रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ी राहत, 38 भवनों के ध्वस्तीकरण पर कमिश्नर ने लगाई रोक

कमिश्नर ने रामपुर के जिलाधिकारी (DM) और रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के उपाध्यक्ष को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक ध्वस्तीकरण संबंधी आदेश पर कोई कार्रवाई न की जाए.

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मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी (File Photo- ITG) मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी (File Photo- ITG)

समर्थ श्रीवास्तव

  • रामपुर,
  • 27 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:57 PM IST

उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ी राहत मिली है. यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने के रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी गई है.

मामले में 28 जुलाई को मुरादाबाद कमिश्नर कार्यालय में सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन शोक अवकाश के कारण हड़ताल रहने से सुनवाई नहीं हो सकी.

इसके बाद यूनिवर्सिटी की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र पर मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने अंतरिम राहत देते हुए ध्वस्तीकरण आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी.

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इस आदेश के बाद फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर बुलडोजर कार्रवाई टल गई है. अब मामले की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि विकास प्राधिकरण का ध्वस्तीकरण आदेश बरकरार रहेगा या उसमें कोई बदलाव किया जाएगा.

इससे पहले रामपुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान की पत्नी डॉक्टर तंजीन फातिमा मुलाकात के लिए जेल पहुंचीं. उनके साथ उनके बड़े बेटे अदीब आजम और सपा जिला अध्यक्ष अजय सागर मौजूद रहे. करीब एक घंटे की मुलाकात के बाद बाहर आईं.

अखिलेश यादव अभी तक क्यों नहीं आए?

आजम खान की पत्नी पत्रकारों से रूबरू हुई और उन्होंने बताया कि सपा मुखिया अखिलेश यादव का जल्दी ही रामपुर का कार्यक्रम है. वह जौहर यूनिवर्सिटी पर धरने पर बैठे छात्रों के समर्थन में रामपुर पहुंचेंगे.

आजम खान की पत्नी और पूर्व सांसद डॉ. तंजीन फातिमा ने कहा, "मुझसे मीडिया ने सवाल किया था कि आपकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी अभी तक रामपुर क्यों नहीं आए, जबकि वे दिल्ली में लगातार छात्रों के साथ बने हुए हैं? 

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इस पर मैंने जवाब दिया कि अखिलेश यादव जी रामपुर भी आएंगे. वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन में शामिल थे, छात्रों से बातचीत कर रहे थे और उनका समर्थन कर रहे थे. उसी तरह उन्होंने यहां भी अपना एक प्रतिनिधिमंडल भेजा है और आश्वासन दिया है कि वे जल्द ही बच्चों से मिलने आएंगे. लेकिन एक टीवी चैनल ने मुरादाबाद में इस बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया और कहा कि वे प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं. वैसे तो यह कोई गुनाह नहीं है और ज़ाहिर है कि हमारी तो यही ख्वाहिश होगी कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री बनें, लेकिन इस समय तो वे पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से आएंगे और हमारे बच्चों को संबोधित करेंगे. इसलिए मीडिया को बयान तोड़-मरोड़कर पेश नहीं करना चाहिए."

क्या समाजवादी पार्टी देर से जागी है?

जब उनसे पूछा गया कि क्या आजम खान के 'ड्रीम प्रोजेक्ट' को बचाने के लिए समाजवादी पार्टी देर से जागी है? इस पर डॉ. तंजीन फातिमा ने कहा, "नहीं, समाजवादी पार्टी हमेशा से जौहर यूनिवर्सिटी के समर्थन में रही है. समाजवादी पार्टी की नींव ही आदरणीय मुलायम सिंह यादव जी ने रखी थी, इसलिए पार्टी का इस विश्वविद्यालय से जुड़ाव होना स्वाभाविक है."

कोर्ट के आने वाले फैसले और उम्मीदों के सवाल पर उन्होंने कहा, "मुझे पूरी उम्मीद है. चूंकि हम सच्चाई के रास्ते पर हैं, इसलिए यकीनन कोर्ट का फैसला यूनिवर्सिटी के पक्ष में ही आएगा."

