उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित नगर निगम वार्ड नंबर-2 में नगर निगम की लापरवाही से एक मकान मालिक को 22 करोड़ 17 लाख रुपये से अधिक का हाउस टैक्स नोटिस जारी कर दिया गया. पीड़ित फरहाद आलम और उनके पिता इश्तियाक अहमद को लगभग एक साल पहले बने 4 करोड़ रुपये के मकान के लिए यह टैक्स नोटिस मिला. नोटिस में 2 करोड़ 17 लाख रुपये से अधिक का पानी का बिल भी शामिल किया गया. भारी-भरकम रकम देखकर इश्तियाक अहमद की तबीयत बिगड़ गई. नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह गलती से सिस्टम पर चढ़ गया है जिसे ठीक कर दिया जाएगा.
4 करोड़ का मकान, 22 करोड़ का टैक्स बिल
फरहाद आलम गाड़ा के मुताबिक, उनका परिवार करीब एक साल पहले ही इस नए मकान में शिफ्ट हुआ है. मकान की कुल कीमत 4 करोड़ रुपये के आसपास है, लेकिन नगर निगम की ओर से जारी रसीद में 22 करोड़ 17 लाख 1288 रुपये का हाउस टैक्स दर्शाया गया है. इतनी बड़ी रकम का नोटिस देखकर पूरा परिवार सदमे में आ गया.
'जहाज से आ रहा पानी या आब-ए-जमजम?'
फरहाद ने तंज कसते हुए कहा कि उनके मकान में पानी की पाइपलाइन, सीवर या कोई कनेक्शन ही नहीं है. इसके बावजूद 2 करोड़ 17 लाख रुपये का वॉटर टैक्स भेज दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि नगर निगम यह बताए कि यह पानी जहाज या हेलीकॉप्टर से आ रहा है, या फिर सऊदी, दुबई या आब-ए-जमजम से आ रहा है.
जीआईएस सर्वे और पुरानी रंजिश का आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि यह नोटिस जीआईएस सर्वे के आधार पर जारी हुआ है. फरहाद के मुताबिक, एक साल पहले पीडीए पाठशाला चलाने पर उनके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ था. हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद ही शाम को यह 22 करोड़ का नोटिस उनके घर पहुंच गया. फरहाद ने बताया कि वह समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता हैं और इस मुद्दे को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे.
'सरकार 22 करोड़ में हमारा मकान ही रख ले'
हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे पीड़ित पिता इश्तियाक अहमद ने कहा कि करोड़ों का नोटिस देखकर उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेड रेस्ट पर चले गए हैं. उन्होंने कहा कि अगर नगर निगम 22 करोड़ का टैक्स वसूलना चाहता है तो सरकार उनका मकान ही रख ले और उन्हें उनके पैसे दे दे, ताकि वे कहीं और जाकर रह सकें.
अनिल कुमार भारद्वाज