताया कि हमाम ने हमले की एक कोशिश रोक दी थी और माना जा रहा था कि वह फ्लाइट में मौजूद किसी व्यक्ति को जानता था.

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हमाम अल-हमामी का रेडिकलाइजेशन कैसे हुआ?

इसका अभी कोई सीधा जवाब नहीं है. सीरिया में गृहयुद्ध के दौरान बिताए गए उसके साल इसकी एक संभावित वजह हो सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया में बिताए गए उसके समय की भी जांच हो रही है. उसकी इंटरनेट गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है.

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