समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने मायावती के बयान का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि मायावती ने सही बात कही है. राजनीतिक दलों को विकास और जनता के मुद्दों पर बात करनी चाहिए. नेताओं को अपनी भाषा पर भी ध्यान देना चाहिए.
दरअसल, मायावती ने हाल ही में राजनीतिक दलों से संयम बरतने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि नेताओं को एक-दूसरे के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. राजनीति में बढ़ती कड़वाहट ठीक नहीं है. नेताओं को गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. सपा नेता रामगोपाल यादव ने मायावती की इस बात से सहमति जताई. उन्होंने कहा कि राजनीति में विकास और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए.
'मोदी के पिता पर ऐसी भाषा से सहमत नहीं'
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की भाषा पर भी रामगोपाल यादव ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह उससे सहमत नहीं हैं. रामगोपाल यादव ने कहा कि नेताओं को अपनी भाषा पर संयम रखना चाहिए. अगर नेता ही मर्यादा का ध्यान नहीं रखेंगे, तो राजनीति में भाषा का स्तर गिरता जाएगा.
उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर भी रामगोपाल यादव से सवाल किया गया. इस पर उन्होंने कहा कि यह फैसला अखिलेश यादव और कांग्रेस को करना है. दूसरे लोग क्या कह रहे हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.
उन्होंने 1992 में सपा और बसपा के बीच हुए सीट बंटवारे का उदाहरण भी दिया. रामगोपाल यादव ने बताया कि उस समय दोनों दलों के बीच 425 सीटों का बंटवारा सिर्फ 15 मिनट में हो गया था. जिन सीटों पर जिस पार्टी का ज्यादा समर्थन था, वहां उसे चुनाव लड़ने का मौका दिया गया. उन्होंने कहा कि यूपी में सीट बंटवारे के लिए 2022 के चुनाव के नतीजों को आधार बनाया जा सकता है. जिस पार्टी को किसी सीट पर ज्यादा वोट मिले थे, उसे उस सीट पर दावा करना चाहिए.
राहुल गांधी के बयान पर टिप्पणी से किया इनकार
सपा नेता रामगोपाल यादव से राहुल गांधी के उस बयान पर भी सवाल किया गया, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग को हटाने की बात कही थी. इस पर रामगोपाल यादव ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि यह INDIA गठबंधन का आंदोलन है. इसलिए वह इस पर कुछ नहीं कहना चाहते.
रामगोपाल यादव के बयान से साफ है कि वह राजनीतिक दलों के बीच भाषा की मर्यादा बनाए रखने के पक्ष में हैं. उन्होंने नेताओं से जनता के मुद्दों पर ध्यान देने की अपील का समर्थन किया.
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