पितृ पक्ष में नहीं जा पाए प्रयागराज या गया? ऐसे करें पिंडदान, तीर्थ पुरोहितों ने शुरू की नई व्यवस्था

26 सितंबर से शुरू हो रहे पितृ पक्ष को लेकर प्रयागराज और गया में तैयारियां तेज हो गई हैं. प्रयागराज के संगम पर देशभर से श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण के लिए पहुंचेंगे. इस बार जो लोग किसी कारण से प्रयागराज नहीं आ सकते, उनके लिए तीर्थ पुरोहितों ने अलग व्यवस्था की है. वहीं गया में 15 दिन चलने वाले पितृपक्ष मेले की सुरक्षा के लिए 118 पुलिस शिविर, CCTV निगरानी और तीन शिफ्ट में पुलिस बल तैनात करने की तैयारी है.

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प्रयागराज में पिँडदान करने पहुंचे लोग (Photo: ITG) प्रयागराज में पिँडदान करने पहुंचे लोग (Photo: ITG)

पंकज श्रीवास्तव

  • प्रयागराज ,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:50 PM IST

पितृ पक्ष सिर्फ श्राद्ध और तर्पण की परंपरा नहीं, बल्कि उन अपनों को याद करने का समय है, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं. घर के बड़े-बुजुर्गों की तस्वीरों के सामने दीप जलाने से लेकर गंगा के घाट पर तर्पण करने और पवित्र स्थलों पर पिंडदान तक, इन दिनों देशभर में लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धा से याद करते हैं. इस बार पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा.

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पितृ पक्ष शुरू होने से पहले ही प्रयागराज और गया में तैयारियां तेज हो गई हैं. एक तरफ प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू होने वाला है, तो दूसरी ओर गया में 15 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष मेले को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी शुरू कर दी है. इस बार जो लोग किसी वजह से प्रयागराज नहीं पहुंच सकते, उनके लिए तीर्थ पुरोहितों की ओर से ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था किए जाने की बात बताई जा रही है.

देश-विदेश में बैठे लोग भी जुड़ सकेंगे परंपरा से

प्रयागराज के तीर्थ पुरोहित प्रदीप पाण्डेय के मुताबिक, ऐसे कई लोग हैं जो नौकरी, विदेश में रहने, स्वास्थ्य संबंधी कारणों या दूसरी व्यस्तताओं के चलते पितृ पक्ष में संगम तक नहीं पहुंच पाते. ऐसे लोगों को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था की गई है. तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से भी लोग धार्मिक विधि से अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने और परंपरा से जुड़े रहने का प्रयास कर सकते हैं. इस व्यवस्था ने पितृ पक्ष की पुरानी परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का एक नया रास्ता तैयार किया है. हालांकि, ऑनलाइन पिंडदान को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और पुरोहितों की अपनी मान्यताएं हो सकती हैं. इसलिए श्रद्धालुओं को विधि और व्यवस्था के संबंध में संबंधित तीर्थ पुरोहित से जानकारी लेकर ही अनुष्ठान करना चाहिए.

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संगम पर क्यों पहुंचते हैं लोग?

प्रयागराज का संगम हिंदू धार्मिक परंपरा में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. पितृ पक्ष के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. लोग संगम में स्नान के बाद अपने पूर्वजों के लिए तर्पण करते हैं और पिंडदान व श्राद्ध की धार्मिक प्रक्रिया पूरी करते हैं. मान्यता है कि प्रयागराज में पितरों के निमित्त किए गए धार्मिक कर्म से पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार के कल्याण की कामना की जाती है. यही आस्था देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों को संगम तक खींच लाती है. तीर्थ पुरोहितों के अनुसार धार्मिक परंपरा में प्रयाग, काशी और गया का विशेष महत्व बताया गया है. कहा जाता है कि ‘विष्णु मुख प्रयाग, विष्णु नाभि काशी और विष्णु चरण गया’ की मान्यता के कारण इन तीर्थस्थलों पर पिंडदान का अलग धार्मिक महत्व है. पितृ पक्ष के दौरान प्रयागराज में केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों से भी लोग पहुंचते हैं. आंध्र प्रदेश से पिंडदान करने पहुंचे श्रद्धालु जय चंद्र प्रसाद ने भी अपने पूर्वजों के लिए संगम पर धार्मिक कर्मकांड किया.

गया में 15 दिन चलेगा पितृपक्ष मेला

प्रयागराज के साथ बिहार का गया भी पितृ कर्म के लिए प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है. गया में इस बार पितृपक्ष मेले को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर खास फोकस किया है. गया के विष्णुपद क्षेत्र में पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पिंडदानियों के पहुंचने की उम्मीद है. धार्मिक मान्यता के अनुसार गया में पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसी आस्था के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं. गया में पितृपक्ष से जुड़ी एक प्रसिद्ध धार्मिक कथा भगवान राम और राजा दशरथ से भी जुड़ी है. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम माता सीता के साथ गया पहुंचे थे और यहां फल्गु नदी के तट पर राजा दशरथ का पिंडदान किया था. मान्यता है कि पिंडदान के लिए सामग्री उपलब्ध नहीं होने पर माता सीता ने फल्गु नदी की रेत से पिंड बनाकर धार्मिक कर्म पूरा किया था.

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गया में CCTV से होगी मेले की निगरानी

पितृपक्ष मेले में लाखों लोगों की संभावित भीड़ को देखते हुए गया पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना शुरू कर दिया है. मेला क्षेत्र और आसपास के इलाकों में CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिनकी निगरानी कंट्रोल रूम से की जाएगी. गया के एसएसपी सुशील कुमार के मुताबिक, मेले की सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस पदाधिकारी और मजिस्ट्रेट तैनात किए जाएंगे. पुलिस बल तीन पालियों में काम करेगा. उन्होंने बताया कि मेला क्षेत्र में 118 पुलिस शिविर बनाए जा रहे हैं. इन शिविरों में चौबीसों घंटे पुलिस बल और पुलिस अधिकारी मौजूद रहेंगे. एसएसपी के अनुसार मेला क्षेत्र और आसपास के इलाकों में लगाए जा रहे CCTV कैमरों की कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जाएगी. खास तौर पर असामाजिक तत्वों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी, ताकि मेले के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना न हो.

यातायात व्यवस्था पर भी खास ध्यान

पितृपक्ष मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से गया में यातायात का दबाव बढ़ने की संभावना रहती है. इसे देखते हुए प्रशासन ने ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी तैयारी की है. एसएसपी ने बताया कि मेला क्षेत्र को नो-व्हीकल जोन के तौर पर व्यवस्थित किया जाएगा. इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की आवाजाही को आसान बनाना और भीड़ के बीच वाहनों से होने वाली परेशानी को कम करना है. इस तरह इस बार पितृ पक्ष में एक तरफ जहां प्रयागराज में श्रद्धालु संगम पर अपने पूर्वजों को याद करेंगे, वहीं गया में पिंडदानियों की सुरक्षा के लिए पुलिस का डिजिटल पहरा रहेगा.

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