कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच दो दिन तक बातचीत हुई. इस बैठक में दोनों देशों ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही, ईरान के फ्रीज किए गए फंड और हाल के तनाव के बाद हालात सामान्य करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की. हालांकि बातचीत के बाद भी किसी बड़े समझौते का ऐलान नहीं हुआ.
इस बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट रहा. ईरान चाहता है कि दुनिया यह माने कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर उसका अधिकार है. ईरान का कहना है कि कौन-सा जहाज किस रास्ते से जाएगा, इसका फैसला वही करेगा. अगर किसी जहाज से उसे सुरक्षा का खतरा लगा तो उसे रोकने का अधिकार भी उसके पास होना चाहिए.
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ईरान ने यह भी कहा कि अगस्त के मध्य से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों से फीस लिया जाएगा. फिलहाल एक तय अवधि तक जहाजों को बिना किसी शुल्क के गुजरने की छूट दी गई है.
बिना रुकावट के होर्मुज में हो जहाजों की आवाजाही
अमेरिका ने ईरान की मांगों का विरोध किया. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है और यहां सभी देशों के जहाजों को बिना किसी रुकावट के आने-जाने की आजादी होनी चाहिए. अमेरिका का यह भी कहना है कि किसी एक देश को यहां टोल वसूलने या जहाजों को रोकने का अधिकार नहीं है.
बातचीत में एक और मुद्दा ओमान के पास वैकल्पिक समुद्री रास्ता बनाने का भी उठा. अमेरिका चाहता है कि जहाज जरूरत पड़ने पर उस रास्ते का इस्तेमाल कर सकें, लेकिन ईरान ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया.
होर्मुज में तीसरे पक्ष की मौजूदगी मंजूर नहीं!
तनाव कम करने के लिए दोनों देशों ने कुछ तकनीकी कदमों पर भी चर्चा की. दोनों पक्षों ने एक सीधी संपर्क व्यवस्था (हॉटलाइन) बनाने पर बात की, ताकि समुद्र में किसी भी घटना के बाद हालात तुरंत संभाले जा सकें. इसके अलावा मौजूदा समझौते के उल्लंघन की जानकारी साझा करने के लिए भी एक अलग बातचीत की व्यवस्था बनाने पर सहमति बनी.
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समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने का मुद्दा भी बैठक में उठा. हालांकि, ईरान ने साफ कहा कि वह इस काम में किसी यूरोपीय देश या तीसरे पक्ष की सैन्य मदद नहीं चाहता.
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है और उन्हें उम्मीद है कि हालात दोबारा बड़े युद्ध तक नहीं पहुंचेंगे. ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई. हालांकि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी बरकरार हैं और आने वाले दौर की बातचीत में यही सबसे बड़ा मुद्दा रहने वाला है.
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