3 घंटे में 50 बार कांपी धरती, जमींदोज हो गए 1000 घर... एक के बाद एक Aftershocks ने तिब्बत को किया तबाह

तिब्बत में 7.1 तीव्रता के भूकंप ने टिंगरी गांव में भारी तबाही मचाई, जो माउंट एवरेस्ट के करीब है. इसमें 126 लोगों की मौत हो गई और 1000 घर ध्वस्त हो गए. 7000 की आबादी वाले इस क्षेत्र में 3 घंटे में 50 आफ्टरशॉक्स महसूस किए गए, जिसमें कई की तीव्रता 4.4 दर्ज की गई. रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.

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तिब्बत में भूकंप से तबाही की तस्वीर (Photo: Reuters) तिब्बत में भूकंप से तबाही की तस्वीर (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:45 AM IST

भारत के पड़ोसी तिब्बत में एक भयानक भूकंप के झटके ने 126 लोगों की जान ले ली. इसका केंद्र हजारों फीट ऊंचाई पर स्थित टिंगरी गांव में था, जिसे एवरेस्ट क्षेत्र का उत्तरी द्वार माना जाता है. ये गांव माउंट एवरेस्ट से 80 किलोमीटर की दूरी पर है, जहां भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर गहराई था. केंद्र तबाही का एक पैमाना भी है, जहां कम गहराई, ज्यादा तबाही का कारण बनता है. यही वजह है कि 3 घंटे के दरमियान यहां 50 बार धरती कांपी, जिसमें बड़ी तबाही मची.

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तिब्बत दुनिया का सबसे ऊंचाई वाला क्षेत्र है, जो सरफेस से 13000-16000 फीट की ऊंचाई पर है. इसके एक पहाड़ी क्षेत्र होने के नाते यहां भूकंप आने से बड़ी तबाही मचने की आशंका होती है. मंगलवार सुबह 9.15 बजे दर्ज किए गए भूकंप के झटके 7.1 तीव्रता के थे. इसके बाद 3 घंटे तक 50 आफ्टशॉक्स दर्ज किए गए, जिनमें कई की तीव्रता 4.4 दर्ज की गई. इससे तबाही ऐसी तबाही मची कि टिंगरी और आसपास के गांवों में सैकड़ों घर ध्वस्त हो गए.

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7000 की आबादी वाले क्षेत्र में तबाह हुए 1000 घर

बताया जा रहा है कि भूकंप के केंद्र के 20 किलोमीटर के दायरे में 27 गांव हैं, जहां कमोबेश 7000 की आबादी है. चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दायरे में 1000 घर तबाह हुए हैं. रेस्क्यू टीम आसपास के गांवों में भी रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है, जिससे संभावित रूप से मलबों में फंसे लोगों को बचाया जा सके. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियोज में ध्वस्त बिल्डिंग, मलबे, ध्वस्त सड़कें और कारें देखी जा सकती हैं.

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ल्हासा ब्लॉक में 75 साल में 21 बार आया भूकंप

चीनी मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो तिब्बत के टिंगरी में आया भूकंप ल्हासा ब्लॉक के नाम से जाने जाने वाले क्षेत्र में दरार की वजह से आया है, जो कि उत्तर-दक्षिण दबाव और पश्चिम-पूर्व दबाव के कारण होता है. मसलन, 1950 से अब तक इस ल्हासा ब्लॉक में 6 या उससे ज्यादा तीव्रता के 21 भूकंप दर्ज किए गए हैं. भूकंप के बाद माउंट एवरेस्ट वाले रूट्स को बंद कर दिया गया है, जहां तेज झटके की वजह से हिमस्खलन का खतरा बढ़ जाता है.

भूकंप वाले क्षेत्र में चीन बना रहा डैम

ल्हासा ब्लॉक में सबसे बड़ा भूकंप 2017 में 6.9 तीव्रता के साथ तिब्बत के मेनलिंग इलाके में आया था, जहां चीन इलेक्ट्रिसिटी उत्पादन के लिए अभी दुनिया का सबसे बड़ा डैम बना रहा है. मेनलिंग तिब्बत के यारलुंग जांग्बो नदी (ब्रम्हपुत्र नदी) के निचले हिस्से में है, जहां चीन के हाइड्रोपावर डैम प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, जहां आने वाले समय में फ्लैश फ्लड्स और इससे तबाही की आशंका जताई जा रही है.

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राष्ट्रपति जिनपिंग के रेस्क्यू टीम को निर्देश

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि हताहतों की संख्या को कम करने, प्रभावित लोगों को उचित रूप से बसाने और सुरक्षित और सर्दी के लिए इंतजाम करने के लिए सभी तरह के जरूरी कदम उठाने को कहा है. चीन की न्यूज एजेंसी ने बताया कि 1,500 से ज्यादा स्थानीय फायरफाइटर्स और बचाव कर्मियों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है. इसने बताया कि भूकंप प्रभावित क्षेत्र में टेंट, कोट, रजाई और फोल्डिंग बेड सहित लगभग 22,000 आइटम्स भी भेजी गई हैं.

क्या होता है आफ्टरशॉक्स?

आफ्टरशॉक्स मुख्य भूकंप के झटके के बाद महसूस किया जा सकता है. आमतौर पर जब भूकंप आते हैं और धरती हिलती है, और इलाका पहाड़ी तो जमीन के नीचे पत्थरों के बीच एनर्जी पैदा होती है, जिससे वे टूटते हैं और ज्यादा एनर्जी रिलीज होता है, जिससे कम या उससे ज्यादा तीव्रता के झटके लगते हैं. आफ्टरशॉक्स भूकंप के आने के कुछ समय बाद या अगले कुछ दिनों तक आता रहता है.

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