बांग्लादेश के युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है. उनके बड़े भाई उमर हादी ने आरोप लगाया है कि इस हत्या के पीछे बीएनपी सरकार के कुछ सदस्यों, विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी और पूर्व अंतरिम सरकार के सलाहकारों का हाथ था.
उस्मान हादी बांग्लादेश में साल 2024 में हुए हिंसक छात्र आंदोलन के एक प्रमुख चेहरे थे. इसी आंदोलन की वजह से तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा था.
उस्मान हादी भारत और शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के कड़े आलोचक थे. उन्होंने 'इंकलाब मंच' नाम का संगठन बनाया था. पिछले साल 12 दिसंबर को जब वो निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर संसदीय चुनाव के प्रचार में जुटे थे, तब नकाबपोश बंदूकधारियों ने ढाका में उनके सिर में गोली मार दी थी.
BNP और जमात-ए-इस्लामी पर हत्या की साजिश का आरोप
गोली लगने के छह दिन बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उस्मान हादी की मौत हो गई थी. अब उमर हादी ने दावा किया है कि बीएनपी नेताओं, जमात-ए-इस्लामी और पूर्व अंतरिम सरकार के सलाहकारों ने मिलकर उनके भाई हादी की हत्या की साजिश रची थी.
ब्रिटेन में बांग्लादेश के राजनयिक उमर हादी ने मंगलवार रात फेसबुक पर दो पोस्ट शेयर किए. उन्होंने लिखा, 'जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख (अमीर-ए-जमात) शफीकुर रहमान के एक निजी सचिव ने शहीद ओसमान हादी की हत्या की जमीन तैयार की थी. इसके अलावा, पिछली अंतरिम सरकार के कुछ सलाहकार (मंत्री) और मौजूदा बीएनपी सरकार के सांसद और मंत्री सीधे तौर पर इस हत्या में शामिल थे.'
उमर हादी ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से अपील करते हुए लिखा कि वो इस हत्या में शामिल सभी लोगों को कानून के कटघरे में लाएं. उन्होंने प्रधानमंत्री को चेतावनी भी दी कि अगर कातिलों को नहीं पकड़ा गया, तो वो उन्हें भी मार देंगे.
पश्चिम बंगाल से पकड़े गए थे आरोपी
इस मामले में पुलिस ने 7 और 8 मार्च की दरमियानी रात भारत के पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती शहर बनगांव (उत्तर 24 परगना जिला) से दो बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया. पकड़े गए आरोपियों की पहचान राहुल उर्फ फैसल करीम मसूद (37) और आलमगीर हुसैन (34) के रूप में हुई थी.
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उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में भारी हिंसा भड़क गई थी. उनके समर्थकों ने अखबारों के दफ्तरों और कल्चरल ग्रुप्स पर हमले किए थे. वहीं मैमनसिंह में एक हिंदू फैक्ट्री मजदूर की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. इस बढ़ते तनाव की वजह से मोहम्मद युनूस के तत्कालीन गृह मामलों के सलाहकार और पूर्व पुलिस प्रमुख खुदा बख्श चौधरी को इस्तीफा देना पड़ा था.
इसके बाद फरवरी 2026 में हुए आम चुनावों में तारिक रहमान की बीएनपी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की और अंतरिम सरकार की जगह ली.
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