कौन हैं IAS अभय सिंह, जिन पर BJP के बागी नेता की शिकायत पर हो गया एकाएक एक्शन 

IAS Abhay Singh News: अवैध खनन की जांच के दौरान सीबीआई की छापेमारी से चर्चा में आए आईएएस अभय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं. गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक सीट पर चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में उनकी नियुक्ति पर बीजेपी के बागी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने सवाल उठाए थे. शिकायत में पुराने मामले का हवाला दिया गया. अब उनकी जगह आईएएस प्रकाश बिंदु को जिम्मेदारी सौंपी गई है.

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आईएएस अभय सिंह (File Photo) आईएएस अभय सिंह (File Photo)

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 27 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:15 AM IST

यूपी के प्रशासनिक गलियारों में आईएएस अभय सिंह का नाम एक बार फिर चर्चा में है. वजह है गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से उन्हें हटाया जाना. चुनाव आयोग का यह फैसला मतगणना से ठीक पहले आया था. उनकी जगह आईएएस प्रकाश बिंदु को जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस बीच अभय सिंह के पुराने रिकॉर्ड और 2019 में सामने आए अवैध खनन मामले की भी चर्चा हो रही है.

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अभय सिंह 2007 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. वह वर्तमान में राजस्व परिषद के सदस्य हैं. अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान वह बुलंदशहर और फतेहपुर जैसे जिलों में जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. अभय सिंह का नाम वर्ष 2019 में उस समय चर्चा में आया था, जब सीबीआई ने कथित अवैध खनन घोटाले की जांच के सिलसिले में उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर छापेमारी की थी. उस समय अभय सिंह बुलंदशहर के जिलाधिकारी थे. सीबीआई ने उनके आवास पर भी छापा मारा था, जहां से 47 लाख रुपये की नकदी बरामद होने की बात सामने आई थी.

क्या था अवैध खनन घोटाले का मामला?

यह मामला वर्ष 2012 से 2016 के बीच समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान हुए कथित अवैध खनन से जुड़ा था. सीबीआई ने इस मामले की जांच के दौरान लखनऊ, फतेहपुर, आजमगढ़, इलाहाबाद, नोएडा, गोरखपुर और देवरिया समेत कई स्थानों पर छापेमारी की थी. इस जांच के दौरान जिन आईएएस अधिकारियों के आवास पर छापेमारी हुई थी, उनमें बी. चंद्रकला, विवेक और अभय सिंह के नाम शामिल थे. उस समय अभय सिंह पर आरोप लगा था कि फतेहपुर के जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने खनन पट्टों के आवंटन में कथित गड़बड़ी की थी. बुलंदशहर के जिलाधिकारी के रूप में तैनाती के दौरान उनके आवास पर हुई छापेमारी और नकदी बरामद होने की खबर ने भी इस मामले को चर्चा में ला दिया था.

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बीजेपी के बागी एमएलसी ने क्यों की शिकायत?

गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक सीट पर अभय सिंह को चुनाव पर्यवेक्षक बनाए जाने के बाद बीजेपी के बागी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने उनकी नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर अभय सिंह को इस जिम्मेदारी से हटाने की मांग की थी. देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी शिकायत में पुराने अवैध खनन मामले का हवाला दिया और चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अभय सिंह को पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से हटाने का अनुरोध किया. उनकी शिकायत का मुख्य आधार वर्ष 2019 में सामने आया वही मामला था, जिसमें सीबीआई ने कथित अवैध खनन की जांच के दौरान अभय सिंह के आवास पर छापेमारी की थी.

चुनाव आयोग ने हटाया, प्रकाश बिंदु को मिली जिम्मेदारी

चुनाव आयोग ने अभय सिंह को गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक सीट पर चुनाव पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से हटा दिया है. उनकी जगह 2009 बैच के आईएएस अधिकारी प्रकाश बिंदु को नियुक्त किया गया है. इस घटनाक्रम के बाद अभय सिंह की नियुक्ति को लेकर उठाए गए सवाल और वर्ष 2019 के खनन मामले का संदर्भ फिर चर्चा में है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निर्णायक रूप से नहीं कहा जा सकता कि चुनाव आयोग ने केवल देवेंद्र प्रताप सिंह की शिकायत के कारण ही यह फैसला लिया. फिलहाल इस पूरे मामले के तीन प्रमुख पहलू हैं आईएएस अभय सिंह का प्रशासनिक कार्यकाल, कथित अवैध खनन मामले में वर्ष 2019 की सीबीआई छापेमारी और चुनाव पर्यवेक्षक की नियुक्ति को लेकर देवेंद्र प्रताप सिंह की शिकायत.

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