होर्मुज में धधक रहे 7 तेल टैंकर, ईरान ने टारगेट किया या समुद्री माइंस से टकराए?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 7 तेल टैंकरों में आग लगी है. ईरान का दावा है कि ये तेल टैंकर अवैध रूट से पास कर रहे थे. ईरान ने ताजा जानकारी में कहा है कि इन्हें हमारी सेना ने निशाना बनाया है. इसके साथ ही खाड़ी में तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है.

Advertisement
होर्मुज में ईरान के निशाने पर हैं तेल टैंकर (File Photo: ITG) होर्मुज में ईरान के निशाने पर हैं तेल टैंकर (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:55 PM IST

पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े युद्ध का खतरा मंडराने लगा है. होर्मुज स्ट्रेट में रातो रात सात तेल टैंकरों पर हमला हुआ है. इसके बाद इन सातों तेल टैंकरों में आग लगी है. ये तेल टैंकर बीच समंदर में टूट चुके हैं और धधक रहे हैं. ईरान ने गुरुवार को दावा किया कि इन जहाजों को या तो ईरान ने निशाना बनाया या वे समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आए.

Advertisement

इस घटना ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना ने धमकी दी है कि यदि अमेरिका इस जलमार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की मदद जारी रखता है, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया जा सकता है.

ईरान के सरकारी टेलीविजन ने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना के हवाले से जहाजों पर हमलों की जानकारी दी. हालांकि रिपोर्ट में किसी के हताहत होने का उल्लेख नहीं किया गया. ब्रिटेन की समुद्री निगरानी संस्था यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने भी इन हमलों की पुष्टि नहीं की है. ऐसे में घटना के पूरे ब्योरे और नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है.

लेकिन हाल के दिनों में निगरानी रखने वालों ने देखा है कि कुछ शिपिंग कंपनियां ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करने से कतरा रही हैं. ईरान अभी भी इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है, जो अमेरिका के साथ युद्ध को लेकर होने वाली किसी भी बातचीत में उसके लिए एक अहम दबाव बनाने का जरिया है.

Advertisement

ईरान के शीर्ष राजनयिक अब्बास अरागची ने बुधवार को कहा कि तेहरान सतर्क है, लेकिन वह बातचीत के लिए तैयार है और साथ ही अपनी रक्षा करने के लिए भी पूरी तरह मुस्तैद है.

ईरान ने चेतावनी दी है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों से शुरू हुए इस युद्ध से उसने कई अहम सैन्य सबक सीखे हैं. हाल के दिनों में तेहरान ने संकेत दिया है कि वह अपने हमलों के दायरे को बढ़ा सकता है, जिसमें समुद्र के नीचे बिछी केबल और डेटा सेंटर जैसे बुनियादी ढांचे भी शामिल हो सकते हैं.

वहीं अमेरिका इस क्षेत्र में और अधिक सैन्य संसाधन भेज रहा है. इसमें एक तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर (विमानवाहक पोत) और हजारों सैनिक शामिल हैं, जो मध्य पूर्व में दशकों में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों के सबसे बड़े बेड़े का हिस्सा बनेंगे.

इस बीच मध्यस्थ वाशिंगटन और तेहरान को फिर से औपचारिक बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं.

ईरान अभी भी अपने उस नए प्रस्ताव को आगे बढ़ा रहा है, जिसके तहत अगर अमेरिका कुछ शर्तें मान लेता है, तो युद्ध खत्म हो सकता है और एक हफ्ते के भीतर यह जलमार्ग पूरी तरह से खुल सकता है. इन शर्तों में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी को खत्म करना भी शामिल है. ये शर्तें काफी हद तक उस समझौते जैसी ही हैं, जिस पर जून में वाशिंगटन और तेहरान ने हस्ताक्षर किए थे, लेकिन कुछ ही दिनों में वह समझौता टूट गया था.

Advertisement

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सात दिन वाले इस नए प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, लेकिन दोनों पक्षों ने माना है कि उनके बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है. इस प्रस्ताव के खारिज होने के बाद से ही 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों में तेजी आई है.

अगर फिर से पूर्ण युद्ध छिड़ता है, तो पूरे क्षेत्र में आम नागरिकों की जान खतरे में पड़ जाएगी. साथ ही, इस क्षेत्र से तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक जैसे उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति भी प्रभावित होगी, जिससे इनकी कीमतों में एक बार फिर भारी उछाल आ सकता है.

होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर टकराव

होर्मुज स्ट्रेट ग्लोबल एनर्जी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है. यहां तनाव बढ़ने से कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा है. ईरान इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण जताता रहा है और अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत में इसे अहम दबाव के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »