'पंडालों के पास न बिके नॉनवेज...', पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा को लेकर VHP की नई गाइडलाइन

VHP ने बंगाल में दुर्गा पूजा आयोजकों से पंडालों में मांसाहारी भोजन की बिक्री और सेवन से बचने की अपील की है. संगठन ने कहा कि वह मांसाहारी भोजन पर पूरी तरह रोक की मांग नहीं कर रहा, लेकिन पंडाल के बाहर तय जगह पर ही इसकी बिक्री होनी चाहिए.

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VHP की दुर्गा पूजा को लेकर गाइडलाइन, पंडालों में नॉन-वेज खाने की बिक्री और सेवन से बचने की अपील.(File Photo- ITG) VHP की दुर्गा पूजा को लेकर गाइडलाइन, पंडालों में नॉन-वेज खाने की बिक्री और सेवन से बचने की अपील.(File Photo- ITG)

अनिर्बन सिन्हा रॉय

  • कोलकाता,
  • 29 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:37 AM IST

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं. VHP नेताओं ने दुर्गा पूजा आयोजकों से पूजा पंडालों में मांसाहारी भोजन नहीं रखने और पारंपरिक शैली में लौटने की अपील की है. संगठन ने साफ किया कि वह बंगाल में त्योहार के दौरान मांसाहारी भोजन पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग नहीं कर रहा है, लेकिन पंडालों के पास मांसाहारी भोजन की बिक्री या सेवन नहीं होना चाहिए.

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VHP का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मां दुर्गा की मूर्ति का मांसाहारी भोजन से किसी तरह का संपर्क न हो. संगठन ने कहा कि पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन पूरी तरह बंद करने की बात नहीं कही जा रही है, क्योंकि बंगाल में दुर्गा पूजा कभी भी पूरी तरह शाकाहारी नहीं रही है. हालांकि, मां दुर्गा की मूर्ति की पवित्रता बनाए रखना जरूरी है.

संगठन की RSS से जुड़े केंद्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य निर्गुणानंद ने कहा कि सनातनियों का कर्तव्य है कि वे मूर्ति की पवित्रता की रक्षा करें और पंडाल के अंदर और आसपास पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखें. उन्होंने कहा कि अगर मांसाहारी भोजन बेचना जरूरी हो, तो इसे पूजा पंडाल से बाहर किसी तय स्थान पर किया जाना चाहिए, ताकि खाने का कचरा पंडाल के आसपास न पहुंचे.

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संगठन करेगा हस्तक्षेप

VHP ने यह भी संकेत दिया है कि अगर पूजा समितियां मूर्ति की पवित्रता बनाए रखने के लिए कदम नहीं उठाती हैं, तो संगठन को हस्तक्षेप करना पड़ेगा. धर्म व्यक्तिगत है, लेकिन त्योहार सभी के लिए हैं नारे पर आपत्ति जताते हुए VHP नेता ने कहा कि हिंदू संस्कृति, भावनाओं और आध्यात्मिकता का पालन सनातनियों को ही करना है. उन्होंने कहा कि दूसरे धर्मों के लोग पूजा पंडालों में आने के लिए निश्चित रूप से स्वागत योग्य हैं, लेकिन हिंदू धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने की जिम्मेदारी केवल हिंदुओं की है.

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