अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद कन्फर्म किया है कि पिछले महीने तुर्किए से ब्रिटेन जाते समय उन्होंने गुपचुप तरीके से अपना विमान बदला था. ट्रंप ने कहा कि सीक्रेट सर्विस और मिलिट्री की सलाह पर उन्हें दूसरे प्लेन में जाना पड़ा.
उन्होंने कहा, "वो लोग जो कहते हैं मैं वही करता हूं. लगता है कोई खतरा था. मैंने ज्यादा कुछ नहीं पूछा. मुझे बहुत सारी धमकियां मिलती रहती हैं." ट्रंप ने आगे कहा कि किसी भी बड़े और असरदार राष्ट्रपति को धमकियां मिलती हैं, और वो खुद को अब तक का सबसे प्रभावशाली राष्ट्रपति मानते हैं.
अमेरिकी मीडिया के रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप तुर्किए के अंकारा में टीवी कैमरों के सामने एयरफोर्स वन में सवार हुए थे, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद वो एक केटरिंग ट्रक के जरिए एक छोटे मिलिट्री प्लेन C-32A में शिफ्ट हो गए. ट्रंप अंकारा में नाटो समिट में कतर से मिले नए बोइंग 747-8 विमान से गए थे, लेकिन वापसी के लिए उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि वो पुराने एयरफोर्स वन का इस्तेमाल करेंगे.
खास बात यह है कि पुराने एयरफोर्स वन में मौजूद पत्रकारों को यह नहीं बताया गया कि ट्रंप उनके साथ नहीं उड़ रहे हैं. यह एक तरह की डिकॉय फ्लाइट थी. सीक्रेट सर्विस ने पत्रकारों से विमान की खिड़कियां बंद रखने को कहा था.
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रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा प्लान ईरान से जुड़े एक गंभीर खतरे की वजह से बनाया गया था. न्यूयॉर्क टाइम्स और सीबीएस न्यूज ने भी पहले बताया था कि खुफिया एजेंसियों ने राष्ट्रपति या उनके विमान पर हमले की आशंका जताई थी, जिसके बाद अतिरिक्त सुरक्षा कदम उठाए गए.
उस समय ट्रंप ने कहा था कि नया विमान पहले इसलिए भेजा गया ताकि ब्रिटेन के मिल्डेनहॉल एयरबेस पर तैनात अमेरिकी सैनिक नए एयरफोर्स वन को देख सकें. विमान बदलने की इस घटना के बाद कतर से मिले विमान की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे, जिसके बाद ट्रंप ने कहा कि इस विमान में अतिरिक्त सुरक्षा अपग्रेड किए जाएंगे.
मिल्डेनहॉल पहुंचने के बाद फोटोग्राफरों ने ट्रंप को प्लेन से उतरते देखा, जिससे साफ हुआ कि वो पत्रकारों की नजरों से दूर दोबारा असली एयरफोर्स वन में सवार हो गए थे. इसके बाद वो नए एयरफोर्स वन से वॉशिंगटन के लिए रवाना हुए.
विमान में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान की तरफ से कोई गंभीर खतरा था. इस पर उन्होंने कहा, "मुझे हमेशा धमकियां मिलती रहती हैं. उनकी लिस्ट में मैं आप से पहले नंबर पर हूं. लेकिन अगर मैं गया तो आप भी जाएंगे." ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें ईरान पर भरोसा नहीं है क्योंकि ईरान ने बार बार झूठ बोला है.
जिस दौरान ट्रंप तुर्किए में थे, उसी दौरान अमेरिकी सेना ने ईरान पर कई हमले किए. ये हमले ईरान की तरफ से क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर किए गए हमलों का जवाब थे. ईरान ने अब तक अपनी मांगों से पीछे हटने से इनकार किया है.
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उसका कहना है कि पहले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म करे, तभी वो होर्मुज को फिर से खोलने पर विचार करेगा. यह अहम जलमार्ग तब बंद हुआ जब 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था. दुनिया के करीब बीस फीसदी तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से होती थी, और इसके बंद होने से तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव बना हुआ है.
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