'किसी कांवड़िए का जल न गिरे', इसलिए कांवड़ यात्रा के बीच मस्जिद पर डाले गए पर्दे, बच्चों की सुरक्षा के लिए लिया फैसला

मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा के दौरान मीनाक्षी चौक के पास स्थित मोहल्ला अंसारियान की एक मस्जिद को स्थानीय लोगों ने टेंट के पर्दों से ढक दिया. स्थानीय निवासी शहजाद ने बताया कि यह फैसला बच्चों की सुरक्षा और किसी तरह के विवाद से बचने के लिए अपनी मर्जी से लिया गया है. उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से कोई दबाव नहीं था.

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कांवड़ यात्रा के दौरान मस्जिद ढका. (Photo: Screengrab) कांवड़ यात्रा के दौरान मस्जिद ढका. (Photo: Screengrab)

संदीप सैनी

  • मुजफ्फरनगर,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:40 PM IST

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में इस समय कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है. लाखों शिवभक्त कांवड़िए जिले से होकर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों की ओर जा रहे हैं. कांवड़ियों की लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए शहर के मीनाक्षी चौक के पास स्थित मोहल्ला अंसारियान की एक मस्जिद को स्थानीय लोगों ने टेंट के पर्दों से ढक दिया है.

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स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कदम किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी से उठाया गया है. उनका कहना है कि मस्जिद में बच्चों को पढ़ाया जाता है और कांवड़ यात्रा के दौरान इलाके में काफी भीड़ रहती है. ऐसे में बच्चों के अचानक बाहर निकलने और कांवड़ियों से टकराने की आशंका रहती है. इसी वजह से हर साल भीड़ के समय मस्जिद को पर्दों से ढक दिया जाता है.

जानकारी के अनुसार, मीनाक्षी चौक के पास स्थित इस मस्जिद में बच्चों की पढ़ाई भी होती है. कांवड़ यात्रा के दौरान आसपास बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुजरते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि बच्चों का ध्यान बाहर की गतिविधियों की ओर चला जाता है और वे दौड़ते हुए बाहर आ सकते हैं. इससे किसी कांवड़िए का जल गिरने या किसी तरह की अप्रिय स्थिति बनने की संभावना रहती है.

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मस्जिद को टेंट के पर्दों से ढका गया

स्थानीय निवासी शहजाद ने बताया कि वह अंसारियान मोहल्ले के रहने वाले हैं और यह फैसला पूरी तरह स्थानीय लोगों का है. उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मस्जिद को पर्दों से ढका गया है. शहजाद ने कहा कि बच्चे बाहर का माहौल और कांवड़ यात्रा देखने के लिए उत्साहित हो जाते हैं. वे भागते हुए बाहर निकल सकते हैं. इसी वजह से पर्दे लगाए गए हैं ताकि बच्चे बाहर न आएं और किसी कांवड़िए से टकराने जैसी स्थिति न बने.

उन्होंने साफ कहा कि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई दबाव नहीं डाला गया. न प्रशासन ने कोई निर्देश दिया और न ही किसी ने ऐसा करने के लिए कहा. यह फैसला मोहल्ले के लोगों ने अपनी इच्छा से लिया है. शहजाद के अनुसार, मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले लोग अंदर ही नमाज अदा कर वापस चले जाते हैं. उन्होंने बताया कि यहां मुख्य रूप से मोहल्ले के लोग ही नमाज पढ़ने आते हैं. बाहर से लोगों का आना-जाना नहीं होता.

बच्चों की सुरक्षा के लिए उठाया कदम

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल कांवड़ यात्रा के दौरान भीड़ को देखते हुए एहतियात बरतना और किसी भी तरह के विवाद या दुर्घटना से बचना है. उनका मानना है कि इससे बच्चों की सुरक्षा भी बनी रहती है और कांवड़ यात्रा भी बिना किसी बाधा के आगे बढ़ती है. मुजफ्फरनगर से होकर गुजर रही कांवड़ यात्रा के बीच यह व्यवस्था स्थानीय स्तर पर की गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इसका मकसद केवल भीड़ के दौरान सावधानी बरतना और सभी के लिए सुरक्षित माहौल बनाए रखना है.
 

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