त्रिपुरा DGP मौत मामला: 'इतने मजबूत इरादों का अफसर खुदकुशी नहीं कर सकता', अंतिम संस्कार के बीच परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल

त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ की संदिग्ध मौत के बाद परिजनों ने आत्महत्या की आशंका को खारिज करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है. मूल रूप से बागपत निवासी अनुराग धनखड़ का बड़ौत में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया, जहां परिजनों ने मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की अपील की.

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त्रिपुरा के डीजीपी रहे अनुराग धनकड़ की मौत (Photo- ITG) त्रिपुरा के डीजीपी रहे अनुराग धनकड़ की मौत (Photo- ITG)

मनुदेव उपाध्याय

  • बागपत ,
  • 22 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:41 PM IST

त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ की मौत के बाद अब इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है. जहां शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या माना जा रहा है, वहीं उनके परिजनों और करीबियों ने इस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बड़े भाई उपेंद्र धनखड़ ने साफ कहा है कि इतने बड़े और मजबूत अधिकारी का आत्महत्या करना विश्वास से परे है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. यूपी के बागपत के मूल निवासी अनुराग धनखड़ का पार्थिव शरीर जब बड़ौत पहुंचा तो राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया, लेकिन अंतिम विदाई के बीच उनकी मौत को लेकर उठे सवाल चर्चा का सबसे बड़ा विषय बने रहे.

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दरअसल, त्रिपुरा के DGP अनुराग धनखड़ की मौत के बाद मामला अब केवल एक मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े होने लगे हैं. अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों, करीबी लोगों के बीच एक ही चर्चा रही- क्या वाकई यह आत्महत्या थी, या फिर इसके पीछे कोई और वजह है. सबसे बड़ा सवाल खुद अनुराग के फुफेरे भाई उपेंद्र धनखड़ ने उठाया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि "इतने बड़े पद तक पहुंचने वाला, मजबूत इरादों वाला अधिकारी आत्महत्या नहीं कर सकता. इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच होनी चाहिए." 

उपेंद्र ने कहा कि अनुराग धनखड़ ने अपने पूरे करियर में कई संवेदनशील और चर्चित मामलों की जांच की थी. देश के कई बड़े घोटालों में वे जांच अधिकारी रह चुके थे. ऐसे में उनकी अचानक हुई मौत को केवल आत्महत्या मान लेना जल्दबाजी होगी. परिवार चाहता है कि हर पहलू की निष्पक्ष जांच हो ताकि सच्चाई सामने आ सके. 

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करीबियों ने भी उठाए सवाल 

अनुराग धनखड़ को करीब से जानने वाले लोगों ने भी इस घटना पर सवाल खड़े किए. उनका कहना था कि जब किसी सिपाही की संदिग्ध मौत होती है तो पूरे पुलिस महकमे से जवाब मांगा जाता है. ऐसे में अगर राज्य का पुलिस प्रमुख ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का शिकार हो जाए तो मामले की गंभीर जांच होना स्वाभाविक है. कुछ लोगों ने यहां तक कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, यहां तक कि सेना (आर्मी) जैसी निष्पक्ष व्यवस्था से कराने पर भी विचार होना चाहिए, ताकि किसी तरह का संदेह न रहे.

आपको बता दें कि अनुराग धनखड़ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिहारीपुर गांव के निवासी थे. हालांकि, गांव में उनका परिवार अब नहीं रहता. उनके छोटे भाई रविराज बड़ौत कस्बे में रहते हैं. अनुराग का पार्थिव शरीर बड़ौत पहुंचा तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. बड़ौत में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अनुराग धनकड़ का अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री असीम अरुण, विधायक केपी मलिक, पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त एवं पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह, त्रिपुरा पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. पुलिस जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने वरिष्ठ अधिकारी को अंतिम सलामी दी. अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और माहौल बेहद भावुक रहा.

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