अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार आठवें दिन भी जारी रहे. मंगलवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं. पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. प्रदर्शनकारी पिछले कई दिनों से पुलिस पर पत्थर, आग के गोले, पटाखे और अन्य चीजें फेंक रहे हैं. जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज करने के साथ आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया.
प्रदर्शन में हाईस्कूल और विश्वविद्यालयों के छात्र भी शामिल हो गए हैं. वे ट्यूशन फीस कम करने, शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. यह आंदोलन अब बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शन में बदल गया है. प्रदर्शनकारी सोशलिस्ट पार्टी के प्रधानमंत्री एदी रामा से इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं.
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अल्बानिया में महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतों, स्कूलों की खराब हालत, सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट और आवास संकट को लेकर भी असंतोष बढ़ रहा है. यूरोप के कई दूसरे देशों, जैसे फ्रांस और इटली में भी इन मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. स्पेन और पुर्तगाल में लोग महंगे मकानों के खिलाफ तंबू लगाकर प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं, ग्रीस में भी मंगलवार शाम और बुधवार को रैली और प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी.
पर्यटन परियोजना को लेकर भी विरोध
अल्बानिया में मौजूदा प्रदर्शनों से पहले कई महीनों तक रैलियां होती रही हैं. इनका आयोजन तथाकथित ‘फ्लेमिंगो मूवमेंट’ ने किया था. यह आंदोलन देश के दक्षिणी तट पर लग्जरी पर्यटन परियोजना के विरोध में शुरू हुआ था. इस परियोजना को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर की ओर से स्थापित एक निवेश कंपनी से जोड़ा जाता है.
प्रधानमंत्री ने हिंसा पर उठाए सवाल
प्रधानमंत्री एदी रामा ने मंगलवार को शिक्षकों और तिराना के स्कूलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद प्रदर्शनकारियों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पत्थरबाजी और हिंसा के जरिए सरकार गिराने या सत्ता में बैठे लोगों को हटाने की कोशिश को किसी भी हाल में अनुमति नहीं दी जाएगी.
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रामा ने कहा कि प्रदर्शन में लोगों की वास्तविक समस्याओं का इस्तेमाल हिंसा फैलाने वाले लोग अपने मकसद के लिए कर रहे हैं. उन्होंने महंगाई, सुरक्षित भविष्य, घर और आगे बढ़ने के बेहतर अवसरों से जुड़ी चिंताओं को जायज बताया, लेकिन कहा कि इन्हीं मुद्दों की आड़ में हिंसा हो रही है. प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी शहर में डर का माहौल बना रहे हैं. उन्होंने प्रदर्शन में शामिल छात्रों को उभरते राजनीतिक चरमपंथी समूहों से जुड़ा बताया.
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