'मैंने रोका ईरान का परमाणु बम, वरना तबाह हो जाता इजरायल और मिडिल ईस्ट', ट्रंप का बड़ा दावा

ट्रंप का दावा है कि अगर उन्होंने ईरान को परमाणु बम बनाने से नहीं रोका होता, तो आज इजरायल और पूरा मिडिल ईस्ट वजूद में नहीं होता. लेकिन क्या सच में ऐसा है? आइए जानते हैं कि अमेरिकी रिपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की जांच इस मामले में क्या कहती है.

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ट्रंप ने बार-बार ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ US मिलिट्री कैंपेन को सफल बताया है. (Photo: Reuters) ट्रंप ने बार-बार ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ US मिलिट्री कैंपेन को सफल बताया है. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:09 AM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि अगर उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार बनाने से नहीं रोका होता, तो आज इजरायल ही नहीं, पूरा मिडिल ईस्ट दुनिया के नक्शे पर मौजूद नहीं होता. ट्रंप ने यह बात अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखी. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ईरान पर फिर से सैन्य कार्रवाई करने के विकल्प पर विचार कर रहा है. 

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ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा, "अगर मैंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से नहीं रोका होता, तो आज इजरायल और वास्तव में पूरा मिडिल ईस्ट मौजूद नहीं होता. कोई इस बारे में बोलना नहीं चाहता, लेकिन हर कोई जानता है कि यह सच है." ट्रंप लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपनी सरकार की बड़ी चिंता बताते रहे हैं. उनका दावा है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर किया है.

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ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले, कितना हुआ असर?

अमेरिका और इजरायल ने 2025 और 2026 में ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए थे. इन हमलों का एक मुख्य मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना बताया गया था. हालांकि, इन हमलों से ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता कितनी प्रभावित हुई, यह अभी साफ नहीं है.

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अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस की अक्टूबर में आई रिपोर्ट में भी कहा गया कि हमलों का असर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पहले के आकलनों में ईरान के परमाणु बम बनाने की कोशिश करने की पुष्टि नहीं हुई थी.

60 फीसदी तक यूरेनियम संवर्धन का दावा

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता की एक बड़ी वजह उसका यूरेनियम संवर्धन है. रॉयटर्स की अक्टूबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का मानना है कि ईरान के पास 60 फीसदी तक संवर्धित यूरेनियम का 200 किलो से ज्यादा भंडार हो सकता है. इसे इस्फहान में जमीन के नीचे बनी सुरंगों में रखे जाने की आशंका है.

परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले यूरेनियम का स्तर आमतौर पर करीब 90 फीसदी माना जाता है. 60 फीसदी संवर्धित यूरेनियम उस स्तर से कम है, लेकिन इसे आगे और संवर्धित किया जा सकता है. हमलों के बाद IAEA यह भी पूरी तरह पता नहीं लगा पाया है कि ईरान का संवर्धित यूरेनियम और सेंट्रीफ्यूज कहां-कहां मौजूद हैं.

ईरान ने परमाणु हथियार बनाने से किया इनकार

वहीं, ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कामों के लिए है. वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश से इनकार करता है. अमेरिकी आकलन का हवाला देते हुए कांग्रेस की रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान ने 2003 में अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम रोक दिया था. इसके दोबारा शुरू होने का कोई पक्का सबूत नहीं मिला है.

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ऐसे में ट्रंप का यह कहना कि उन्होंने ईरान को परमाणु बम बनाने से रोक दिया, उनका अपना दावा है. इसे अब तक IAEA या अमेरिकी खुफिया आकलनों से पक्की पुष्टि नहीं मिली है.

ईरान पर फिर हमले की तैयारी?

इस बीच ट्रंप ने गुरुवार को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर बैठक की. अमेरिकी सेंट्रल कमांड भी हमलों की नई लहर के लिए तैयारी बढ़ा रहा है. हालांकि, अमेरिका ने अभी बड़े सैन्य अभियान को दोबारा शुरू करने का कोई औपचारिक आदेश नहीं दिया है. व्हाइट हाउस में बुधवार और गुरुवार को ईरान को लेकर अहम बैठकें हुईं. ट्रंप ने ओवल ऑफिस में मीडिया से कहा कि अमेरिका जल्द फैसला करेगा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर और हमले किए जाएं या नहीं.
 

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