उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए दालमंडी से होकर बनाए जा रहे सुगम मार्ग के चौड़ीकरण का काम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है. करीब एक साल पहले शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के तहत दालमंडी इलाके में ध्वस्तीकरण का काम लगभग पूरा हो गया है. सोमवार को पांच और भवनों पर बुलडोजर चलाया गया. इसके साथ ही चौड़ीकरण की जद में आए भवनों को हटाने का काम पूरा होने की बात पीडब्ल्यूडी ने कही है.
दालमंडी में चल रहा यह प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते को पहले के मुकाबले काफी चौड़ा करने के लिए शुरू किया गया था. पीडब्ल्यूडी की ओर से करीब सवा 200 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत दालमंडी इलाके में कुल 187 भवन चौड़ीकरण की जद में आए थे. इन भवनों में छह मस्जिदें भी शामिल थीं.
अब तक 170 से ज्यादा भवनों को जमींदोज किया जा चुका है. पीडब्ल्यूडी के मुताबिक करीब 172 से 173 मकान पूरी तरह डिस्मेंटल किए जा चुके हैं. बचे हुए भवनों पर भी आधे से ज्यादा काम पूरा हो गया था. सोमवार को अंतिम चरण में पांच भवनों को गिराया गया. इसके साथ ही इस प्रोजेक्ट के तहत भवनों को हटाने का काम पूरा हो गया. दालमंडी का इलाका लंबे समय से संकरी गलियों और घनी आबादी के लिए जाना जाता है. इसी इलाके से होकर काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते को चौड़ा किया जा रहा है. प्रोजेक्ट के तहत करीब 60 फीट चौड़ी और साढ़े 600 मीटर लंबी सड़क तैयार की जानी है.
गलियों के जाल से निकलेगा 60 फीट चौड़ा रास्ता
इस चौड़ी सड़क के तैयार होने के बाद मंदिर तक पहुंचने का रास्ता मौजूदा संकरी गलियों के मुकाबले काफी सुगम हो जाएगा. फिलहाल इस पूरे इलाके में चौड़ीकरण की जद में आए भवनों को हटाने का काम लगभग पूरा किया जा चुका है. अब आगे का काम सड़क और उससे जुड़ी सुविधाओं को तैयार करने पर केंद्रित होगा.
दालमंडी चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के तहत कुल 187 भवनों की पहचान की गई थी. इनमें छह मस्जिदें भी शामिल थीं. प्रशासन ने मस्जिद कमेटी के सहयोग से इन मस्जिदों को भी चौड़ीकरण की जरूरत के अनुसार आंशिक या पूर्ण रूप से हटाया है. भवनों को हटाने का काम चरणबद्ध तरीके से किया गया. अब अंतिम चरण में पांच भवनों को भी डिस्मेंटल कर दिया गया. पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक इसके साथ ही डिमोलिशन का अंतिम चरण पूरा हो गया है.
पीडब्ल्यूडी के वाराणसी के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने बताया कि दालमंडी में डिस्मेंटलिंग का फाइनल चरण सोमवार को था. इस चरण में करीब पांच भवनों को डिस्मेंटल किया गया. उन्होंने बताया कि अब तक 172 से 173 मकान पूरी तरह डिस्मेंटल किए जा चुके हैं. बचे हुए भवनों पर भी आधे से ज्यादा काम पहले ही हो चुका था. केके सिंह के मुताबिक चौड़ीकरण की जद में आए भवनों के लिए अब तक 132 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा चुका है. भवनों को हटाने के लिए पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद ली गई.
भवनों को हटाने के बाद अब प्रोजेक्ट के अगले महत्वपूर्ण हिस्से पर काम चल रहा है. अधिकारियों के मुताबिक इलाके में वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम अभी जारी है. यह काम नवंबर महीने में पूरा होने की उम्मीद है. पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने बताया कि वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम पूरा होने के बाद करीब एक से डेढ़ महीने में प्रोजेक्ट को पूरा कर दिया जाएगा. इस हिसाब से दिसंबर के अंत तक काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए तैयार किया जा रहा सुगम मार्ग पूरा होने की उम्मीद है.
अब वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम
दालमंडी चौड़ीकरण का यह प्रोजेक्ट करीब एक साल तक चलने वाला था. अधिकारियों के मुताबिक इसे दिसंबर में पूरा करना बड़ी उपलब्धि होगी. इसके लिए भवनों के ध्वस्तीकरण के साथ-साथ सड़क से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं पर भी काम किया जा रहा है. केके सिंह ने बताया कि इस काम में प्रशासन का पूरा सहयोग मिला है. इसी सहयोग के चलते ध्वस्तीकरण के काम को अंतिम चरण तक पहुंचाया जा सका है. अब दालमंडी में भवनों को हटाने का काम खत्म हो चुका है और सड़क निर्माण से जुड़े बाकी काम को पूरा करने पर जोर है.
करीब एक साल पहले शुरू हुआ यह काम अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां दालमंडी में चौड़ीकरण की सबसे बड़ी बाधा यानी भवनों को हटाने का काम पूरा हो चुका है. 60 फीट चौड़ी और साढ़े 600 मीटर लंबी सड़क के तैयार होने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर जाने वाले रास्ते को नया स्वरूप मिलेगा. अधिकारियों की योजना के मुताबिक नवंबर में वाटर लाइन और सीवर लाइन का काम पूरा होगा और इसके बाद करीब एक से डेढ़ महीने में पूरा प्रोजेक्ट तैयार कर दिसंबर के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है.
रोशन जायसवाल