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पार्टी के पूर्व सांसद एसटी हसन के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि यूनिवर्सिटी के कागजात बनवाने का काम आजम खान का था, तो इसे बचाने की जिम्मेदारी भी आजम खान की है न कि अखिलेश यादव की; तंजीन फातिमा ने कहा, "यह उनका व्यक्तिगत बयान हो सकता है, इससे पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है. पार्टी के प्रतिनिधिमंडल में जितने भी सांसद आए थे, वे धरना स्थल पर गए थे, बच्चों के साथ बैठे थे और उन्होंने यूनिवर्सिटी को पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया है."

रामपुर के सांसद प्रतिनिधिमंडल से नदारद क्यों थे?

जब उनसे पूछा गया कि रामपुर में ही जौहर यूनिवर्सिटी स्थित है, फिर भी रामपुर के सांसद प्रतिनिधिमंडल से नदारद क्यों थे? इस पर उन्होंने कहा, "यह उनका अपना फैसला हो सकता है, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकती."

यह पूछे जाने पर कि यदि 28 तारीख को फैसला पक्ष में नहीं आता है, तो अगला कदम क्या होगा? उन्होंने कहा, "हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के रास्ते अभी खुले हैं."

छात्रों के धरने में शामिल होने के सवाल पर डॉ. तंजीन फातिमा ने कहा, "मैं उनका हाल-चाल जानने गई थी कि सब ठीक है या नहीं. मुझे पता चला था कि पुलिस कुछ छात्रों के माता-पिता को थाने ले गई है और छात्रों को फोन वगैरह कर रही है. इसलिए मैं उन्हें यह भरोसा दिलाने गई थी कि उनके साथ किसी तरह की जोर-जबरदस्ती नहीं होने दी जाएगी."

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जब उनसे सवाल किया गया कि आजम खान के कट्टर विरोधी भी अब जौहर यूनिवर्सिटी के समर्थन में आ गए हैं, तो क्या यह वास्तविक समर्थन है या वजह कुछ और है?

इस पर उन्होंने कहा, "इसमें कोई अंदरूनी बात नहीं है. वे देख रहे हैं कि पूरा देश यूनिवर्सिटी के समर्थन में खड़ा है, यहां तक कि देश के बाहर के लोग भी समर्थन कर रहे हैं. अब ऐसा वक्त है कि जो भी यूनिवर्सिटी का विरोध करेगा, उसे मुंह की खानी पड़ेगी."

कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा यूनिवर्सिटी न गिराने की अपील पर उन्होंने कहा, "छात्रों में एकजुटता है. प्रदर्शनकारी भी छात्र हैं और उन्होंने जंतर-मंतर से भी यूनिवर्सिटी के हक में आवाज उठाई थी."

छात्रों को रोके जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, "यह स्वाभाविक है कि पुलिस के जरिए दबाव बनवाया जाएगा और हर तरह से रोकने की कोशिश होगी, लेकिन हमारे बच्चे मजबूती से डटे हुए हैं."

आजम खान से मुलाकात और उनके किसी संदेश के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मैं जेल गई थी और मुलाकात हुई थी, लेकिन कोई विशेष संदेश नहीं था. मेरी मुलाकात केवल अब्दुल्ला से हुई थी, आजम साहब से मुलाकात नहीं हो पाई."

जौहर यूनिवर्सिटी को टेकओवर यानी सरकारी नियंत्रण में लेने की उठ रही मांगों पर उन्होंने कहा, "जौहर यूनिवर्सिटी का टेकओवर इतना आसान नहीं है. भारतीय संविधान में ऐसे कई अनुच्छेद हैं जो अल्पसंख्यकों को अपने शिक्षण संस्थान स्थापित करने और उन्हें संचालित करने का अधिकार देते हैं. सरकार इसे इतनी आसानी से टेकओवर नहीं कर सकती."

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