इजरायली खुफिया इनपुट पर CIA को था शक, तुर्की से ट्रंप का गुपचुप किया गया 'रेस्क्यू'

तुर्की में NATO समिट के दौरान ट्रंप को ईरानी हमले से बचाने के लिए जिस गुप्त ऑपरेशन के तहत दूसरे विमान में शिफ्ट किया गया था, उस पर अब नई जानकारी सामने आई है. इजरायल से मिले ईरानी हमले के इनपुट को CIA ने कम भरोसे वाला माना था, लेकिन सीक्रेट सर्विस ने जोखिम नहीं लिया.

Advertisement
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश का दावा इजरायल ने किया था. (Photo- ITG) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश का दावा इजरायल ने किया था. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:27 AM IST

तुर्की में NATO समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गुपचुप तरीके से एक विमान से दूसरे विमान में शिफ्ट किए जाने के मामले में अब बड़ा खुलासा हुआ है. ट्रंप की हत्या की ईरानी साजिश से जुड़ी खुफिया जानकारी इजरायल ने अमेरिका को दी थी, लेकिन CIA के विश्लेषकों को इस इनपुट पर ज्यादा भरोसा नहीं था. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कुछ अधिकारियों ने इसे "लो कॉन्फिडेंस" वाली इजरायली खुफिया जानकारी माना था.

Advertisement

रिपोर्ट के मुताबिक, 8 जुलाई को अंकारा से ट्रंप की वापसी के दौरान सीक्रेट सर्विस ने बेहद गोपनीय ऑपरेशन चलाया. ट्रंप पहले पुराने एयर फोर्स वन पर सवार हुए, लेकिन बाद में उन्हें एक कैटरिंग ट्रक के जरिए चुपचाप बाहर निकाला गया और अमेरिकी सैन्य विमान C-32A में बैठाया गया. यह विमान ट्रंप और कुछ चुनिंदा अधिकारियों को ब्रिटेन के लिए लेकर रवाना हुआ. वहीं, पत्रकारों और कुछ अधिकारियों को यह पता नहीं था कि ट्रंप उस विमान में मौजूद नहीं हैं.

यह भी पढ़ें: ट्रंप की जान पर ईरान का खतरा या इजरायल की चाल? होर्मुज डील को डिरेल करने तुर्की का आरोप

इजरायल के इनपुट पर CIA को नहीं था भरोसा

द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इजरायल की तरफ से मिले इनपुट में आशंका जताई गई थी कि ईरान या उसके सहयोगी ट्रंप के विमान को शोल्डर टू एयर मिसाइल से निशाना बना सकते हैं. हालांकि, CIA के कुछ अधिकारियों को यह खुफिया जानकारी पर्याप्त विश्वसनीय नहीं लगी.

Advertisement

कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी आशंका जताई कि इजरायल का इनपुट सिर्फ खतरे की जानकारी देने के लिए नहीं, बल्कि ट्रंप के फैसलों और क्षेत्रीय नीति को प्रभावित करने के मकसद से भी दिया गया हो सकता है.

ट्रंप पर पहले भी हुए हमले, सुरक्षा का खास ख्याल

इसके बावजूद सीक्रेट सर्विस ने कोई जोखिम नहीं लिया. ट्रंप को जिस C-32A से तुर्की से ब्रिटेन ले जाया गया, उसे F-16 लड़ाकू विमानों ने एस्कॉर्ट किया. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप के खिलाफ पहले भी हत्या की कोशिशें हो चुकी हैं, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों ने खतरे को कम आंकने के बजाय अतिरिक्त सावधानी बरती.

यह भी पढ़ें: कैटरिंग ट्रक में छिपकर, मिलिट्री प्लेन से तुर्की से निकाले गए थे ट्रंप, ईरानी हमले का डर

ट्रंप ने भी बाद में कहा कि विमान बदलने का फैसला सीक्रेट सर्विस ने लिया था. वह सुरक्षा अधिकारियों के निर्देशों का पालन करते हैं. इस पूरे ऑपरेशन ने अब अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के बीच इजरायली इनपुट की विश्वसनीयता और ट्रंप की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »