अमेरिका में ट्रंप के शांति बोर्ड की पहली मीटिंग, पाकिस्तान को भी भेजा जाएगा न्योता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस महीने वॉशिंगटन में नए शांति बोर्ड की पहली बैठक आयोजित करेंगे, जिसका उद्देश्य गाजा के पुनर्निर्माण के लिए धन जुटाना है. इस बैठक में कई विश्व नेता शामिल होंगे, जबकि यूरोप और अमेरिका के कई पुराने साथी देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने से मना कर दिया है.

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ट्रंप की शांति बैठक में कई वैश्विक नेता शामिल होंगे. (Photo: Reuters) ट्रंप की शांति बैठक में कई वैश्विक नेता शामिल होंगे. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:33 AM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस महीने वॉशिंगटन में नए शांति बोर्ड की पहली बैठक आयोजित करेंगे. इसके मकसद गाजा के पुनर्निर्माण के लिए धन जुटाना होगा. 19 फरवरी को होने जा रही इस मीटिंग में कई वैश्विक नेता शामिल होंगे. इसके लिए पाकिस्तान को भी न्योता भेजा जाएगा.

ट्रंप की शांति बोर्ड की पहली मीटिंग में वहीं नेता शामिल होंगे, जिन्होंने जनवरी में ट्रंप के निमंत्रण पर बोर्ड में शामिल होने का प्रस्ताव स्वीकार किया था. इसके अलावा गाजा के लिए बनाई गई कार्यकारी समिति के सदस्य भी इस बैठक का हिस्सा बनेंगे.

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बता दें कि ये कार्यकारी समिति क्षेत्र के शासन, सुरक्षा और पुनर्निर्माण के खास पहलुओं की देखरेख करेगी.

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औपचारक घोषणा का इंतजार

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है कि ट्रंप का निमंत्रण कितने नेता स्वीकार करेंगे. साथ ही बैठक की औपचारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है और इसके एजेंडा अभी तय किया जा रहा है. इस मीटिंग के जरिए प्रशासन मजबूत भागीदारी की उम्मीद कर रही है.

शांति बैठक के निमंत्रण पत्र में मीटिंग का वेन्यू यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस बताया गया है. इसे अब डोनाल्ड जे. ट्रम्प यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस के नाम से जाना जाता है.

नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने की राह पर ट्रंप!

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ट्रंप के नए बोर्ड को गाजा में इजरायल-हमास संघर्ष को खत्म करने का अहम जरिया माना जा रहा था. लेकिन अब ये साफ हो गया है कि ट्रंप का इरादा बहुत बड़ा है. ऐसा लग रहा है कि ट्रंप इस बोर्ड के जरिए संयुक्त राष्ट्र की अहमियत कम करना चाहते हैं. वो एक ऐसी नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाना चाहते हैं जिसमें अमेरिका की भूमिका सबसे ऊपर हो.

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दूसरे विश्व युद्ध के बाद से दुनिया जिस अंतरराष्ट्रीय नियम-कायदों (जैसे UN सुरक्षा परिषद) से चल रही थी. अब ट्रंप उसे बदलने या उसके समानांतर एक नया सिस्टम खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए चुनौती!

ट्रंप की इस महत्वाकांक्षा को देखते हुए यूरोप और अमेरिका के कई पुराने साथी देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने से मना कर दिया है. इन देशों को शक है कि ट्रंप का ये नया बोर्ड भविष्य में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है और वैश्विक संतुलन को बिगाड़ सकता है.

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