अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान करते हुए कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि जो भी देश ईरान को आर्थिक मदद या किसी तरह की राहत देगा, उसे भी गंभीर आर्थिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा. ट्रंप ने इस अभियान को “Economic D-Day” बताते हुए ईरान को अलग-थलग करने की बात कही. ट्रंप की इस चेतावनी पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तीखा पलटवार किया है.
अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह Economic D-Day अमेरिका के अपने आर्थिक संकट से ध्यान भटकाने की कोशिश है. अराघची ने अमेरिका की नीति को आर्थिक आतंकवाद बताया और कहा कि इससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और देशों की संप्रभुता को खतरा है.
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अराघची ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए ट्रंप के दावों का जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका इस समय कर्ज और बढ़ती ब्याज लागत से जूझ रहा है. उन्होंने कहा कि असफल नीतियों को दोहराने से अमेरिका को आगे भी नुकसान झेलना पड़ेगा. उसे ईरानी जनता की नाराजगी का भी सामना करना पड़ेगा. अराघची ने अपने दावे के समर्थन में द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट भी साझा की, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज के 40 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की बात कही गई है.
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ क्या ऐलान किया?
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान को समझौते का सबसे बड़ा मौका अमेरिका ने दिया, लेकिन उसे गंवा दिया गया. इसके बाद उन्होंने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव की घोषणा की. ट्रंप के मुताबिक, इसका मकसद ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना और उसकी परमाणु क्षमता को रोकना है.
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दावा ठोकते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान की नौसेना खत्म हो चुकी है, उसकी वायुसेना नष्ट हो गई है और सैन्य कारखाने तबाह हो चुके हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की मुद्रा कमजोर हो चुकी है और देश बेहद गंभीर स्थिति में है. हालांकि, ये राष्ट्रपति ट्रंप के अपने दावे हैं.
किन गतिविधियों पर रोक की चेतावनी?
ट्रंप ने तेल की तस्करी, स्वैप लाइनों, नकद ट्रांसफर, एक्सचेंज हाउस, जहाजों की रजिस्ट्रियों और ईरान से जुड़ी फ्रंट कंपनियों पर रोक लगाने की बात कही है. उन्होंने अमेरिकी सहयोगियों से ईरान को अलग करने की अपील की और कहा कि ईरान को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा.
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