हैती में आम चुनावों से पहले बेकाबू हुआ गिरोहों का आतंक... रक्षा मंत्रालय के निदेशक समेत कई VVIP अगवा, 42% बढ़े अपहरण

हैती में अपहरण फिर बढ़ रहे हैं. अप्रैल से जून के बीच 81 लोग अगवा हुए, जो पहली तिमाही से 42 प्रतिशत ज्यादा है. पुलिस महानिरीक्षक जेम्स बोयार्ड, वकील केलेब जीन बैप्टिस्ट और स्टेफनी पॉल्त्र जैसे बड़े नाम निशाने पर हैं. केंसकॉफ में 164 लोग मारे गए और 70 से ज्यादा अगवा हुए, जबकि पेटिट रिविएर में सैकड़ों लोग दो दिन बंधक रहे. 2025 में 1,268 मामले दर्ज हुए थे, पर असली संख्या ज्यादा मानी जाती है.

Advertisement
राष्ट्रपति चुनाव से पहले हैती में बढ़ा अपहरण और गैंग हिंसा का खतरा (Photo: Reuters) राष्ट्रपति चुनाव से पहले हैती में बढ़ा अपहरण और गैंग हिंसा का खतरा (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:50 AM IST

हैती में अपहरण की घटनाएं फिर तेजी से बढ़ रही हैं. गिरोह अब मशहूर लोगों को निशाना बना रहे हैं और एक साथ सैकड़ों लोगों को बंधक भी बना रहे हैं. यह सब ऐसे समय हो रहा है जब देश एक दशक से ज्यादा समय बाद आम चुनाव की तैयारी में है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक अप्रैल से जून के बीच कम से कम 81 लोगों का अपहरण हुआ, जो साल की पहली तिमाही से 42 प्रतिशत ज्यादा है. सरकार सुरक्षा बल बढ़ा रही है और संयुक्त राष्ट्र समर्थित गिरोह विरोधी बल का कार्यकाल भी बढ़ाया गया है.

Advertisement

पीड़ितों में पुलिस महानिरीक्षक और रक्षा मंत्रालय के कैबिनेट निदेशक जेम्स बोयार्ड भी हैं. उन्हें जून में दिनदहाड़े पोर्ट ऑ प्रिंस के बोर्डन इलाके से उठाया गया, जिसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है. वे अब तक रिहा नहीं हुए. स्थानीय मीडिया के मुताबिक मशहूर वकील केलेब जीन बैप्टिस्ट और राष्ट्रीय शैक्षिक साझेदारी कार्यालय की महानिदेशक स्टेफनी पॉल्त्र भी अगवा हुए हैं.

राष्ट्रपति जोवेनेल मोइज़ की जुलाई 2021 में उनके निजी घर में हत्या हुई थी. तब से देश में कोई राष्ट्रपति नहीं है और हिंसा बढ़ती गई है. विशेषज्ञ रोमेन ले कूर के मुताबिक चुनाव ऐसे मामलों को तेज करते हैं, क्योंकि हर घटना से दुनिया का ध्यान जाता है और सरकार की नाकामी सामने आती है. ज्यादातर लोग बदले के डर से अपहरण की शिकायत नहीं करते. फिर भी वकील डोरिम बुलोस ने सितंबर के मध्य में जीन बैप्टिस्ट को छुड़ाने के लिए चंदा जुटाने का ऐलान किया. उन्होंने फिरौती की रकम नहीं बताई, बस इतना कहा कि मांगी गई रकम उनके पास नहीं है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: जहान मिटाना है तो जंगल काट दो... अमेजन हो या हिमाचल, हैती हो या सुमात्रा, नतीजे सबने देखे हैं

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक बड़े पैमाने पर अपहरण 2020 में शुरू हुए. उस साल 234 मामले आए, जबकि 2019 में 78 थे. छात्रा एवलिन सिंसेयर की हत्या के बाद बड़े प्रदर्शन हुए. 2021 में 655, 2022 में 1,359 और 2023 में 2,490 मामले दर्ज हुए, जब गिरोह नकली पुलिस वर्दी पहनकर वारदात करने लगे. 2024 में कम से कम 2,058 लोग अगवा हुए. 2025 में आंकड़ा करीब 40 प्रतिशत घटकर 1,268 रहा, लेकिन असली संख्या इससे कहीं ज्यादा मानी जाती है.

इस गर्मी गिरोहों ने केंसकॉफ में कम से कम 164 लोगों को मारा और 70 से ज्यादा को अगवा किया. छह बच्चे और सात महिलाएं छोड़ी गईं, बाकी अब भी कैद हैं. सितंबर के आखिर में पेटिट रिविएर में पुलिस की गिरफ्तारी के बदले गिरोहों ने सैकड़ों लोगों को दो दिन बंधक रखा. इसमें कम से कम आठ लोग मारे गए और 10 घायल हुए.

प्रधानमंत्री एलिक्स डिडियर फिल्स एमे के मुताबिक इस साल 4,000 नए पुलिसकर्मी प्रशिक्षित हो रहे हैं और अगले तीन साल में 15,000 नए सैनिक तैयार होंगे. पुलिस ने अपहरणकर्ताओं से बातचीत के लिए करीब एक दर्जन अफसर भी तैयार किए हैं. संयुक्त राष्ट्र समर्थित बल में अभी करीब 1,600 कर्मी हैं और जल्द यह संख्या दोगुनी हो सकती है.

---- समाप्त ----

TOPICS:
Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »