डोनाल्ड ट्रंप के वफादार काश पटेल बने FBI के डायरेक्टर, सीनेट से मिली मंजूरी

ट्रंप के कट्टर समर्थक काश पटेल की नियुक्ति के लिए अमेरिकी सीनेट ने 51-49 के मतों से मंजूरी दी. इस दौरान दो रिपब्लिकन- मेन की सीनेटर सुसान कॉलिंस और अलास्का की सीनेटर लिसा मर्कोवस्की ने सभी डेमोक्रेट सांसदों के साथ इस नियुक्ति का विरोध किया.

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काश पटेल (फोटो-AP) काश पटेल (फोटो-AP)

aajtak.in

  • वॉशिंगटन ,
  • 21 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 2:46 AM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भरोसेमंद और भारतीय मूल के काश पटेल को फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) के नए निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है. इस नियुक्ति को अमेरिका की शीर्ष जांच एजेंसी की नेतृत्व संरचना में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.

ट्रंप के कट्टर समर्थक काश पटेल की नियुक्ति के लिए अमेरिकी सीनेट ने 51-49 के मतों से मंजूरी दी. इस दौरान दो रिपब्लिकन- मेन की सीनेटर सुसान कॉलिंस और अलास्का की सीनेटर लिसा मर्कोवस्की ने सभी डेमोक्रेट सांसदों के साथ इस नियुक्ति का विरोध किया.

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सीनेट में अपनी पुष्टि सुनवाई के दौरान काश पटेल ने एफबीआई के राजनीतिकरण और प्रतिशोधी कार्रवाई से इनकार किया. उन्होंने डेमोक्रेट्स पर उनके पुराने बयानों के अंशों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया और कहा कि अधूरी जानकारी अक्सर भ्रामक होती है.

एफबीआई में हुए बड़े बदलाव 

बता दें कि काश पटेल ऐसे समय में एफबीआई का नेतृत्व संभाल रहे हैं जब न्याय विभाग में व्यापक बदलाव हो रहे हैं. ट्रंप समर्थक अधिकारियों द्वारा न्याय विभाग की प्राथमिकताओं को नया रूप देने के प्रयास के कारण उनकी नियुक्ति पर कई आलोचकों ने सवाल उठाए हैं. सीनेटर कॉलिंस और मर्कोवस्की ने अपनी असहमति जताते हुए कहा कि काश पटेल एफबीआई को कानून प्रवर्तन सिद्धांतों की बजाय राजनीतिक निष्ठा के आधार पर संचालित कर सकते हैं.

ट्रंप प्रशासन में न्याय विभाग में फेरबदल

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डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद न्याय विभाग में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप प्रशासन के पहले महीने में ही 75 सीनियर एडवोकेट और एफबीआई अधिकारी या तो इस्तीफा दे चुके हैं, या हटा दिए गए हैं या फिर उनका तबादला कर दिया गया है. इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला भी बंद कर दिया है, जिन्होंने ट्रंप के साथ प्रवास नीति पर सहमति जताई थी.

ट्रंप पर बदले की कार्रवाई का आरोप

ट्रंप और उनके सहयोगियों पर आरोप है कि वे न्याय विभाग की स्वतंत्रता को कमजोर कर रहे हैं, ताकि उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाइयों को रोका जा सके. वाशिंगटन स्थित एथिक्स ग्रुप 'सिटिजन्स फॉर रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड एथिक्स' के अध्यक्ष और पूर्व संघीय अभियोजक नोआ बुकबाइंडर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन अपने पूर्व विरोधियों के खिलाफ बदले की कार्रवाई कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ट्रंप ने हमेशा न्याय विभाग और एफबीआई को संदेह की नजर से देखा है, खासतौर पर 2016 के चुनावों और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच के चलते. अब उनके प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह न्याय विभाग की नीतियों को अपने अनुसार ढालना चाहते हैं.

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'खतरनाक अपराधियों पर होगा एक्शन'

न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारी चैड मिजेल ने कहा कि अब ये विभाग खतरनाक अपराधियों पर कार्रवाई करेगा, न कि राजनीतिक प्रतिशोध में शामिल होगा. हालांकि ट्रंप से जुड़े मामलों पर काम कर चुके अभियोजकों ने बार-बार कहा है कि उनके निर्णय पूरी तरह निष्पक्ष और कानूनी प्रक्रिया पर आधारित थे.

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