पश्चिम बंगाल के एक गांव में इस बार दिवाली कुछ अलग होने वाली है. यहां रहने वाले परिवारों ने अब तक अंधेरे में ही अपनी जिंदगी गुजारी है. आजादी के बाद पहली बार गांव तक बिजली पहुंची है. हुगली जिले के चकदह गांव में करीब 400 आदिवासी परिवार रहते हैं. बिजली आने से इन परिवारों में खुशी है. लंबे इंतजार के बाद अब उनके घर भी रोशन होने वाले हैं.
यह गांव तारकेश्वर विधानसभा क्षेत्र की अष्टारदत्तापुर ग्राम पंचायत में आता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में बिजली के खंभे कई साल पहले लगा दिए गए थे, लेकिन उन पर तार नहीं बिछाए गए. इस वजह से बिजली के खंभे खड़े रहे, मगर घरों तक बिजली नहीं पहुंच सकी. अब पहली बार गांव में बिजली कनेक्शन मिलने का रास्ता खुला है.
बच्चों की पढ़ाई में आती थी परेशानी
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, गांव की रहने वाली रूई बारी ने बताया कि आजादी के बाद से यहां बिजली नहीं थी. करीब 400 परिवार बिना बिजली के रह रहे थे. इससे सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को होती थी. रात में पढ़ाई करना मुश्किल था. अब गांव में बिजली पहुंचने से लोगों को उम्मीद है कि बच्चों की पढ़ाई पहले से आसान होगी.
स्थानीय निवासी महादेव ने भी इस मौके पर खुशी जताई. गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ बिजली मिलने की बात नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही परेशानी से राहत की शुरुआत है.
चुनाव में किया था बिजली पहुंचाने का वादा
बीजेपी विधायक संतू पान ने बताया कि गांव में बिजली के खंभे कुछ साल पहले लगाए गए थे, लेकिन उनमें तार नहीं बिछाए गए. उनका आरोप है कि गांव के लोग 1997-98 से बीजेपी को वोट देते आ रहे हैं. इसी वजह से पिछली टीएमसी सरकार ने गांव में बिजली नहीं पहुंचाई. उन्होंने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने गांव में बिजली पहुंचाने का वादा किया था. साथ ही, जीतने के बाद इसे अपना पहला काम बनाने की बात कही थी. संतू पान के मुताबिक, करीब एक महीने पहले जिला बिजली विभाग ने गांव में मीटर लगाने का काम शुरू किया.
50 घरों में लगाए गए मीटर बॉक्स
रिपोर्ट के मुताबिक, संतू पान ने बताया कि गांव के 100 से ज्यादा घरों को बिजली कनेक्शन दिया जा रहा है. इनमें से 50 घरों में नए मीटर बॉक्स लगाए जा चुके हैं. उन्होंने यह भी कहा कि गरीबी रेखा से नीचे यानी BPL श्रेणी में आने वाले परिवारों को बिजली मुफ्त मिलेगी.
चकदह एक आदिवासी गांव है. यहां रहने वाले सभी परिवार अनुसूचित जनजाति यानी ST वर्ग से आते हैं. गांव के लोग खेती से जुड़े हैं. आजादी के बाद पहली बार बिजली पहुंचने से उनके लिए दिवाली की खुशी बढ़ गई है. अब उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में उनके घर भी रोशनी से भर जाएंगे.
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