अभिषेक पर हमला करने वाले पूर्व TMC विधायक के करीबी, बीजेपी का दावा

TMC नेता अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले में एक बड़ा खुलासा हुआ है. बीजेपी सूत्रों का दावा है कि गिरफ्तार किए गए लोग पूर्व टीएमसी विधायक लवली मैत्रा के करीबी सहयोगी हैं. वहीं, बीजेपी ने ममता बनर्जी पर बिना गंभीर चोट के भी भतीजे को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है.

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सोनारपुर में हमले के बाद सुरक्षा घेरे में निकले टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी (Photo: PTI) सोनारपुर में हमले के बाद सुरक्षा घेरे में निकले टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी (Photo: PTI)

तपस सेनगुप्ता

  • कोलकाता,
  • 31 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:02 PM IST

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में हुए हमले के मामले में नया मोड़ आ गया है. भाजपा सूत्रों के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार छहों लोग मात्र एक महीने पहले तक पूर्व TMC विधायक लवली मैत्रा के करीबी सहयोगी थे.

इस खुलासे ने सवालों का सिलसिला शुरू कर दिया है कि क्या ये हमला एक अलग घटना थी या तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी गुटबाजी का नतीजा है? क्या TMC में अंदरूनी लड़ाई अब खुलकर सड़क पर आ रही है?.

बीजेपी आईसेल के चीफ अमित मालवीय ने एक्स पर बताया कि अभिषेक बनर्जी पर हमले के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए छह लोग कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस की पूर्व विधायक लवली मैत्रा के करीबी सहयोगी थे, जो लगभग एक महीने पहले तक उनके साथ थे. इस खुलासे से सवालों के जवाब से कहीं ज़्यादा सवाल खड़े होते हैं.

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ममता ने अस्पताल में बनाया दवाब

दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रवक्ता देबजीत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक कथित ऑडियो क्लिप साझा करते हुए तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाया है कि उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट में कोई गंभीर चोट न होने के बावजूद डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी को जबरन कोलकाता के बेले व्यू (Belle Vue) नामक एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए उसके सीईओ (CEO) पर भारी दबाव बनाया और उन्हें सीधे तौर पर धमकाया. हालांकि, इस वायरल वीडियो और दावों की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस घटना के बाद से राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है.

सरकार ने कहा, 'ये राजनीतिक उद्देश्यों के लिए चिकित्सा संस्थानों का दुरुपयोग करने की एक चिंताजनक कोशिश है. अस्पताल चिकित्सा आवश्यकता के आधार पर रोगियों की सेवा के लिए मौजूद हैं, न कि राजनीतिक सुविधा के लिए.'

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि डॉक्टरों, प्रशासकों या स्वास्थ्य संस्थानों को डराने-धमकाने का कोई भी प्रयास सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करता है और लोकतांत्रिक मानदंडों का उल्लंघन करता है. हालांकि, टीएमसी की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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क्या है मामला

दरअसल, शनिवार दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में टीएमसी नेता  अभिषेक बनर्जी पोस्ट-पोल हिंसा के पीड़ितों से मिलने पहुंचे थे. इसी दौरान भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उनके खिलाफ 'चोर-चोर' के नारे लगाते हुए उन पर लात-घूंसों, पत्थरों और अंडों से हमला कर दिया था. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों की मदद से अभिषेक बनर्जी एक क्रिकेट हेलमेट पहनकर किसी तरह वहां से सुरक्षित निकले थे.

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