'जबतक शेख हसीना जिंदा हैं, शांति से नहीं रहने देंगी', गारमेंट मजदूरों के प्रोटेस्ट पर बांग्लादेश सरकार का बड़ा आरोप

बांग्लादेश में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर गारमेंट फैक्ट्री के कर्मचारियों का प्रदर्शन चौथे दिन भी हिंसक रहा. अब तक करीब 1000 फैक्ट्रियों में कामकाज ठप हो चुका है. सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और अवामी लीग के समर्थकों पर मजदूरों के आंदोलन को भड़काने का आरोप लगाया है. हालात काबू करने के लिए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं.

Advertisement
बांग्लादेश में मजदूरों का प्रदर्शन (Photo: Reuters) बांग्लादेश में मजदूरों का प्रदर्शन (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:11 PM IST

"मुझे नहीं लगता कि शेख हसीना जबतक जीवित हैं तब तक हमारी सरकार को शांति से रहने देंगी. जब तक हसीना जीवित रहेंगी, तोड़फोड़ की घटनाएं जारी रह सकती हैं." ये बयान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सूचना मामलों के सलाहकार ज़ाहदुर रहमान का है. उन्होंने बांग्लादेश के गारमेंट मजदूरों की ओर से किए जा रहे प्रदर्शन के पीछे शेख हसीना का हाथ बताया. ज़ाहदुर रहमान ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि जब तक हसीना जीवित हैं, वह सरकार को शांतिपूर्वक काम करने देंगी. 

Advertisement

वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर गारमेंट मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी रहा, जिसके कारण सैकड़ों फैक्ट्रियों को अपना कामकाज रोकना पड़ा और प्रशासन को अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ी. 

बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) के अनुसार नई हिंसा के चलते 300 और फैक्ट्रियां बंद हो गईं. 31 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शनों का नया दौर शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 1,000 फैक्ट्रियों में कामकाज आंशिक और पूर्ण रूप से ठप है.

गारमेंट मंजदूरों का प्रदर्शन ढाका और उसके औद्योगिक बाहरी इलाकों जैसे गाजीपुर, आशुलिया, मीरपुर, नारायणगंज और मयमनसिंह जिले तक फैल गई है. यहां मजदूर पुलिस से भिड़ रहे हैं, सड़कें जाम कर रहे हैं और उत्पादन कार्य में बाधा डाल रहे हैं.

 ये मजदूर  30,000 टका (लगभग 23,000 भारतीय रुपये) के न्यूनतम मासिक वेतन की मांग कर रहे हैं. यह मौजूदा 12,500 टका (लगभग 9,507 भारतीय रुपये) के वेतन से दोगुने से भी अधिक है. 

Advertisement

 मजदूरों का कहना है कि भोजन, आवास, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती कीमतों ने उनकी क्रय शक्ति को काफी कम कर दिया है. 

गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने सोमवार को यह भी आरोप लगाया कि अवामी लीग से जुड़े कुछ गारमेंट फैक्ट्री मालिक अशांति को बढ़ावा दे रहे हैं.

मंत्री ने दावा किया कि हिंसा के पीछे हसीना के समर्थक हैं. वहीं प्रधानमंत्री तारिक रहमान के श्रम और रोजगार सलाहकार महदी अमीन ने कहा कि सरकार को इस बात के सबूत मिले हैं कि श्रमिकों के आंदोलन में "भगोड़ी बुरी ताकतों" ने घुसपैठ की है.

अमीन ने कहा कि इसमें शामिल लोगों को बेनकाब किया जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं, जब जुलाई में ही गृह मंत्री ने दावा किया था कि अवामी लीग "राजनीतिक रूप से खत्म" हो चुकी है और वह कभी भी बांग्लादेश की राजनीति में वापस नहीं आ पाएगी.

ये विरोध-प्रदर्शन बांग्लादेश के रेडीमेड गारमेंट उद्योग के लिए एक बहुत ही नाजुक समय पर हो रहे हैं. इस उद्योग में लगभग 40 लाख श्रमिक काम करते हैं और देश की कुल निर्यात कमाई का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा यहीं से आता है.

चीन के बाद बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गारमेंट निर्यातक है, जो H&M, ज़ारा (Zara) और गैप (Gap) जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों को कपड़े सप्लाई करता है.

Advertisement

निर्माताओं ने चेतावनी दी है कि वसंत और गर्मियों के ऑर्डर के लिए पीक प्रोडक्शन सीजन के दौरान लंबे समय तक काम में रुकावट आने से शिपमेंट में देरी हो सकती है, विदेशी खरीदारों का भरोसा डगमगा सकता है और ऑर्डर रद्द भी हो सकते हैं.

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने इस अशांति के सिलसिले में 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है. उन्होंने यह भी कहा कि इनमें से लगभग 50 लोग अवामी लीग की राजनीति से जुड़े हुए हैं. 
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »