प्लास्टिक सर्जरी, ब्यूटी सिंडिकेट और 'फॉर्म-सी': उज्बेकिस्तान की लोला पकड़ी गई तो खुला लखनऊ पुलिस का पुराना खेल!

लखनऊ में उज्बेक महिला लोला की दोबारा गिरफ्तारी के बाद डॉक्टर विवेक गुप्ता को फिर हिरासत में लिया गया है. पहले क्लीनचिट पाने वाले डॉक्टर से पूछताछ ने पुलिस की पुरानी विवेचना पर सवाल खड़े कर दिए हैं. लोला पर बिना दस्तावेज रहने, अवैध नेटवर्क चलाने और नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है.

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लखनऊ में उज्बेक महिला लोला गिरफ्तार (Photo- ITG) लखनऊ में उज्बेक महिला लोला गिरफ्तार (Photo- ITG)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ ,
  • 14 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:54 AM IST

उज्बेकिस्तान की महिला लोला के मामले में लखनऊ पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं. जून 2025 में दर्ज एफआईआर में प्लास्टिक सर्जरी करने वाले डॉक्टर विवेक गुप्ता का नाम आरोपी के तौर पर शामिल था. आरोप था कि विदेशी नागरिक की सर्जरी की जानकारी स्थानीय पुलिस, प्रशासन या एफआरआरओ को नहीं दी गई. लेकिन विवेचना के दौरान डॉक्टर का नाम हटा दिया गया और उसे क्लीनचिट देते हुए चार्जशीट से बाहर कर दिया गया.

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अब लोला के दोबारा पकड़े जाने के बाद पुलिस ने डॉक्टर विवेक गुप्ता को फिर हिरासत में लिया है. पुलिस उससे पूछताछ कर रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विवेक गुप्ता को पहले ही क्लीनचिट दी जा चुकी थी, तो अब उससे दोबारा पूछताछ क्यों की जा रही है? इस कार्रवाई ने पिछली विवेचना और पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

करीब एक साल पहले पकड़ी गई उज्बेकिस्तान की होलिडा और नीलोफर ने भी पुलिस को बयान दिया था कि उनकी सर्जरी डॉक्टर विवेक गुप्ता ने की थी. आरोपियों के मुताबिक, सर्जरी के लिए डॉक्टर ने उनसे कोई दस्तावेज नहीं मांगा था. उन्होंने पुलिस को बताया था कि विवेक अहिमामऊ और पत्रकारपुरम में मिनर्वा क्लीनिक चलाते हैं. तत्कालीन डीसीपी निपुण अग्रवाल ने कहा था कि विवेक और उसके साथी त्रिजिन राज ने विदेशी महिलाओं को ओमेक्स आर-1 के फ्लैट नंबर 104 और 1103 में अवैध रूप से ठहराया था.

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जांच में यह भी सामने आया है कि लोला ने वर्ष 2023 में दिल्ली स्थित उज्बेकिस्तान दूतावास में उज्बेकिस्तान वापस जाने के लिए आवेदन किया था. उसे तीन महीने का समय दिया गया था, लेकिन समय पूरा होने के बाद भी वह वापस नहीं गई. पुलिस को आरोपी के मोबाइल फोन से कई विदेशी महिलाओं की तस्वीरें भी मिली हैं, जिन्हें कथित तौर पर ग्राहकों को भेजा जाता था. इससे पूरे नेटवर्क की गतिविधियों को लेकर जांच का दायरा बढ़ गया है.

नियमों के मुताबिक, किसी विदेशी नागरिक के किसी स्थान पर ठहरने या इलाज जैसी गतिविधियों की जानकारी संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाने के लिए फॉर्म-सी की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है. लोला की दोस्त उज्बेकिस्तान निवासी उमिदा मंगलवार को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल पहुंची थी. अस्पताल प्रबंधन ने फॉर्म-सी के जरिए पुलिस, खुफिया एजेंसी और एफआरआरओ को जानकारी दी. इसके बाद एफआरआरओ और पुलिस की टीम अस्पताल पहुंची, जहां उमिदा के साथ लोला भी मिली.

पूछताछ में लोला ने बताया कि वह ओमेक्स में ही रह रही थी और उसने भरत प्रताप नाम के व्यक्ति से शादी कर ली है. वहीं उमिदा मेडिकल वीजा पर भारत आई थी और उसे वापस भेज दिया गया है. अब लोला के मामले में डॉक्टर विवेक गुप्ता की दोबारा हिरासत और पूछताछ ने पुराने केस की विवेचना पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.

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